Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 73879 (ALL)

BALVEER SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/24632/2025 · 2025-08-07

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:134786 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 24632 of 2025 Applicant :- Balveer Singh Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Avadh Raj Sharma Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक बलवलीर धसवंह ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 0246/2025, अवंतररत धिद्वारद्वा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा धसववल लद्वाईन्स, धजलद्वा अललीरढ़ मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा वकसली प्रकद्वार कवे कझू टरवचित दस्तद्वाववेज कद्वा प्रयकोर नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , न हली वकसली प्रकद्वार ककी धिकोखद्वाधिडली ककी रयली हहै। आववेदक प्रहैणकटधसवंर अधधिकद्वा नहहीं हहै , न हली उसकवे दद्वारद्वा वकसली प्रहैणकटधसवंर वककील अथद्वारत बलवलीर धसवंह कको प्रवतरूवपत वकयद्वा हहै। आववेदक वककील नहहीं हहै, वरनन् मसुवंशली कवे रूप मम अधधिवकद्वाओवं कवे सद्वाथ पझूवर मम कद्वायर कर चिसुकद्वा हहै। तलद्वाशली कवे ददौरद्वान बरद्वामदरली सवे पतद्वा चिलतद्वा हहै वक आववेदक अधधिवकद्वा असलम कवे यहद्वाहाँ कद्वायर करतद्वा थद्वा एवववं आववेदक कवे पद्वास सवे दको ववधजवटवंर कद्वाण्डिर बरद्वामद हहए, धजनमम बलवलीर धसवंह कद्वा नद्वाम हहै, परन्तसु कवे वल बलवलीर धसवंह कवे नद्वाम वद्वालवे दको ववधजवटवंर कद्वाण्डिर ककी बरद्वामदरली कवे आधिद्वार पर , आववेदक कको वतरमद्वान मद्वामलवे मम फवं सद्वायद्वा जद्वा रहद्वा हहै, कययोंवक उसकद्वा नद्वाम बलवलीर धसवंह हहै, जबवक उक ववधजवटवंर कद्वाण्डिर वद्वास्तववक बलवलीर धसवंह अधधिवकद्वा कवे थवे, आववेदक कवे नहहीं। यह उलवेख करनद्वा भली प्रद्वासवंवरक हहै वक वकसली भली वद्वादली दद्वारद्वा यह आरकोप लरद्वातवे हहए एक भली वशकद्वायत नहहीं ककी रई हहै वक आववेदक उसकद्वा वककील हहै। ददौरद्वान ववववेचिनद्वा ववववेचिक दद्वारद्वा वद्वादली मसुकदमद्वा कवे बयद्वान एववं अन्य तथ्ययों ककी जद्वाहाँचि कवे बद्वाद अपनली आख्यद्वा प्रस्तसुत ककी हहै, जकोवक सली.ण्डिली. सवं० 2 कद्वा वहस्सद्वा हहै, धजसमम यह कथन वकयद्वा रयद्वा हहै, आववेदक कवे पद्वास सवे अथवद्वा उसकवे कधथत कद्वायद्वारलय सवे ऐसद्वा ककोई भली दस्तद्वाववेज प्रद्वाप्त नहहीं हहआ हहै , धजससवे यह प्रतलीत हकोतद्वा हको वक आववेदक दद्वारद्वा फजर्जीवद्वाडद्वा वकयद्वा रयद्वा हहै। उक सवे भली यह स्पष्ट हहै वक आववेदक कवे ववरुद्ध कधथत आरकोवपत धिद्वारद्वाओवं कद्वा अपरद्वाधि बनतद्वा पररलवक्षित नहहीं हको रहद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पझूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको पझूवर मम दद्वाधखल पझूरक शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 5 मम स्पष्ट वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्षि खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 17.05.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीक्षिर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षिययों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षिर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 8.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad