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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 74735 (ALL)
RAGHUNATH SHARMA v. State of UP
ABAIL/6681/2024 · 2025-08-05
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 74735 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:133326 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 6681 of 2024 Applicant :- Raghunath Sharma Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Divyanshu Pathak,Manoj Mishra Counsel for Opposite Party :- Arun Kumar Vishvakarma,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक रघघुनद्वाथ शमद्वार ककी ओर सवे मघु०अ०ससं० 173/2023, अन्तगरत धिद्वारद्वा 420, 406 भद्वा०दसं०वव०, थद्वानद्वा बरहन, धजलद्वा आगरद्वा मम अवग्रिम जमद्वानत पर मघुक करनवे हवेतघु प्रस्तघुत वकयद्वा गयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररवद्वादली कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा शली चसंदन धससंह कको सघुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तघुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हहै, उसवे आशसंकद्वा हहै वक उसवे उपरकोक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै, जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम उलवेधखित हहै। आववेदक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद सवे ससंबसंधधित वकसली प्रकद्वार ककी कपू टरचनद्वा कद्वाररत नहहीं ककी गयली हहै, न हली ककोई धिकोखिद्वाधिडली कद्वाररत ककी गयली हहै। आववेदक कको पपूवर मम वदनद्वासंक 14.11.2024 कको असंतररम अवग्रिम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयली थली तथद्वा उक जमद्वानत मम आरकोवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा अनघुपद्वालन वकयद्वा जद्वा
रहद्वा हहै। उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक कवे ववरूद्ध अभली तक ककोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह भली आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक खिघुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली।
5.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तघुत वकयद्वा गयद्वा वक अवभयघुक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गसंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै तथद्वा पपूवर मम आववेदक कवे ववरुद्ध पयद्वारप सद्वाक्ष्य कवे आधिद्वार पर पघुधलस दद्वारद्वा आववेदक कवे ववरुद्ध ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आरकोपपत्र प्रवेवषत वकयद्वा गयद्वा थद्वा एवसं आववेदक कवे ववरुद्ध आरकोप तय हको चघुकद्वा हहै। इसधलए आववेदक कको अवग्रिम जमद्वानत पर मघुक वकयवे जद्वानवे कद्वा ककोई औवचत्य प्रतलीत नहहीं हकोतद्वा हहै। अततः अवभयघुक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वाय।
6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नवे मद्वानद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनररय करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोप ककी प्रकक वत और गसंभलीरतद्वा, अवभयघुक कद्वा पपूवरवकत, अवभयघुक कवे न्यद्वाय सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए तथद्वा न्यद्वायद्वालय कको अवभयघुक कवे ववरुद्ध उपलब्धि ससंपपूरर सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानलीपपूवरक मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए तथद्वा अवभयघुक ककी सटलीक भपूवमकद्वा कको भली ध्यद्वान मम रखिनद्वा चद्वावहए।
7. वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिली ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासंततों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पककद्वारतों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनतों , आरकोपतों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यतों एवसं पररणस्थवतयतों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए चपूसंवक पपूवर मम ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आववेदक कवे ववरुद्ध सद्वाक्ष्य पद्वायवे जद्वानवे कवे उपरद्वान्त आरकोपपत्र प्रवेवषत वकयद्वा जद्वा चघुकद्वा थद्वा तथद्वा
अद्यतन आख्यद्वा कवे अनघुसद्वार आववेदक कवे ववरुद्ध आरकोप तय हको चघुकद्वा हहै एवसं आववेदक कवे ववरुद्ध पयद्वारप सद्वाक्ष्य पत्रद्वावलली पर ववद्यमद्वान हह, अततः मद्वामलवे कवे गघुर- दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वलीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य नहहीं हहै, तद्नघुसद्वार आववेदक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र अस्वलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
8. उपरकोकद्वानघुसद्वार वद्वाद कवे गघुर-दकोष पर वटप्परली वकयवे बगहैर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
9. इस वद्वाद मम यवद ककोई असंतररम आदवेश हको, तको वह स्वततः समद्वाप समझद्वा जद्वाए।
10. कद्वायद्वारलय कको वनदरवशत वकयद्वा जद्वातद्वा हहै वक इस आदवेश ककी प्रवतधलवप ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय कको अववलम्ब प्रवेवषत करम। Order Date :- 6.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad