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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 24400 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 218/2022 अन्तगर्त धारा 420, 467, 468, 471, 506 भारतीय दण्ड संिहता, थाना जूही, िजला कानपुर नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
संक्षेप में अिभयोजन कथानक यह है िक अिभयोगी द्वारा अपनी माता जी के साथ पंजीकृ त बैनामा के माध्यम से मकान संख्या 830/12 जूही खुदर् िदनांक 30.06.2022 को क्रय िकया गया था तथा वादी के मकान के सामने ही भानु प्रकाश बाजपेई की बतर्न की दुकान है। यह िक उक्त भानु प्रकाश बाजपेई शहर का जाना माना दबंग व पुराना ऑिडयो िरकािडग वादी के पास मौजूद है। मना करने पर अगले िदन अिभयुक्त भानु प्रकाश बाजेपई द्वारा दो अज्ञात लोगों के साथ यादी को जान से मारने की धमकी देते हुए पचीस लाख रूपये की रंगदारी चाही, िजसको सीसीटीवी फु टेज में देखा जा सकता है। अपनी जमीन बचाने के िलए वादी ने िदनांक 09.07.2022 को 70,000/- रुपये व उसके बाद 30,000/- रुपये, कु ल एक लाख रुपये िदए। तब जाकर वादी का काम चालू हो सका। यह िक उक्त भानु प्रकाश बाजपेई ने वादी की िनजी संपित्त 83A/12 जूही खुदर् रकबा 618 वगर् गज को कब्जाने व हड़पने को हड़पने के उद्देश्य से अपने सािथयों मनोज कु मार अवस्थी, आयर्न शुक्ला, राके श कु मार ओझा, पंकज कु मार िसह, परमेश िमश्रा, गौरव ित्रपाठी, आयुष ितवारी, अरिवन्द िसह के साथ िमलकर एक कू ट रिचत ट्रस्ट श्री ठाकु र जी एवं श्री महादेव जी िवराजमान मंिदर का िनमार्ण िदनांक 23.07.2022 को िकया और उसे उपिनबंधक तृतीय कानपुर नगर के कायार्लय में पंजीकृ त कराया। यह िक उक्त ट्रस्ट में अिभयुक्त भानु प्रकाश बाजपेई स्वयं मुख्य न्यासी व अन्य लोग प्रबंधक, कोषाध्यक्ष व सदस्य बनकर सिम्मिलत हुए है। वादी की तहरीर के आधार पर संबंिधत थाना जूही में िदनांक 18.11.2022 को समय 19:18 बजे अिभयुक्त भानु प्रकाश बाजपेई, मनोज कु मार अवस्थी, आयर्न शुक्ला, राके श कु मार ओझा, Versus Counsel for Applicant(s) : Rakesh Dubey Counsel for Opposite Party(s) : Shikhar Awasthi, G.A. Bhanu Prakash Bajpai .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
पंकज कु मार िसह, परमेश िमश्रा, गौरव ित्रपाठी, आयुष ितवारी व अरिवन्द िसह के िवरुद्ध धारा 147, 420, 467, 468, 471 व 506 आई.पी.सी.
के अंतगर्त अिभयोग पंजीकृ त िकया गया तथा िववेचना शुरू हुई तथा िववेचना के क्रम में िववेचक द्वारा अिभयुक्त के िवरुद्ध धारा 147, 384, 420, 467, 468, 471, 506 भा०दं०सं० का कोई साक्ष्य न पाते हुये सािक्षयों के अभाव में िववेचना जिरये अंितम िरपोटर् सं०-8/23 िदनांिकत 29.01.2023 समाप्त की। िजसके क्रम में वादी के िशकायती प्राथर्नापत्र पर संयुक्त पुिलस आयुक्त के आदेश िदनांिकत 28.02.2023 के क्रम में अिभयोग की िववेचना धारा 173 (8) दं०प्र०सं० के प्रावधानों के तहत कराये जाने का आदेश पािरत िकया गया। तत्क्रम में िववेचना के क्रम में एस०सी०डी० पचार् सं०- 25 द्वारा प्रश्नगत ट्रस्ट को अवैधािनक पात हुये पूवर् में प्रेिषत अंितम िरपोटर् सं०-8/23 को न्यायालय आदेश िदनांिकत 02.01.2024 माध्यम से िनरस्त कराया गया। कालांतर में िववेचना के क्रम में नामजद ज्ञान प्रकाश बाजपेई, मनोज कु मार अवस्थी, राके श कु मार ओझा व पंकज कु मार िसह की अिभयोग में संिलप्तता न पाते हुये उनके नाम िववेचना से पृथक िकये गये व अिभयोग में धारा 147 व 384 भारतीय दण्ड संिहता का अपराध नहीं पाया गया। तत्क्रम में न्यायालय द्वारा िनगर्त गैर जमानती अिधपत्र के क्रम में आवेदक / अिभयुक्त को िगरफ्तार कर िदनांक 12.06.2025 को न्याियक अिभरक्षा में भेजा गया।
4.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। इस मालमें में प्रासंिगक तथ्य यह है िक यह प्रकरण पू्णर्तः िदवानी प्रकृ ित का है तथा इसके संबंध में दो िदवानी वाद लंिबत है तथा यह िववाद श्री ठाकु र जी एवं श्री महादेव जी िवराजमान मंिदर ट्रस्ट के नाम और शैली में जूही खुदर् मोहाल, जानकी कुँ वर, परगना एवं िजला कानपुर नगर में मथुरा प्रसाद द्वारा िनिमत ट्रस्ट की संपित्त पर आिधपत्य करने के कारण उत्पन्न हुआ है। उक्त संपित्त को सूचनाकतार् द्वारा किथत रूप से उसके एक उत्तरािधकारी द्वारा उसके पक्ष में िनष्पािदत िवक्रय िवलेख की आड़ में हड़प िलया गया है। उक्त प्रपत्रों के आधार पर उसके द्वारा पूजा स्थल को तोड़ने का प्रयास िकया गया, िजससे क्षेत्रीय जनभावनाएं आहत होने पर मिन्दर में पूजा अचर्न करने वाले जनों के सहयोग से अपनी िनजी पूंजी से आवेदक / अिभयुक्त द्वारा मिन्दर के रखरखाव हेतु एक ट्रस्ट का सृजन िकया गया। िजसकी सम्पित्त मात्र 11,000/- रुपये िनधार्िरत की गयी और उक्त ट्रस्ट का एकमात्र उददेश्य मिन्दर की पूजा अचर्ना एवं मिन्दर की सुरक्षा का रहा। सम्पित्त स्वािमत्व के संबंध में ट्रस्ट में कोई उल्लेख नहीं है। तत्क्रम में मंिदर के संरक्षण हेतु आवेदक / अिभयुक्त द्वारा िसिवल जा सी०िड० कानपुर नगर में एक वाद संख्या 1579/2022 श्री ठाकु र जी एवं श्री महादेव जी िवराजमान मंिदर ट्रस्ट आिद बनाम श्रीमती कु सुम गुप्ता आिद प्रस्तुत िकया। आगे यह भी कहा गया िक दंड िवधान की सख्त व्याख्या को ध्यान में रखते हुए, अथार्त, व्याख्या के िनयम का उल्लेख करते हुए िजसमें प्राकृ ितक अनुमानों को प्राथिमकता दी जाती है, हम देखते हैं िक जालसाजी का आरोप उस व्यिक्त पर नहीं लगाया जा सकता, जो दस्तावेज़ का िनमार्ता नहीं है। जैसा िक कई मामलों में माना जाता है, दस्तावेज़ बनाना उसे बनवाने से अलग है। धारा 464 के स्पष्टीकरण 2 में आगे स्पष्ट िकया गया है िक धारा 464 BAIL No. 24400 of 2025 2 के अंतगर्त अपराध स्थािपत करने के िलए यह आवश्यक है िक झूठा दस्तावेज़ बनाया गया हो और अिभयुक्त व्यिक्त उसका िनमार्ता हो, अन्यथा अिभयुक्त व्यिक्त जालसाजी के अपराध के िलए उत्तरदायी नहीं होगा। पुनः उनका कथन है िक सभी अपराधों का िवचारण प्रथम श्रेणी मिजस्ट्रेट द्वारा िकया जा सकता है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की
प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 12.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभोगी द्वारा अिभयुक्त के िवरूद्ध जबरन वसूली, जालसाजी, धोखाधड़ी और अन्य अवैध कृ त्यों के सम्बन्ध में प्रथम सूचना दजर् करने हेतु 24.08.2022 प्राथर्ना पत्र िदया, परन्तु अिभयुक्त के प्रभाव के कारण उसकी प्रथम सूचना अत्यंत िवलम्भ से तीन माह बाद 18.11.2022 को दजर् हो पाई। अिभयुक्त एक आपरािधक प्रवृित्त का व्यिक्त है जो स्वयं 8 मुकदमो का आपरािधक इितहास रखता है, एक अपराध में दोषिसद्ध एवं एक नामी आपरािधक संगिठत िगरोह का अगुवा है, िजसमें उसका सगा भाई ज्ञानू बाजपेयी 27 मुकदमो का आपरािधक इितहास रखता है और कानपुर में एक घोिषत िहस्ट्री शीटर भी है, भी शािमल है। अिभयुक्त के उक्त आपरािधक गैंग की कायर्शैली कु छ इस प्रकार है के गैंग लीडर भानु बाजपेयी पीछे रहकर अपने भाई ज्ञानू एवं अन्य सह-अिभयुक्तों के द्वारा मासूम लोगों की ज़मीने हड़पता है। अिभयुक्त द्वारा अपने सहयोिगयों के साथ िमलकर संपित्त हड़पने के इरादे से, अवैध रूप से कु छ फ़जीर् एवं कू टरिचत दस्तावेज़ तैयार िकये एवं जालसाजी की और 23.07.2022 को एक ट्रस्ट बनाया, िजससे अिभसाक्षी की िनजी संपित्त को ट्रस्ट की संपित्त होने का दावा िकया गया। अिभयुक्त की िगरफ्तारी पे रोक लगाने हेतु दािखल की गई िरट यािचकायें इस माननीय न्यायालय से तीन बार खािरज की जा चुकी हैं। इससे पिरलिक्षत है िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6.
उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। BAIL No. 24400 of 2025 3
आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 CP.sahani BAIL No. 24400 of 2025 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad