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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 76942 (ALL)

SHASHANK SHEKHAR GUPTA v. STATE OF U.P.

BAIL/25395/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130821 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 25395 of 2025 Applicant :- Shashank Shekhar Gupta Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Somendra Singh,Surendra Prasad Sharma Counsel for Opposite Party :- Deepak Kumar Jaiswal,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शदी ददीपक कक मद्वारि जद्वायसवद्वाल एववं रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कक सकनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक शशद्वावंक शवेखरि गकपद्वा ककी ओरि सवे मक०अ०सवं० 476/2017, अवंतगरत धिद्वारिद्वा 419, 420, 406, 504, 506, 120-बदी. भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा कनरलगवंज, धजलद्वा प्रयद्वागरिद्वाज मम जमद्वानत परि मकक करिनवे हवेतक प्रस्तकत वकयद्वा गयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तकत वकयद्वा वक आववेदक कक इस प्रकरिर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। ददौरिद्वान बहस आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा कथन वकयद्वा गयद्वा वक उक वववद्वावदत धिनरिद्वावश रु० 25,00,000/- (पच्चदीस लद्वाख रुपए मद्वात) जक पररिवद्वाददी कक दवेनद्वा थद्वा , धजसमम सवे रु० 20,00,000/- (बदीस लद्वाख रुपए मद्वात) बबक वण्डिमद्वावंण्डि ण्डिडद्वाफ्ट कवे जररिए तथद्वा रु० 5,00,000/- (पद्वापाँच लद्वाख रुपए) पकस्ट ण्डिवेटवेण्डि चवेक अवंवकत वदनद्वावंक 01.12.2025 पररिवद्वाददी कक प्रदद्वान वकयद्वा जद्वा चककद्वा हहै। इस आधिद्वारि परि आववेदक कक जमद्वानत परि अवमकक करि वदयद्वा जद्वाय। आववेदक कद्वा ककई पझूवर आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पकननः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक ककी तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकग करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकगदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खकद कक उपलब्धि करिद्वाएगद्वा औरि उन सभदी शतरवं कक स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जक न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकवपत करिवेगदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 11.07.2025 सवे कद्वारिद्वागद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कक जमद्वानत परि छकड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे उक कथन परि सहमवत प्रकट ककी गयदी तथद्वा आववेदक कक जमद्वानत परि अवमकक वकयवे जद्वानवे परि सहमवत प्रदद्वान ककी गयदी। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्ययों एववं पररिणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलककन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकस ववरिकधिद्वात्मक सद्वामग्रदी ककी अनकपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकनवे कवे तथ्य कक दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कक जमद्वानत परि मकक करिनवे कद्वा उपयकक आधिद्वारि हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे गकर-दकष परि वबनद्वा ककई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कक उपरिकक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतकवष्टि परि व्यवकगत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककई भदी दक प्रवतभझू प्रस्तकत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीकर कवे ददौरिद्वान अवभयकजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकजन सद्वावकययों व पदीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कक ण्डिरिद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करिवेगद्वा , वह परिदीकर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकगद्वा तथद्वा परिदीकर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकग करिवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दकरूपयकग नहदी करिवेगद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप नहहीं हकगद्वा न ककई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पकधलस अधधिकद्वाररिययों कक ककई प्रलकभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हदी उनसवे ककई वद्वायदद्वा करिवेगद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कक उजद्वागरि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। vi. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा उक उलवेधखत कथन कवे अनकपद्वालन मम , आववेदक ककी ओरि सवे सझूचनद्वाकतद्वार /पररिवद्वाददी कवे पक मम जद्वारिदी पकस्ट ण्डिवेटवेण्डि चवेक अवग्रम वदनद्वावंवकत 01.12.2025 कद्वा भकगतद्वान करिनद्वा सकवनणश्चत करिमगवे। 7. उपरिकक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानकसद्वारि रिद्द करिनवे कक स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad