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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 7401 (ALL)

RAMRAJ URF RAMJAS v. D.D.C. AND OTHERS

WRIB/4596/1985 · 2025-05-07

Saurabh Shyam Shamshery

body2025

Judgment text

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Neutral Citation No. - 2025:AHC:74217 Judgment Reserved on 28.4.2025 Delivered on 08.05.2025 Court No. - 6 Case :- WRIT - B No. - 4596 of 1985 Petitioner :- Ramraj Urf Ramjas (since deceased) through L.R. Vs. Respondent :- D.D.C. And Others Counsel for Petitioner :- C K Rai,Faujdar Rai,Purnendu Prakash Pandey Counsel for Respondent :- Dr. Vinod Kumar Rai,H S N Tripathi,Santosh Kumar,Santosh Kumar Mishra,SC,Subhash Kumar,Vijai Kumar Rai,Vinay Kumar Mishra Hon'ble Saurabh Shyam Shamshery,J. 1. Heard Sri Purnendu Prakash Pandey, learned counsel for the petitioner, Sri R.C.Singh, learned Senior Counsel assisted by Sri Vinay Kumar Mishra, learned counsel for the respondent no.5 and Sri Santosh Kumar Mishra, learned counsel for the respondent no.4. 2. This writ petition was filed in the year 1985 and is being finally decided in the year 2025 i.e. after 40 years. 3. It was a case arising out of consolidation proceedings, regarding Khata Nos.109 and 87 of village North Patti and Khata No.111 and 280 of Southern Patti of Vijaipur. 4. In basic year, Khata No.109 and 87 was jointly recorded in the name of Original Petitioner (Ramraj Urf Ramjas) and Mst. Behla, widow of Bahoran (Respondent no.4 is her alleged adopted son), 2 Khata No.87 was exclusively recorded in the name of Mst. Behla and Khata Nos.111 and 280 were recorded in the name of Ram Chandra son of Jamuna (Original respondent no.5). 5. During consolidation proceedings, original petitioner filed an objection in respect of all 4 khatas that all of them exclusively belonged to him. 6. The other objection was filed by Shaktidhar (respondent no.4) that his name be recorded in all four khatas alongwith original petitioner and claimed ½ (half) share inter-alia on a ground that he was an adopted son of Mst. Behla, widow of Bahoran. 7. The Consolidation Officer vide order dated 31.3.1982, allowed objection of respondent no.4 being heir of Mst. Behla, widow of Bahoran being an adopted son and co-tenure holder to the extent of ½ (half) of Khata Nos.109 and 87. It was also directed that name of Ram Chandra son of Jamuna (Original respondent no.5) be deleted from Khata Nos.111 and 280 and name of Ramraj alias Ramjas son of Rakta (original petitioner) was directed to be recorded over the same. Objection of respondent no.4 over Khata No.280 and 111 was rejected. Relevant part of the order is reproduced hereinafter: " रामरा न आप ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा श्री भी श्रीमती पीतारी अथवामी भी श्रीमती पीतारी अथवा पी भी श्रीमती पीतारी अथवाारी भी श्रीमती पीतारी अथवा अथवा बइला सहखा दार द हन बाब ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं या। उसे वे स्वयं उस व स्वयं स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार भी भी श्रीमती पीतारी अथवा र है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं ब&' बइला बराबर उन साथ बौर सहखादार द रही भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं रामरा न 05.06.66 अपन आध हस्स ा बी भी श्रीमती पीतारी अथवास गुना मा या। उसे वे स्वयं 25.01.71 बइला न बी भी श्रीमती पीतारी अथवास गुना मा या था दनों का खाता ा खाा अलग अलग ह गया। उसे वे स्वयं रामरा न अपन भूम धरी भी श्रीमती पीतारी अथवा खाा ा 07.06.62 रामनर. पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० श्याम सुन्दर गाटा नं० 785/-10 ,1/2 व 787/-33 ा बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामा या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था बइला न अपन भूमधरी भी श्रीमती पीतारी अथवा खाा गाटा नं० 780/- 9,1/2 , 781/-07, 782/-07, 785/-10, ½ , 787/-33 ा बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामा चै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवान व गपाल दया , जिस बाब मसूखी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा दावा रामरा न दी भी श्रीमती पीतारी अथवावानी भी श्रीमती पीतारी अथवा में दाखिल दाखल या और उसमें दाखिल वह हार गय। उसे वे स्वयं उस वरूद्ध उन्होने कोई अपील उन्हन ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल , नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा 3 नहीं किया। उसे वे स्वयं या इसस यह स्प: है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उन पर रसुडी भी श्रीमती पीतारी अथवा टा ा प्रभाव लागू हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा इस आद. में दाखिल दी भी श्रीमती पीतारी अथवावानी भी श्रीमती पीतारी अथवा अदाल द्वारा यह नर्णि? हुआ है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा ववाद भूम मु० बइला ा अधिध ार है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा था उसन बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामा या वह सही भी श्रीमती पीतारी अथवा था। उसे वे स्वयं दी भी श्रीमती पीतारी अथवावानी भी श्रीमती पीतारी अथवा न्यायालय ा न?य अ&न्म ह चु ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा इस प्र ार यह नर्विववाद जिसद्ध उन्होने कोई अपील है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा ववाद भूम पर मु० बइला ा ह था। उसे वे स्वयं हां गदनामा ा प्रB है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा असल गदनामा यस० डी भी श्रीमती पीतारी अथवा० ओ० यहां 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा मु दमें दाखिल में दाखिल प. है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं गदनामा फट ापी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल गयी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं .Eधर न रजिस्टड गदनामा प्रधिलप भी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं .Eधर रफ स वाद नं० 948 अन्ग धारा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा अF दावा था उसमें दाखिल रामरा ा ए वाल दावा प्रधिलप था उस पर पारिर आद. प्रधिलप भी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं गद सम्बन्ध में दाखिल गानन मश्र व रामचन्दर मश्र बौर गवाह प. या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं गानन मश्र .Eधर मश्र ा प्रा ृ धि बडा भाई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं था रामचन्दर मश्र उस प्रा ृ धि पा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन लग ा थन है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा .Eधर न गद लन समय अवस्था 5 वर्ष की थी। तथा उसके पिता थी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था उस पा रामचन्दर व मां न .Eधर मु० बइला गद म दया। उसे वे स्वयं गदनामा रजिस्ट्री भी श्रीमती पीतारी अथवा दनां 27.10.75 हनी भी श्रीमती पीतारी अथवा बाई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा था उसी भी श्रीमती पीतारी अथवा दन गदनामा ा सम्पM हना बाया गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं .Eधर रफ स गदनामा गवाह द्वारा सदी भी श्रीमती पीतारी अथवा राया गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं रामरा ा थन है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा मु० बइला ा म&स्ष् ठी भी श्रीमती पीतारी अथवा नहीं किया। उसे वे स्वयं रहा था। उसे वे स्वयं था उसन ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामा नही भी श्रीमती पीतारी अथवा या न ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं गदनामा ायवाही भी श्रीमती पीतारी अथवा ही भी श्रीमती पीतारी अथवा हुई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं। उसे वे स्वयं उन ा यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा थन है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा मु० बइला गदनामा पूव मर गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं थी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं उन साक्ष्यों का खाता स यह स्प: हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा व मु० बइला म&स्ष् खराब हन ा ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं साक्ष्य नहीं किया। उसे वे स्वयं या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था व यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा साब नहीं किया। उसे वे स्वयं र स था थिथ गदनामा पूव मु० बइला मर गयी भी श्रीमती पीतारी अथवा थी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं हां गदनामा हन ा प्रB है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं .Eधर ा यह थन है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा गदनामा ा र.म व गदनामा रजिस्ट्री भी श्रीमती पीतारी अथवा ए ही भी श्रीमती पीतारी अथवा दन हुई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं परन्ु सी भी श्रीमती पीतारी अथवा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा साक्ष्य स व यह जिसद्ध उन्होने कोई अपील नहीं किया। उसे वे स्वयं र स ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं गदनामा समय ा धार्विम संस् ार हुआ था। उसे वे स्वयं .Eधर द्वारा दाखल गदनामा स यह प्र ट हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उस समय .Eधर प्रा ृ धि मां जिन्दा थी भी श्रीमती पीतारी अथवा यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा हा गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामचन्दर न अपनी भी श्रीमती पीतारी अथवा स्त्री भी श्रीमती पीतारी अथवा स राय ली भी श्रीमती पीतारी अथवा थी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामचन्दर था उन स्त्री भी श्रीमती पीतारी अथवा दन न .Eधर मु० बइला गद दन स सहम थ। उसे वे स्वयं ऐसा गदनामा दाखल प्रधिलप लख स स्प: हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा दूसर यह आवश्य भी भी श्रीमती पीतारी अथवा नहीं किया। उसे वे स्वयं था स्त्री भी श्रीमती पीतारी अथवा स राय लन बा लख राय स ही भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं यह मौख हना पयाT था। उसे वे स्वयं अU यह जिसद्ध उन्होने कोई अपील है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा मु० बइला न गद लया था था .Eधर मु० बइला द पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं अU द पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ना मु० बइला भूम पर उन ा ह हगा। उसे वे स्वयं इस प्र ार इन प्रB ा न?य ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं साक्ष्यों का खाता ा अवल न या रामचन्दर न ए दावा या था जिसमें दाखिल दनां 8.8.74 था 20.03.74 आद. हुआ है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं यह आद. मात्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० रामरा व मु० बइला द्वारा था थिथ ए वाल दावा आधार पर हुआ है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं यह ए वाल दावा 4.03.74 ा हुआ बाया गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं रामरा न उस ए वाल दावा स्प: रूप स इन ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था उन्हन उस वरूद्ध उन्होने कोई अपील ायमी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा प्राथना पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० भी भी श्रीमती पीतारी अथवा दया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं साक्ष्य अवल न स स्प: है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा ववाद भूम मात्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ए वाल दावा आधार पर ही भी श्रीमती पीतारी अथवा रामचन्दर अपना बा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उन ा ब्ा ा 4 ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं साक्ष्य नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा न उन ा ब्ा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा रहा ह ऐसा साक्ष्य ही भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं ए रह स यद ए वाल दावा माना भी भी श्रीमती पीतारी अथवा ाय व अवै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवाध हस्ान्र? हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा फर भी भी श्रीमती पीतारी अथवा वह ए वाल दावा फF प्री भी श्रीमती पीतारी अथवा हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं क्यों का खाता रामरा न उस स्प: इन ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था रामचन्दर यह हम्म नहीं किया। उसे वे स्वयं हुई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं व उन हस्ाक्षर चै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवालन् र थ वह उन्ही भी श्रीमती पीतारी अथवा ा हस्ाक्षर है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं था रामरा न ए वाल दावा पर हस्ाक्षर या था। उसे वे स्वयं यह बा समY में दाखिल नहीं किया। उसे वे स्वयं आी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामरा क्य अपना पूरा ह ए वाल दावा आधार पर द अU धारा २२९ बी का आदेश फर्जी बी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा आद. फF ए वाल दावा आधार पर ए रफ न?F हुआ ह मान्य नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा अU रामचन्दर ा नाम फF इन्द्रा खारिर हगा। उसे वे स्वयं रामरा उस असल ास् ार द हों का खाताग। उसे वे स्वयं इस प्र ार इन प्रBों का खाता ा न?य ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं आद. आद. हुआ गाटा नं० 306/10 स नादन ा नाम ब् स खारिर या ाय। उसे वे स्वयं ग्राम वयपुर उ र पट्टी भी श्रीमती पीतारी अथवा खान नं० 109, 87, स मु० वहला मृ ा नाम खारिर र .Eधर द पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० मु० बहला ा नाम बौर वारिरस द या ाय़। उसे वे स्वयं खाा नं० 109 ा वभान रामरा ½ .Eधर ½ द या ाय। उसे वे स्वयं खाा नं० 280 व 111 ग्राम वयपुर दधिक्ष? पट्टी भी श्रीमती पीतारी अथवा स रामचन्दर पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० मुना ा नाम खारिर र रामरा पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० र टू ा नाम बौर असल ाश् ार द या ाय खाा नं० 111 व 280 सम्बन्ध में दाखिल .Eधर आप खारिर ाी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं गाटा नं० 264/01 व 272/06 व 281/02 व 283/02 व 413/03 आबादी भी श्रीमती पीतारी अथवा द या ाय। उसे वे स्वयं गाटा नं० 283/31 व 295/40 व 330/1-00, 331/1-01 र वा द या ाय। उसे वे स्वयं “ पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ावली भी श्रीमती पीतारी अथवा बाद अमलदरामद दाखल दफ्र ह। उसे वे स्वयं 8. The aforesaid order was challenged in three appeals filed by Shaktidhar, (Respondent no.4), Ram Chandra, (original Respondent no.5) and original petitioner, which were numbered as Appeal No.1889,1888 and 1948 respectively. 9. The Settlement Officer of Consolidation, vide order dated 11.10.1982 has dismissed the appeal filed by Ram Chandra (original respondent no.5) and original petitioner. However, allowed the Appeal No.1899 filed by Shaktidhar (respondent no.4), whereby he was declared being ½ share on Khata No.111 and 280 also along with Original Petitioner whereas claim of Original Respondent no.5 qua to said two khatas was rejected in entirety. Relevant part thereof is reproduced hereinafter: 5 “ प्रB यह है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा गदनामा हुआ उस ा क्या प्रभाव है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस सम्बन्ध में दाखिल अधी भी श्रीमती पीतारी अथवानस्थ न्यायालय में दाखिल परगना अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा महदय न यहीं किया। उसे वे स्वयं 229 व दबाव हुआ जिसमें दाखिल मूल पंी भी श्रीमती पीतारी अथवा ृ गदनामा दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं जिस ा प्रमा? पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ावली भी श्रीमती पीतारी अथवा पर ही भी श्रीमती पीतारी अथवा गदनामा हाजिसल गवाह रामचन्द स्वयं हाजिर अदाल ह र गदनामा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं और गदनामा र म स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा बयान में दाखिल आया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा जिस दन गदनामा हुआ उसी भी श्रीमती पीतारी अथवा दन गदनामा लखा गया। उसे वे स्वयं इस प्र ार गदनामा जिसद्ध उन्होने कोई अपील ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं अब प्रB यह उठा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा मु० बइला ा ववाद खाों का खाता में दाखिल ना अं. है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस सम्बन्ध में दाखिल रामरा न भूमधरी भी श्रीमती पीतारी अथवा हगी भी श्रीमती पीतारी अथवा उसन गपाल बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामा आया और उस वरूद्ध उन्होने कोई अपील उसन आया और हार गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और इस प्र ार उस बाद उसन ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं दी भी श्रीमती पीतारी अथवावानी भी श्रीमती पीतारी अथवा सी भी श्रीमती पीतारी अथवा न्यायालय में दाखिल नहीं किया। उसे वे स्वयं गया। उसे वे स्वयं इस प्र ार उa वाद उसमें दाखिल वरूद्ध उन्होने कोई अपील प्रगन्याय ा प्रभाव रखा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं अधी भी श्रीमती पीतारी अथवानस्थ न्यायालय पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ावली भी श्रीमती पीतारी अथवा पर न ल रजिस्टर फट वर मु० बइला दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं जिस अनुसार उस मृत्यु दनां 19.09.76 हना दखाया गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस प्र ार गदनामा जिसद्ध उन्होने कोई अपील ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं अU यह जिसद्ध उन्होने कोई अपील ह ान पर मु० बइला न अपनी भी श्रीमती पीतारी अथवा सारी भी श्रीमती पीतारी अथवा सम्प भी भी श्रीमती पीतारी अथवा गदनामा आया ह उस सारी भी श्रीमती पीतारी अथवा भूम पर .Eधर आमान बौर द पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० अं हना चाहए। उसे वे स्वयं यहां यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा जिसद्ध उन्होने कोई अपील है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा ग्राम वयपुर उ र पट्टी भी श्रीमती पीतारी अथवा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा भूम खाा सं० 109,87 में दाखिल मु० बइला या ½ अं. बौर भूमधर था म ½ अं. बौर भूमधर था म ½ अं. 40 अं आया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस संबंध में दाखिल यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा अवल भी भी श्रीमती पीतारी अथवा यही भी श्रीमती पीतारी अथवा ा रामरा न बइला बै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवानामें दाखिल मंसूखी भी श्रीमती पीतारी अथवा लए ए दावा सं० नं० 209 दाखल था उसमें दाखिल रामरा ा दावा खारिर हुआ और रामरा न पुनU उस अधिरिरE आया और उसी भी श्रीमती पीतारी अथवा दौरान मु० बइला मृत्यु ह गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं। उसे वे स्वयं जिसमें दाखिल .Eधर न पक्ष बनन हु दावा या और इस सम्बन्ध में दाखिल दावा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार ह र .Eधर पक्ष आया गया और वहीं किया। उसे वे स्वयं गदनामा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा बाब साक्ष्य हुआ और जिसवल गदनामा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार या था और दनां 09.01.79 बइला वधान पर .Eधर ा लाभ आनं रन ा आद. पारिर या और दनां 30.05.79 दूसर आद. गु? दर्ष की थी। तथा उसके पिता आधार पर हुआ उE आद. रामरा न ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं दावा अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल मगवा नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा नहीं किया। उसे वे स्वयं प्रस्ु या। उसे वे स्वयं फलस्वरूप उE बार रामरा ऊपर प्रय प्रभाव रहा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस प्र ार बहन व मु० बइला समस् भूम पर .Eधर ा जिस आ र या ाना उधिच है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं च० मु० न गद नामा पारिर हुए खाा सं० 109 व 87 में दाखिल .Eधर ा नाम अं या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं परन्ु खाा सं० 111, 280 में दाखिल उस ा नाम अं नहीं किया। उसे वे स्वयं आया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन खाों का खाता में दाखिल गाटों का खाता सम्बन्ध में दाखिल दावा रामचन्द्र न रामरा वरूद्ध उन्होने कोई अपील प्रस्ु या था उसमें दाखिल .Eधर न बुधिद्ध उन्होने कोई अपीलवाद प्रस्ु या स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार हुआ और बाद में दाखिल रामरा न ए वालदावा हाजिसल र दया परन्ु हां रामचन्द्र ह ा प्रB है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा इस सम्बन्ध में दाखिल रामचन्द्र अपना दावा साब रन में दाखिल असमथ रहा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा परन्ु मु० बइला भी भी श्रीमती पीतारी अथवा भूम पर .Eधर ा नाम अं या ाना उधिच है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और इस सम्बन्ध में दाखिल रामरा और रामचन्द्र द्वारा दायर आप नरस् हन यग्य नहीं किया। उसे वे स्वयं और 6 .Eधर आप खाा सं० 111, 280 में दाखिल सम्बन्ध में दाखिल स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार हन यग्य है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं उपरE ववचना आधार पर अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल सं० 1889 स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार ाी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा था उपरां 1888 व 1948 नरस् ाी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० सं० ा आद. दनां 31.03.1982 में दाखिल खाा सं० 111, 280, में दाखिल रामरा पूत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० रEू साथ ½ अं. पर .Eधर पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० मु० बइला बवा बहरन ा नाम ½ अं. पर अं या ाय। उसे वे स्वयं वाद अनुपालन पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ावली भी श्रीमती पीतारी अथवा अथिभलखागार प्रर्ष की थी। तथा उसके पिता या ाय वही भी श्रीमती पीतारी अथवा आद. अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल सं० 1188 व 1948 पर लागू हगा। उसे वे स्वयं" 10. Being aggrieved by the aforesaid order, original petitioner and Ram Chandra (original respondent no.5) filed two revision petitions before the Deputy Director of Consolidation under Section 48 of Uttar Pradesh Consolidation of Holdings Act. 11. The Deputy Director of Consolidation vide order dated 15.1.1985 dismissed the Revision Petition No.64 filed by the original petitioner, however, allowed the Revision Petition No.159 filed by Ram Chandra (original respondent no.5) in regard to Khata No.111 and 280 that basic year entries qua to said two khatas to continue. Relevant part thereof is mentioned hereinafter: " नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा द्वारा इस बा पर बहु बल दया गया मान० मBर गरखपुर अदाल में दाखिल मूल नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा पै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवारा 6 में दाखिल .Eधर प्रा ृ धि पा रामचन्दर न हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा .Eधर मु० बइला न गद नहीं किया। उसे वे स्वयं लया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस बार में दाखिल वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा वद्वान अधिधवEा न दया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा यह नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा ा युE साब नहीं किया। उसे वे स्वयं हा क्य रामचन्दर भल ही भी श्रीमती पीतारी अथवा .Eधर ा प्रा ृ धि पा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , परन्ु वह मु० बइला व रामरा ायदाद खाा सं० 111 व 280 हड़पना चाहा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं मु० बइला लावारिरस दखा र मु दमा जिना व ायदाद हड़पना चाहा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , उस रामचन्दर न यद अपनी भी श्रीमती पीतारी अथवा नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा में दाखिल .Eधर वरूद्ध उन्होने कोई अपील उस ा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा० ए मु दमा वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , ु छ बा लखा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उस ा ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं वपरी भी श्रीमती पीतारी अथवा प्रबाव नहीं किया। उसे वे स्वयं पडगा , यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा दया गया च बन्दी भी श्रीमती पीतारी अथवा दौरान मु दमें दाखिल में दाखिल .Eधर न रामचन्दर गवाह रूप में दाखिल प. भी भी श्रीमती पीतारी अथवा या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और उसन गदनामा ा हना स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इसलए नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा में दाखिल अदाल मBर यहां दाखल थी भी श्रीमती पीतारी अथवा , में दाखिल रामचन्दर द्वारा बा ही भी श्रीमती पीतारी अथवा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , उस ा इस मु दमें दाखिल पर ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं वपरी भी श्रीमती पीतारी अथवा प्रभाव नहीं किया। उसे वे स्वयं पड़गा। उसे वे स्वयं रामरा रफ स यह भी भी श्रीमती पीतारी अथवा हा गया मु० बइला ा मानजिस संुलन ठी भी श्रीमती पीतारी अथवा नहीं किया। उसे वे स्वयं था , इसलय उस द्वारा लखा गया गदनामा अमान्य र दया ाय , इस बार में दाखिल वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा ओर स दया गया यह बा बहु 7 हास्यपद लगी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा क्यों का खाता यद मु० बइला ा मानजिस संुलन ठी भी श्रीमती पीतारी अथवा न हा , दस्ाव रजिस्ट्री भी श्रीमती पीतारी अथवा समय सब रजिस्ट्रार अवश्य इस बा ा दस्ावों का खाता पर अं र द। उसे वे स्वयं .Eधर द्वारा दाखल मु दमा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा० वाद संख्या 948- ए /1 1080 ारी भी श्रीमती पीतारी अथवाख फसला 30.10.80 बाब ग्राम वयपुर उ र पट्टी भी श्रीमती पीतारी अथवा आद. न ल दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा जिसमें दाखिल भी भी श्रीमती पीतारी अथवा .Eधर मु० बइला ा द पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० माना गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं वह आद. बी भी श्रीमती पीतारी अथवा र.ुधिड टा एवं स्टापुल ा प्रभाव रखा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं उपरE साक्ष्यों का खाता एवं ववचना स यह साब ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा गदनामा मु० बइला न लखा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा वह प्रभाव भी भी श्रीमती पीतारी अथवा ह चु ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इसस गदनामा साब ह ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं वद्वान बन्दबस् अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा च बन्दी भी श्रीमती पीतारी अथवा न पूरी भी श्रीमती पीतारी अथवा छानबी भी श्रीमती पीतारी अथवान पश्चा नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल नरस् या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , जिसस मै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा सहम हूँ। उसे वे स्वयं उन आद. में दाखिल सी भी श्रीमती पीतारी अथवा हस्क्षप आवश्य ा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं हां रामचन्दर नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा प्र.न है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा, वह ग्राम वयपुर दधिक्ष? पट्टी भी श्रीमती पीतारी अथवा खाा सं० 111 व 280 बार में दाखिल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन खाों का खाता पर आधार वर्ष की थी। तथा उसके पिता अथिभलखों का खाता में दाखिल नहा रामचन्दर ा नाम अं था। उसे वे स्वयं रामरा न धारा 9 में दाखिल आप या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामचन्दर ा नाम खारिर र उस ा नाम नहा द या ाय। उसे वे स्वयं .Eधर न रामरा साथ ½ भाग पर अपना नाम बौर सहखादार अं रन आप या। उसे वे स्वयं च बंदी भी श्रीमती पीतारी अथवा अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा न रामरा आप नरस् र दया। उसे वे स्वयं अपी भी श्रीमती पीतारी अथवाल में दाखिल .Eधर न साक्ष्य दया। उसे वे स्वयं और बन्दबस् अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा न इन खाों का खाता में दाखिल रामरा साथ ½ अं. पर .Eधर ा नाम भी भी श्रीमती पीतारी अथवा अं रन ा आद. दया। उसे वे स्वयं इसी भी श्रीमती पीतारी अथवा वरूद्ध उन्होने कोई अपील रामचन्दर न यह नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उE दन खाों का खाता पर उन ा नहा नाम आधार वर्ष की थी। तथा उसके पिता भांधि द हना चाहए क्य इस खाों का खाता लख खादार मु० बइला एवं रामरा न उस ह में दाखिल च बन्दी भी श्रीमती पीतारी अथवा पूव चल वादों का खाता में दाखिल ए वाल दावन र दया था। उसे वे स्वयं और उस आधार पर आद. भी भी श्रीमती पीतारी अथवा पारिर ह चु ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं रामचन्दर न न ल अF दावा वाद सं० 1834 अऩ्ग धारा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा० खाा सं० 111 आराजिया बार में दाखिल था न ल अFदावा वाद सं० 2194 अन्ग धारा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा० खाा सं० 280 आराजिया बार में दाखिल दाखल या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन मु दमों का खाता में दाखिल ए वालदावा क्रम.U दनां 24.07.74 व 04.03.74 द्वारा रामरा व मु० बइला न रामचन्दर स्वत्व ा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं ै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवासा उन ए वालदावों का खाता प्रस्ु प्रधिलपयों का खाता अवल न स स्प: हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन ए वाल दावों का खाता आधार पर क्रम.U दनां 08.08.74 व 20.03.74 ा आद. भी भी श्रीमती पीतारी अथवा पारिर ह चु ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और उन आद.ों का खाता वरूद्ध उन्होने कोई अपील रामरा द्वारा दनां 04.06.74 ायमी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इन आद.ों का खाता वरूद्ध उन्होने कोई अपील रामरा द्वारा दनां 04.06.74 ायमी भी श्रीमती पीतारी अथवा दाखल गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं थी भी श्रीमती पीतारी अथवा न ल आद. दनां 25.07.74 स स्प: हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामरा वह ायमी भी श्रीमती पीतारी अथवा भी भी श्रीमती पीतारी अथवा खारिर र दी भी श्रीमती पीतारी अथवा गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस प्र ार खाा सं० 111 व 280 संबंध में दाखिल रामचन्दर धिडग्री भी श्रीमती पीतारी अथवा सक्षम न्यायालय द्वारा धारा 229 बी भी श्रीमती पीतारी अथवा० मु दमें दाखिल में दाखिल पारिर हुई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , वह अ&ऩ्म है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और र.ुधिड टा ा प्रभाव रखी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और दन ए वालदाव स्टापुल ा प्रभाव रख है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं बन्दबस् अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा च बन्दी भी श्रीमती पीतारी अथवा व च बन्दी भी श्रीमती पीतारी अथवा अधिध ारी भी श्रीमती पीतारी अथवा न मात्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ब् आधार पर वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा ह व हस्सा दया ल न अवर न्यायालयों का खाता न इस बा पर वचार नहीं किया। उसे वे स्वयं या ब इन खाों का खाता आराजिया संबंध में दाखिल उभयपक्षों का खाता न सक्षम न्यायालय में दाखिल दाखल धारा 229 मु दमें दाखिल में दाखिल ए वालदावा र लया , 8 न परिर&स्थधियों का खाता में दाखिल अपनी भी श्रीमती पीतारी अथवा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ारE स अब अपन अलग र रह है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इस ा ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं संर्ष की थी। तथा उसके पितान स्प: ववर? वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा द्वारा नहीं किया। उसे वे स्वयं या गया क्य मान० सवmn द्वारा यह अं रूप स माना गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा एडम.न इन द बस्ट एवडन्स। उसे वे स्वयं यद ई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं पक्ष अपनी भी श्रीमती पीतारी अथवा स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ारE स वचल हा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उस साब रन ा भार उसी भी श्रीमती पीतारी अथवा पर है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं रामरा न ए वालदावा दाखल र ब ए बार रामचन्दर स्वत्व स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार र लया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , साक्ष्य अधिधनयम धारा 101 अनुसार उस साब रना चाहए था उसन ए वाल दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं या था। उसे वे स्वयं नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा ा वद्वान अधिधवEा न दया ए० आई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं० आर० 1980 पृष्ठ 1286 पर दी भी श्रीमती पीतारी अथवा गई दावा नहीं किया। उसे वे स्वयं व्यवस्था अनुसार व्यE अपन ए वादी भी श्रीमती पीतारी अथवा स इन् ार रा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उस गल साब रन ा भार उसी भी श्रीमती पीतारी अथवा पर है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा , ल न रामरा न इस व्य ा नवहन नहीं किया। उसे वे स्वयं या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं इसलए उसन ए वाल दावा या है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा वह सही भी श्रीमती पीतारी अथवा माना ायगा। उसे वे स्वयं सक्षम न्यायालय द्वारा ए वालदाव आधार पर आद. भी भी श्रीमती पीतारी अथवा पारिर ह चु ा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और मु दमा रामचन्दर ह में दाखिल धिडक्री भी श्रीमती पीतारी अथवा ह गया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं अब मात्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० रामरा द्वारा उस ा मौख रूप स इन् ार र दन स उस ानूनी भी श्रीमती पीतारी अथवा महत्व समाT नहीं किया। उसे वे स्वयं माना ायगा। उसे वे स्वयं अधी भी श्रीमती पीतारी अथवानस्थ न्यायालयों का खाता न ागी भी श्रीमती पीतारी अथवा साक्ष्यों का खाता ऊपर अपन अपन म व्यE य है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा वह नयमानुसार मान्य नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और मै कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा उन म स सहम नहीं किया। उसे वे स्वयं हूँ क्य वपक्षी भी श्रीमती पीतारी अथवा रामरा एवं मु० बइला न सक्षम न्यायालय में दाखिल यह ए वाल र लया है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा खाा सं० 111 व 280 पर रामचन्दर ा नाम द या ाय। उसे वे स्वयं उपरE ववचना आधार पर अवर न्यायालयों का खाता आद. खाा सं० 111 व 280 संबंध में दाखिल ायम रखन यग्य नहीं किया। उसे वे स्वयं है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा। उसे वे स्वयं उपरE ववचना आधार पर नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा सं० 64 रामरा बनाम .Eधर नरस् ाी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और नगरानी भी श्रीमती पीतारी अथवा सं० 159 रामचन्दर बनाम राम रा आद स्वी भी श्रीमती पीतारी अथवा ार ाी भी श्रीमती पीतारी अथवा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा और खाा सं० 111 व 280 बार में दाखिल पारिर अवर न्यायालयों का खाता आद. नरस् र आद. दया ाा है कभी भी श्रीमती पीतारी अथवा इन खाों का खाता पर आधार वर्ष की थी। तथा उसके पिता भांधि रामचन्दर पुत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० मुना ा नाम अं या ाव। उसे वे स्वयं “ पत्र श्याम सुन्दर को गाटा नं० ावली भी श्रीमती पीतारी अथवा वाद अमल दरामद दाखल दफ्र ाव। उसे वे स्वयं 12. Aforesaid order is challenged at the behest of original petitioner. 13. Learned counsel for legal heir of original petitioner submitted that the Revisional Authority has committed an error in placing reliance on a decree of a Civil Court in Suit No.201 of 1971 filed by the petitioner against Mst. Behla for cancellation of a sale deed dated 25.1.1971 executed by Mst. Behla as it would not create any right of Mst. Behla. In fact, said suit was decreed by Trial Court in 9 favour of the petitioner and there was no question that it was challenged at the behest of the petitioner by way of filing an appeal. 14. Learned counsel further submitted that adoption of Respondent No.4 was not legally proved since deed was registered after many years and necessary requirement for adoption was also not followed. No consent was provided by matter of Respondent No.4 and Ram Chandra (original respondent no. 4) natural father of respondent no. 1 has created adoption deed to take over property of Mst. Behla. 15. Learned counsel submitted that direction for maintaining entries of basic year in favour of Ram Chandra, (Original respondent no.5) so far as Khata Nos. 111 and 280 is concerned on basis of orders passed in two Suits under Section 229 of Uttar Pradesh Zamindari Abolition and Land Reforms Act, 1950 (hereinafter referred to as the “Act of 1950”) (filed by Original Petitioner No.5 against Original Petitioner) was also a wrong since compromise decree was never executed and as well original petitioner has denied any Ekbalnama, therefore, principles of res- judicata was also wrongly applied. 16. Per contra, Ld. Counsel for Respondent submitted that adoption deed was brought on record in earlier litigation took place between the parties before Consolidation proceedings commenced wherein by evidences adoption was proved. Effect of adoption was carried out and it could not be doubted now during Consolidation proceedings. 17. The suits filed by Original Respondent No. 5 under Section 229-B were decreed in favour of plaintiff (Original Respondent 10 No.5) on basis of compromise (Ekbalnama) duly signed by Original Petitioner accepting plaintiff’s claim and a restoration application filed by Original Petitioner was dismissed. Any oral submissions contrary to record may not be accepted. 18. Heard learned counsel for the parties and perused the records. 19. First issue is whether Shaktidhar (respondent no.4) is an adopted son of Mst. Behla, widow of Bahoran. 20. There are concurrent findings of all Consolidation Courts that respondent no.4 was duly adopted by Mst. Behla and adoption deed was registered on same day. The Consolidation Officer has returned a finding that adoption deed was earlier placed in a suit filed under Section 229-B of U.P.Z.A.& L.R.Act, wherein adoption was duly proved on basis of evidence and statements. Consolidation Officer has also considered material on record that adoption was legally valid and already proved. 21. The Settlement Officer of Consolidation has upheld the finding returned in regard to adoption deed that it was earlier proved also, therefore, any challenge to it during consolidation proceedings is hit by principles of resjudicata. Similarly, Deputy Director of Consolidation has affirmed the said finding. 22. The legal heirs of original petitioner have not shown any perversity in regard to concurrent finding that respondent no.4 was duly adopted by Mst. Behla, certified copy of relevant orders were placed on record before Consolidation proceedings and since it is well settled that averment and findings could not be disturbed except being perverse, which is not in case in hand, therefore, all arguments against it are rejected, therefore, respondent no.4’s 11 being adopted son of Mst. Behla, his ½ share as upheld by all three authorities in regard to Khata No.109 and 89 could not be disturbed. 23. Now the other issue is in regard to original petitioner’s objection in respect of Khata No.111 and 280 which were recorded in basic year in the name of Ram Chandra (Original Respondent No.5). The Consolidation Officer has accepted objection of Original Petitioner and rejected any effect of written statement filed by original respondents in two suits filed under the “Act of 1950” (Suit Nos.2194 of 74 and 2034 of 74) filed by Ram Chandra (original Respondent no.4) against the Original Petitioner (name of Mst. Behla was later on struck off), wherein original petitioner (defendant) has filed a written statement accepting claim of said Ram Chandra, the plaintiff (Original Respondent no.4) and the suits were accordingly decreed accepting his claim as well as restoration application filed by the petitioner was rejected. 24. The Consolidation Officer has held that since original petitioner herein has specifically denied about any such written statement accepting the claim of the plaintiff as well as there was no reason with the original petitioner to file such written statement, accordingly claim of original petitioner was accepted that he shall be recorded as sole owner on said two gatas. The finding being vague is unsustainable in law. Original petitioner was estopped to question his own Ekbalnama and written statement. 25. The Settlement Officer of Consolidation in the appeal filed by Shaktidhar (respondent no.4) has accepted to extent of half share alongwith half share of original petitioner and held that the suit filed by Ramraj was rejected. So far as Suit No.2194/74 and 12 2834/74 are concerned same were not discussed in detail and it appears that Appellate Authority has ignored the outcome of said suits wherein original petitioner (Ramraj) has accepted claim of original respondent no. 5. Therefore, error committed by the Consolidation Officer was perpetuated. 26. Aforesaid error was cured by the Deputy Director of Consolidation and the revision petition filed by Ram Chander (Original respondent no.5) qua to Khata No.111 and 280 was allowed and reliance was rightly placed on the decree passed in Suit No.2194 of 74 and 2834/74, wherein original petitioner has accepted the claim of original respondent no.5 in its entirety and rejected the claim of original petitioner as well as of respondent no.4 on Gata No.111 and 280 and vide order dated 15.1.1985 held that claim of original respondent no.5 shall be recorded as a sole owner of Gata No.111 and 280. 27. The Revisional Authority has a power under Section 48 of U.P.C.H Act, that if the lower authorities have committed an error which is perverse in nature, same could be cured. 28. The decree passed in aforesaid two original suits were based on a written statement filed by original petitioner, wherein he has accepted the claim of the plaintiff i.e. respondent no.5. Said documents are annexed along with counter affidavit filed by the original respondent no.5 and as rightly held by the Revisional Court that it will act as resjudicata to the claim of original petitioner on the said gatas, therefore, there is no ground to interfere with said finding Principle of estoppel also arises in present case since an admission of a right of original Respondent no. 5 by original petitioner shall be dealt with similarly as was done in previous 13 proceedings and any contrary argument could not be accepted being hit by porinciple of estoppel. (See Bhanu Kumar Jain Vs. Archana Kumar and Anr., (2005)1 SCC 787). 29. The Revisional Authority has also rightly held that any objection to the written statements filed at behest of original petitioner on vague ground could not be accepted and it was rightly rejected, since said issued has attained finality and cannot be reopened in consolidation proceedings, therefore, aforesaid decree would act as resjudicata to the claim of original petitioner, therefore, there is no ground to interfere with the said finding returned by the Revisional Authority. The petitioner has not able to show any circumstances to interfere with the well reasoned impugned order, therefore, present writ petition is dismissed. Interim order, if any, stands vacated. Order Date :- 8 5.2025 SB Digitally signed by :- SANDEEP BHATTACHARYA High Court of Judicature at Allahabad