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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 75191 (ALL)

VISHWADEEPAK BHARTI ALIAS GOVIND v. STATE OF U.P.

BAIL/24524/2025 · 2025-07-30

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:128420 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 24524 of 2025 Applicant :- Vishwadeepak Bharti Alias Govind Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Aman Arya Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Vishwadeepak Bharti Alias Govind ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 320/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 419, 420, 406, 504, 506 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा बवेललीपर , धजलद्वा रकोरखपसुर मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक वकसली वररकोह कद्वा सदस्य नहहीं हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर अवत -ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान घरनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहहीं हहै। वतरमद्वान घरनद्वा सवे सवंबवंधधित ककोई भली धिनरद्वावश आववेदक कवे खद्वातवे मम हस्तद्वावंतररत नहहीं हहई हहै, जको भली धिनरद्वावश हस्तद्वावंतररत हहई हहै, वह सह-अवभयसुक उपमद्र नद्वाथ कवे खद्वातवे मम हस्तद्वावंतररत हहई हहै। आववेदक कद्वा प्रश्नरत ण्डिली.ण्डिली. फद्वाईनमस कवं पनली सवे ककोई वद्वास्तद्वा -सरकोकद्वार नहहीं हहै। प्रश्नरत कवं पनली मम आववेदक न तको कमरचद्वारली हहै, न हली वकसली प्रकद्वार कद्वा लवेन -दवेन आववेदक दद्वारद्वा कवं पनली कवे सद्वाथ वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक कको सह-अवभयसुक उपमद्र नद्वाथ कद्वा सवंबवंधिली हकोनवे ककी वजह सवे वतरमद्वान वद्वाद मम आरकोवपत वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान आववेदक एववं सझूचनद्वाकतद्वार कवे बलीच वकसली प्रकद्वार कद्वा लवेन -दवेन कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै। इसली तरह कवे घरनद्वाक्रम सवे सवंबवंधधित अन्य आपरद्वाधधिक वद्वाददों मम आववेदक कको आरकोवपत वकयद्वा रयद्वा हहै, धजसवे आववेदक दद्वारद्वा शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 19 कवे मद्वाध्यम सवे स्पष वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रयद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 01.10.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यदों एववं पररणस्थवतयदों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतदों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यदों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयदों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशदों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यदों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयदों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यदों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 31.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad