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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26109 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0369/2024, अंतगर्त धारा 318, 338, 336, 341, 61(2) बी.एन.एस., थाना फतेहगढ़़़़ कोतवाली, िजला फतेहगढ़़़़ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज प्रित शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय।
4.
आवेदक पर आक्षेप है िक उसके द्वारा अपनी सही जन्मितिथ िछपाकर दूसरी जन्मितिथ अंिकत करवा कर नौकरी प्राप्त कर ली, िजसके संबंध में आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा अपनी जन्मितिथ िछपाकर िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना/फजीर्वाड़ा कािरत नहीं िकया गया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक ने जािमयां उदूर् अलीगढ़़़़ संस्था से वषर् 1991 में अदीव (हाईस्कू ल), वषर् 1994 में अदीब मािहर, वषर् 1995 में अदीव ए कािमल (बी.ए .) व 1996 में मो०उिल्लम एक उदूर् िविधवत उत्तीणर् की िजसमें उसकी जन्मितिथ 04.09.1977 अंिकत है, इन्हीं शैिक्षक प्रमाणपत्र के आधार पर उदूर् िशक्षक के िलए आवेदन िकया था, पात्रता के आधार पर ही उसकी िनयुिक्त वषर् 2016 में की गयी। आवेदक के शैिक्षक प्रमाणपत्रों को िकसी भी सक्षम प्रािधकारी द्वारा कभी चुनौती नहीं दी गई और 2016 में उनकी िनयुिक्त का एकमात्र आधार यही बनी, जो िवभाग द्वारा उिचत जाँच और सत्यापन के बाद हुई थी। यूपी बोडर् प्रमाणपत्र के संबंध में, आवेदक द्वारा स्पष्ट रूप से कथन िकया गया है िक Versus Counsel for Applicant(s) : Hira Lal Yadav, Saurabh Kumar Yadav, Sunil Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Mushir Khan Tausif Khan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) जन्मितिथ में िवसंगित पूणर्तः िलिपकीय त्रुिट थी और िबना िकसी दुभार्वना के की गई थी। उक्त योग्यताएँ के वल बेिसक िशक्षा िवभाग में उदूर् िशक्षक के पद पर िनयुिक्त के िलए ही योग्य हैं, अन्य िकसी सेवा के िलए नहीं। हालाँिक, भिवष्य की नौकिरयों के िलए पात्रता प्राप्त करने हेतु, आवेदक ने क्रमशः 1998 और 2000 में िनयिमत छात्र के रूप में यूपी बोडर् के माध्यम से हाईस्कू ल और इंटरमीिडएट की परीक्षाएँ दी थीं। िलिपकीय त्रुिट के कारण, उसकी जन्मितिथ गलत तरीके से 15.02.1982 दजर् हो गई थी, िजसको आवेदक द्वारा बाद में सही करा िलया गया। आवेदक द्वारा कभी भी यूपी बोडर् प्रमाणपत्रों में अंिकत गलत जन्मितिथ का दुरुपयोग या लाभ नहीं उठाया है और न ही उसका कोई कपटपूणर्/फजीर् तरीके से उपयोग िकया है। वषर् 2017 में सूचनातार् ने आवेदक के प्रमाणपत्रों के संबंध में िजला बेिसक िशक्षा अिधकारी के समक्ष एक िशकायत दजर् कराई थी, उक्त प्रमाणपत्र सत्यापन के बाद वैध और वास्तिवक पाए गए। अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा के स डायरी
के पचार् सं० 13, िजसमें जािमया उदूर् अलीगढ़़़़ में िडप्टी रिजस्ट्रार के पद पर तैनात रघुराज िसह के बयान की तरफ न्यायालय का ध्यान आकृ ष्ट कराया, जो िनम्नवत् है- “मैं जािमया उदूर् अलीगढ़़़़ में िडप्टी रिजस्टार के पद पर िनयुक्त हूँ। तौसीफ खां (आवेदक) द्वारा वषर् 1991 में प्रथमवार अदीब में कमालगंज सेन्टर पर प्रवेश िलया था उसके बाद लगातार, अदीब मािहर, अदीब कािमल, मोअिल्लमएउदूर् में प्रवेश पाकर परीक्षा दी है। तौसीफ की ितिथ 04.09.1977 है जन्म ितिथ के सम्बंध में इनका अदीब का फामर् नहीं िमलने के कारण अदीब मािहर के फामर् की प्रमािणत प्रित व इनरोलमेन्ट रिजस्टर की प्रमािणत प्रित संलग्न है। तौसीफ का नाम व जन्म ितिथ 04.09.1977 तथा िपता का नाम अब्दुल रशीद खान इनरोलमेन्ट में रिजस्टर के क्रमांक नं. 25 पर अंिकत है।” उक्त बयान से भी स्पष्ट है िक आवदेक द्वारा िकसी प्रकार की कू टरचना कािरत नहीं की गयी है तथा उसकी वास्तिवक जन्मितिथ 04.09.1977 ही है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6.
उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। BAIL No. 26109 of 2025 2
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 17, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 26109 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad