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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 75125 (ALL)
TEERATH SINGH v. State of U.P. AND ANOTHER
ABAIL/6705/2024 · 2025-06-30
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 75125 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:100924 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 6705 of 2024 Applicant :- Teerath Singh Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Pranshu Dwivedi,Ram Prakash Dwivedi Counsel for Opposite Party :- G.A.,Sanjay Singh Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा आज पपूरक शपथपत्र प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा , धजसवे पत्रद्वावलली पर रखद्वा जद्वाए।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र, आववेदक तलीरथ धससिंह ककी ओर सवे मतु०अ०ससिं० 176/2023, अन्तगरत धिद्वारद्वा 376, 323, 506, 507, 494, 419 भद्वा.दसिं.ससिं. एवसिं धिद्वारद्वा 67 सपूचनद्वा प्रप्रौदद्योवगककी अधधिवनयम , थद्वानद्वा एत्मद्वादप्रौलद्वा, धजलद्वा आगरद्वा मम अवग्रिम जमद्वानत ककी ममॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ यद्योधजत वकयद्वा गयद्वा हहै वक वगरफ्तद्वारली ककी णस्थवत मम आववेदक कद्यो जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे ।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसिं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कद्यो सतुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
4.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्ततुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरद्योक धिद्वारद्वाओसिं मम दवेषवश तसिंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हहै, उसवे आशसिंकद्वा हहै वक उसवे उपरद्योक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै जबवक उसकवे ववरूद्ध कद्योई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली कद्योई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवग्रिम यह कथन वकयद्वा गयद्वा वक आदवेश वदनद्वासिंक 23.07.2024 कवे दद्वारद्वा आववेदक कद्यो अवग्रिम वनयत वतधथ तक अवग्रिम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयली थली। आदवेश वदनद्वासिंक 22.05.2025 कवे दद्वारद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा आदवेवशत वकयद्वा गयद्वा थद्वा वक इस आशय कद्वा पपूरक शपथपत्र प्रस्ततुत वकयद्वा जद्वाए वक आववेदक वनयत वतधथ कद्यो ससिंबसिंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हद्यो रहद्वा हहै, अथवद्वा नहहीं। उक आदवेश कवे अनतुपद्वालन ससिंबसिंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय ककी आदवेश- पवत्रकद्वा आज पपूरक शपथपत्र कवे मद्वाध्यम सवे दद्वाधखल ककी गयली हहै , धजसमम यह स्पष्ट हहै वक आववेदक वनयवमत रूप सवे ववचद्वारर हवेततु ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हद्यो रहद्वा हहै। पतुनन उनकद्वा कथन हहै वक आववेदक ववचद्वारर और जमॉच कवे दप्रौरद्वान सहयद्योग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हहै वक वह जमॉच एजमसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणस्थत रहवेगद्वा एवसिं
आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयद्योग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हद्योगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खतुद कद्यो उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसिं कद्यो स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै, जद्यो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरद्योवपत करवेगली।
5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयतुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरद्योधि मम यह तकर प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभयतुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हद्यो रहली हहै तथद्वा इस घटनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा ससिंभद्वाव्य हहै। इसधलए अवभयतुक कद्यो अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक न वकयद्वा जद्वाय।
6.
यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनररयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कद्यो आरद्योपपों ककी प्रकक वत और गसिंभलीरतद्वा, आरद्योपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससिंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कद्यो आरद्योपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वासिंकन करनद्वा चद्वावहए और आरद्योपली ककी वद्वास्तववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए।
7. उभय पक्षि कवे तकर्दो एवसिं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससिंबसिंधिली ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासिंतपों कद्यो ध्यद्वान मम रखतवे हहए और पक्षिकद्वारपों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसिं कवे कथनपों , आरद्योपपों ककी प्रकक वत , आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यपों एवसिं ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथयपों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणस्थत हद्योनवे , पररणस्थवतयपों कद्यो ध्यद्वान मम रखतवे हहए , मद्वामलवे कवे गतुर-दद्योष पर वबनद्वा कद्योई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा स्वलीकद्वार वकए जद्वानवे यद्योग्य हहै।
8. तद्नतुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
9. उपरद्योक मतुकदमद्वा अपरद्वाधि ससिंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मम , उसवे ससिंबसिंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय ककी ससिंततुवष्ट पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसिंधि पत्र एवसिं उसली धिनरद्वावश कवे दद्यो प्रवतभपू प्रस्ततुत करनवे पर , सत्र परलीक्षिर कवे वनस्तद्वारर हद्योनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभयद्योजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभयद्योजन पक्षि कवे गवद्वाहपों कद्यो धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा।
iii) आववेदक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत वतधथ पर उपणस्थत हद्योगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान कद्योई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरद्योप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हहै यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससिंदवेह हहै। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यपों सवे पररवचत वकसली व्यवक कद्यो प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे कद्योई प्रलद्योभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पतुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि तथ्यपों कद्वा खतुलद्वासद्वा करनवे सवे ववमतुख हद्यो जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ करवे।
10.
उपरद्योक शतर्दोसिं कवे उलसिंघन ककी णस्थवत मम अवभयद्योजन पक्षि कद्यो , आववेदक कद्यो प्रदत अवग्रिम जमद्वानत कवे वनरस्तलीकरर हवेततु उपयतुक आववेदन प्रस्ततुत करनवे ककी स्वतसिंत्रतद्वा हद्योगली। Order Date :- 1.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad