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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 74982 (ALL)
NETRAPAL SARJAN v. STATE OF U.P.
BAIL/24490/2025 · 2025-07-23
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 74982 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:121457 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 24490 of 2025 Applicant :- Netrapal Sarjan Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ram Shiromani Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Netrapal Sarjan ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 03/2025, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा रसुनन्नौर, धजलद्वा सम्भल मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रद्वाथवमककी अवतववलणम्म्बित हहै तथद्वा उक ववलम्म्बि कद्वा ककोई समसुवचित स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक उक वम्बिककीत भझूवम कद्वा मद्वाधलक थद्वा तथद्वा उक जमलीन कको म्बिवेचिनवे कद्वा उसकवे पद्वास पझूरद्वा अधधिकद्वार थद्वा, इसधलए उसनवे जमलीन कको म्बिवेचि वदयद्वा। उक जमलीन कको म्बिवेचिनवे मम उसनवे वकसली प्रकद्वार कद्वा ककोई फजर्जीवद्वाडद्वा नहहीं वकयद्वा हहै तथद्वा वकसली भली प्रकद्वार कद्वा कझू टरवचित दस्तद्वाववेज तहैयद्वार नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद पझूररततः दलीवद्वानली प्रकक वत कद्वा हहै , वकन्तसु उसवे जद्वान-म्बिझूझकर आपरद्वाधधिक प्रकक वत कद्वा म्बिनद्वा वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक कवे ववरुद्ध ऐसद्वा ककोई भली सद्वाक्षय पतद्वावलली पर उपणस्थत नहहीं हहै , धजससवे वतरमद्वान आरकोप आववेदक पर म्बिनतद्वा प्रतलीत हकोतद्वा हको। पसुनतः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवकयद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जम्बि भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 25.05.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय।
4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रम्बिल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए
आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय।
5.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे म्बिद्वाद , सम्बिझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अततः वद्वाद कवे रसुर -दकोष पर वम्बिनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंम्बिवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत म्बिवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे दन्नौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पलीवडतद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे दन्नौरद्वान वम्बिनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे म्बिद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 24.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad