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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 74953 (ALL)
MOHAMMAD ASIF v. State of U.P.
BAIL/25962/2024 · 2025-08-21
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 74953 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:144604 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 25962 of 2024 Applicant :- Mohammad Asif Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Mohd. Ashraf Abbasi,Naushad Alam,Shashi Kant Dwivedi Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2.
वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Mohammad Asif ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 1154/2020, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 467, 468, 406 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा बद्वारद्वादरली, धजलद्वा बरवेलली मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3.(क) आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। यह प्रद्वासवंवरक तथ्य हहै वक आववेदक एलआईसली एजमट हहै और वरर 2013 मम 'स्वद्वास्थ्य जलीवन इन्फद्वा ण्डिवेवलपसर इवंवण्डियद्वा' कद्वा भली एजमट थद्वा और यह कवं पनली भद्वारत सरकद्वार दद्वारद्वा पवंजलीकक त थली। आववेदक और सझूचनद्वाकतद्वार एक-दझूसरवे कको अच्छली तरह जद्वानतवे हह। आववेदक नवे पझूवर मम भली सझूचनद्वाकतद्वार ककी कई पपॉधलधसयद्वायाँ जमद्वा करद्वाई हह, लवेवकन कभली ककोई वशकद्वायत नहहीं वमलली। अवग्रिम यह भली कथन वकयद्वा रयद्वा वक सझूचनद्वाकतद्वार नवे स्वयवं ऐसली कवं पनली मम कसु छ रद्वावश जमद्वा करनवे ककी इच्छद्वा व्यक ककी , जहद्वायाँ सवे उसककी रद्वावश कम समय मम दकोरसुनली हको जद्वाएरली। आववेदक नवे उक कवं पनली 'स्वद्वास्थ्य जलीवन इन्फद्वा ण्डिवेवलपसर इवंवण्डियद्वा ' मम पहैसद्वा जमद्वा करनवे कद्वा ससुझद्वाव वदयद्वा तथद्वा उक कवं पनली कवे वनदवेशक कद्वा पतद्वा वदयद्वा। सझूचनद्वाकतद्वार नवे उक कवं पनली और कद्वायद्वारलय ककी उवचत जद्वायाँच कवे बद्वाद , 'स्वद्वाथ्य जलीवन इवंफद्वा ण्डिवेवलपसर इवंवण्डियद्वा' कवे नद्वाम सवे दको चवेककों कवे मद्वाध्यम सवे स्वयवं धिनरद्वावश कद्वा वनववेश वकयद्वा थद्वा। वदनद्वावंक 18.03.2015 कको सझूचनद्वाकतद्वार कवे खद्वातवे सवे एक लद्वाख रुपयवे (दको चवेक कवे मद्वाध्यम सवे ) ककी रद्वावश 'स्वद्वाथ्य जलीवन इवंफद्वा ण्डिवेवलपसर इवंवण्डियद्वा' कवे खद्वातवे मम स्थद्वानद्वावंतररत हको रयली। (ख) रवद्वाहकों नवे अपनवे बयद्वान एववं सझूचनद्वाकतद्वार नवे प्रद्वाथवमककी मम कथन वकयद्वा हहै वक सझूचनद्वाकतद्वार नवे आववेदक कको उक कवं पनली मम जमद्वा करनवे कवे धलए एक लद्वाख रुपयवे नकद वदए थवे, जबवक सझूचनद्वाकतद्वार कवे खद्वातद्वा वववरर (जको पतद्वावलली पर सवंलग्न हहै) सवे पतद्वा चलतद्वा हहै वक सझूचनद्वाकतद्वार नवे उक कवं पनली कवे नद्वाम सवे 50-50 हजद्वार रुपयवे कवे दको चवेक वदए थवे और सझूचनद्वाकतद्वार कवे खद्वातवे सवे उक रद्वावश हस्तद्वावंतररत हकोकर कवं पनली कवे खद्वातवे मम जमद्वा हको रयली थली । आववेदक दद्वारद्वा सझूचनद्वाकतद्वार कद्वा वकसली भली प्रकद्वार कद्वा पहैसद्वा नहहीं हड़पद्वा रयद्वा हहै , न हली उक रुपए आववेदक कवे खद्वातवे मम हस्तद्वावंतररत हहआ हहै। (र) आववेदक न तको वनदवेशक हहै और न हली उस कवं पनली कवे कद्वामकद्वाज कको चलद्वानवे वद्वालद्वा व्यवक हहै। कवं पनली दद्वारद्वा जद्वारली वकए रए प्रमद्वारपतकों/बपॉन्ण्डि पर भली आववेदक कवे हस्तद्वाक्षर यद्वा नद्वाम नहहीं हह। आववेदक उक कवं पनली कद्वा कवे वल एक कमरचद्वारली
/एजमट हहै। कवं पनली दद्वारद्वा जद्वारली उक बपॉन्ण्डि सझूचनद्वाकतद्वार कको पझूवर मम हली प्रद्वाप्त हको चसुकद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा सझूचनद्वाकतद्वार कवे सद्वाथ वकसली प्रकद्वार ककी धिकोखद्वाधिड़ली एववं जद्वालसद्वाजली कद्वा ककोई कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै तथद्वा वकसली प्रकद्वार कवे दस्तद्वाववेज ककी कझू टरचनद्वा कद्वाररत नहहीं ककी रयली। वतरमद्वान वद्वाद मम सझूचनद्वाकतद्वार दद्वारद्वा कवं पनली कवे ववरुद्ध ककोई प्रद्वाथवमककी दजर न करद्वाकर, मद्वात आववेदक कको अवभयसुक बनद्वा वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 20.05.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यकों एववं पररणस्थवतयकों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतकों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रिली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6.
अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोर पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्टि पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यकों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षयकों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशकों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा।
v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यकों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयकों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यकों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 22.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad