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2025:CGHC:44672 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्णया सरति ति क-27/06/2025 तिर्णया उद्घो*ति+ ति क-02/09/2025 ण्डि./क अपु ल क्रमां क
-253
/2025
1. तिल पु थापु तिपु-रजू5 थापु, उम्र-लगभग 29 वे+, तिवेस -ए.स .स . च:क, रू भट्टी
क समां, जूमांल, पुलिलस था-जूमांल, ग, लिजूल-ग, छत्ती सगढ़
2. शुभमां सहू@ तिपु-श्री रमां सहू@, उम्र-लगभग 22 वे+, तिवेस -ए.स .स . च:क, रू भट्टी
क समां, जूमांल, पुलिलस था-जूमांल, ग, लिजूल-ग, छत्ती सगढ़ -----अपु लथाBगर्ण/अतिभयाक्तगर्ण तिवेरूद्घो छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-जूमांल, ग, लिजूल-ग, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या अपु लथाBगर्ण/अतिभयाक्तगर्ण द्वार : श्री शु*तिभ क*ष्टा, अलिHवेक्त । रज्या/उत्तीरवे द्वार : श्री जू ०एल० उईक , पुLल अलिHवेक्त । मां या न्यायामां5ति श्री स जूया क मांर जूयासवेल
, न्यायाH शु
!! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. भर या गरिरक सर स तिहू, 2023 कO Hर-415 (2) क हू प्रस् इस ण्डि./क अपु ल मांV तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाH शु/चथा फास्ट टZक तिवेशु+ न्यायालया, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.09.02 16:37:00 +0530
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A. No.-253 of 2025} ग, लिजूल-ग, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशु+ आपुरलिHक (पु\क्स*) प्रकरर्ण क्रमां क-07/2020
“छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो तिल पु थापु वे अन्या एक” मांV पुरिर तिर्णया ति क- 08/10/2024 क* च:
गई हूL । लिजूसक हू अपु लथाBगर्ण क* तिम्सर *+लिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया हूL । लिजूस आग स पु मांV “प्रश्H तिर्णया” स स *लिH तिकया जू रहू हूLd- अपु लथाB क मां *+लिसतिद्ध ./शु तिल पु थापु Hर-377 भर या ./ स तिहू, 1860 10 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 100/- रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिशु अ कर कO शु मांV 01 मांहू क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कO सजू स ण्डि./ तिकया गया । तिल पु थापु एवे शुभमां सहू@ Hर-120(ख)/377 भर या ./ स तिहू, 1860 10 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 100/- रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिशु अ कर कO शु मांV 01 मांहू क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कO सजू स ण्डि./ तिकया गया । Hर-506 (भग-*) भर या ./ स तिहू, 1860 01 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 100/- रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिशु अ कर कO शु मांV 01 मांहू क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कO सजू स ण्डि./ तिकया गया । Hर-06 लfतिगक अपुरHg स लकg क स रर्ण अलिHतियामां, 2012 10 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 5,000/- रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिशु अ कर कO शु मांV 01 मांहू क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कO सजू स ण्डि./ तिकया गया । सभ मां5ल सजूए सथा-सथा चलVग ।
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2. अतिभया*जू मांमांल, स पु मांV, इस प्रकर हूL तिक पु तिh (अ०स०-1) कलिथा घट क समांया लगभग 15 वे+ क लक था, लिजूसकO मां (अ०स०-2) और तिपु (अ०स०- 3) हूf । वे+-2017 मांV उसक सथा अपु लथाB शुभमां सहू@ क भई स जूया सहू@ द्वार अप्रकk तिक लfतिगक कk त्या तिकया गया था, लिजूसकO रिरपु*ट पुर स जूया सहू@ क तिवेरुद्ध ण्डि./क कयावेहू हूnई और वेहू जूल मांV रहू । तिवेचरर्ण या घट ति क-03/08/2019 कO हूL । अतिभया*जू क असर अपु लथाBगर्ण द्वार पु तिh पुर स जूया सहू@ क तिवेरुद्ध जू आपुरलिHक मांमांल वेपुस ल क वे या जू रहू और मां कर पुर पु तिh था उसक तिपु क* जू स मांर कO HमांकO जू रहू । घट ति क-03/08/2019 क* जू पु तिh क मां-तिपु वेघर शु कर झारख / गए हूnए था और पु तिh अपु भई-हूg क सथा घर पुर था । उस ति उसक भई ड्यू5ट पुर चल गया और हू तिवेद्यलया चल गई, लिजूसस वेहू घर पुर अक ल रहू गया । उस समांया अपु लथाB तिल पु थापु या मांक तिख क हू उस .क . क पु क पु छ ण्डिस्था तिकरए क मांक मांV ल गया, जूहू अपु लथाB शुभमां सहू@ पुहूल स मां:जू5 था । *g रवेज़ा कर चक5 तिख हूnए पु तिh क* /रया-Hमांकया, पुहूल उसस हूस्मांLथा करया और त्पुश्चr अपु लथाB तिल पु थापु पुल ग पुर लिलटकर उसक सथा अप्रकk तिक ष्कमां तिकया, लिजूसक वे ति/या* अपु लथाB शुभमां सहू@ मां*इल फा* स Lयार तिकया । भयावेशु पु तिh घट क त्कल तिकस स उल्लेख हूu तिकया, तिक जू उक्त वे ति/या* वेयारल हू*कर उसक चचर भई रजूक मांर (अपुरिरति) क मां*इल पुर पुहूnvच और रजूक मांर उस पु तिh क मां-तिपु क* तिखया, तिपु (अ०स०-3) द्वार पु5छछ कर पुर पु तिh स पु5र्ण घट ई । इस पुर प्रशु पु -9 कO लिललिख तिशुकया था जूमांल, ग मांV प्रस् कO गई, लिजूस पुर ति क-14/11/2019 क* प्रथामां स5च रिरपु*ट (प्रशु पु -10) जू कO
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A. No.-253 of 2025} गई । प्रकरर्ण मांV पु तिh था अपु लथाBगर्ण क तिचतिकत्स या पुर र्ण करया गया, मां:क क्शु Lयार तिकया गया, सतियाg क या लिलए गए, पु तिh क अ वेस्त्र जूब् कर रसयातिक पुर र्ण हू भजू गए था अपु लथाBगर्ण एवे रजूक मांर क मां*इल जूब् कर वेयारल वे ति/या* क पु चमां Lयार तिकया गया और उस पु/Zइवे मांV लकर पुर र्ण करया गया । स पु5र्ण तिवेवेच उपुर अपु लथाBगर्ण कO तिगरफ्र कO गई था अतिभया*ग-पुत्र न्यायालया क समां प्रस् तिकया गया ।
3. अतिभया*जू कO ओर स अपु पु समांथा मांV 10 सतियाg क पुर र्ण था 55 स्वेजू प्रशु तिचन्हू तिक करवेया गया । Hर-313 ./ प्रतिक्रया स तिहू क हू या मांV अपु लथाBगर्ण अपु तिवेपुर सतियाg क कथाg क* इकर कर हूnए कहू हूL तिक वे ति{+ हूf और उन्हूV झा5ठा फा सया गया हूL । लिजून्हूg चवे मांV क*ई सक्ष्या प्रस् हूu तिकया । उभयापु क स जूकर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लथाBगर्ण क* इस तिर्णया कO कण्डि./क-1 क असर *+लिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया । लिजूस इस अपु ल मांV च:
गई हूL ।
4. अपु लथाB पु क तिवेद्वा अलिHवेक्त क क हूL तिक घट कO रिरपु*ट कर 03 मांहू क तिवेलम् स जू करई गई हूL लिजूसक क*ई समांHप्र स्पुष्टा करर्ण हूu तिया गया हूL । तिचतिकत्स या सक्ष्या क असर पु तिh क या कO पुतिष्टा हूu हूnई हूL । रसयातिक पुर र्ण रिरपु*ट स भ पु तिh क या कO पुतिष्टा हूu हूnई हूL । स्वेया तिवेवेचक याहू स्वे कर तिकया हूL तिक अपु लथाBगर्ण और रजूक मांर स जू* मां*ईल फा* जूब् तिकया गया हूL उसमांV कलिथा वे ति/या* हूu पुया गया हूL । पु तिh क न्यायालया या स, प्रथामां स5च पुत्र, Hर-161 ./ प्रतिक्रया स तिहू क हू पुलिलस द्वार जू उसक कथा और Hर-164 ./ प्रतिक्रया स तिहू क हू जू कथा मांV पुरस्पुर ग भ र तिवेर*Hभस एवे ल*पु कO ण्डिस्थाति हूL ।
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A. No.-253 of 2025} तिवेचरर्ण या प्रकk ति क मांमांल मांV पु तिh क* स हू स पुर तिवेश्वेस या हू* चतिहूए तिक वेहू स हू स पुर तिवेश्वेस या स हूu पुया गया हूL । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार सक्ष्या कO उतिच रूपु स समां कर हूnए अपु लथाBगर्ण क* त्रतिटपु5वेक *+लिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया हूL । अपु लथाBगर्ण कO *+लिसतिद्ध स हू स पुर स्पुष्टा, पुयाप्त और तिवेश्वेस या सक्ष्या पुर आHरिर हूu हूL । “प्रश्H तिर्णया” ण्डिस्थार रख जू या*ग्या हूu हूL । अd अपु ल स्वे कर कर उन्हूV *+मांक्त तिकया जूए । तिवेद्वा अलिHवेक्त द्वार अपु क क समांथा मांV न्यायादृष्टा Santosh Prasad @ Santosh Kumar v. State of Bihar, (2020) 3 SCC 443 क हूवेल तिया गया हूL ।
5. उत्तीरवे /रज्या पु कO ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वा अलिHवेक्त इस अपु ल क तिवेर*H कर हूnए क तिकया हूL तिक अतिभया*जू सतियाg पु5र्ण रूपु स अतिभया*जू मांमांल क समांथा तिकया हूL लिजूपुर अतिवेश्वेस तिकया जू क क*ई करर्ण हूu हूL । तिवेचरर्ण न्यायालया क
“प्रश्H तिर्णया” सक्ष्या कO उतिच समां पुर आHरिर हूL । अतिभया*जू अपु लथाBगर्ण क तिवेरूद्घो अपु मांमांल स हू स पुर प्रमांतिर्ण तिकया हूL । अपु लथाB पु द्वार अपु ल मांV उठाया गया क स्वे कर या*ग्या हूu हूL । अd अपु ल खरिरजू तिकया जूया ।
6. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलख क स5क्ष्मांपु5वेक पुरिरशु ल तिकया गया ।
7. तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु तिर्णया कO कण्डि./क-25 मांV याहू पुया गया हूL तिक कलिथा घट क समांया पु तिh कO उम्र 18 वे+ स कमां था लिजूस अपु लथाB पु द्वार क*ई च:
हूu गई हूL । इस प्रकर याहू थ्या स्थातिपु रहू हूL तिक कलिथा घट क समांया पु तिh (अ०स०-1) 18 वे+ स कमां उम्र क लक रहू हूL ।
8. न्यायादृष्टा Santosh Prasad @ Santosh Kumar (Supra) मांV मां या उच्चमां न्यायालया द्वार अवेHरिर तिकया गया हूL तिक लत्कर क अपुरH मांV एकमांत्र पु तिh क
6 / 11 {Cr. A. No.-253 of 2025} कथा पुर भ *+लिसतिद्ध कO जू सक हूL तिकन् याहू हू* चतिहूए जू पु तिh क या तिवेश्वेस पुL करV था पु5र रहू स तिवेश्वेस या, ग और उत्कk ष्टा गर्णवेत्ती क प्र हू* । लिजूसक स H मांV कण्डि./क-5.4.3, 5.5 एवे 6 मांV तिम्सर अवेHरिर तिकया गया हूL:-
“5.4.3.
In Krishan Kumar Malik v. State of Haryana (2011) 7 SCC 130 it is observed and held by this Court that no doubt, it is true that to hold an accused guilty for commission of an offence of rape, the solitary evidence of the prosecutrix is sufficient provided the same inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and should be of sterling quality. 5.5 With the aforesaid decisions in mind, it is required to be considered, whether is it safe to convict the accused solely on the solitary evidence of the prosecutrix? Whether the evidence of the prosecutrix inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and is of sterling quality?”
6. Having gone through and considered the deposition of the prosecutrix, we find that there are material contradictions. Not only there are material contradictions, but even the manner in which the alleged incident has taken place as per the version of the prosecutrix is not believable. In the examination-in-chief, the prosecutrix has stated that after jumping the fallen compound wall accused came inside and thereafter the accused committed rape. She has stated that she identified the accused from the light of the mobile. However, no mobile is recovered. Even nothing is on record that there was a broken compound wall. She has further stated that in the morning at 10 O’clock she went to the police station and gave oral complaint. However, according to the investigating officer a written complaint was given. It is also required to be noted that even the FIR is registered at 4:00 p.m. In her deposition, the prosecutrix has referred to the name of Shanti Devi, PW1 and others. However, Shanti Devi has not supported the case of the prosecution. Therefore, when we tested the version of PW5-prosecutrix, it is unfortunate that the said witness has failed to pass any of the tests of “sterling witness”. There is a variation in her version about giving the complaint. There is a delay in the FIR. The medical report does not support the case of the prosecution.
FSL report also does not support the case of the prosecution. As admitted, there was an enmity/dispute between both the parties with respect to land. The manner in which the occurrence is stated to have occurred is not believable. Therefore, in the facts and circumstances of the case, we find that the solitary version of the prosecutrix- PW5 cannot be taken as a gospel truth at face value and in
7 / 11 {Cr. A. No.-253 of 2025} the absence of any other supporting evidence, there is no scope to sustain the conviction and sentence imposed on the appellant and accused is to be given the benefit of doubt.”
9. उपुर*क्त न्यायादृष्टा था अतिभलख क पुरिरशु ल स याहू ण्डिस्थाति स्पुष्टा हूL तिक घट ति क- 03/08/2019 कO हू* या गया हूL, तिक उसकO रिरपु*ट तिवेलम् स ति क- 14/11/2019 क* जू करई गई हूL । इस लगभग 03 मांहू 10 ति क तिवेलम् क स्पुष्टा करर्ण याहू या गया हूL तिक पु तिh (अ०स०-1) /र हूnआ था और उसक मां- तिपु वेघर शु क लिलए झारख / गए हूnए था । पुश्च मांV जू उक्त वे ति/या* वेयारल हूnआ और इसकO जूकर हूnई, पुलिलस मांV तिशुकया कO गई ।
10.
तिपु (अ०स०-3) क कथासर उन्हूV वेयारल वे ति/या* कO जूकर उक भ जू रजूक मांर स प्रप्त हूnई था , तिक अतिभया*जू कO ओर स रजूक मांर क पुर र्ण हूu करया गया हूL । तिपु कO रिरपु*ट (प्रशु पु -6) स याहू स्पुष्टा हूL तिक प्रथामां स5च पुत्र लगभग 03 मांहू 10 ति क तिवेल स जू करई गई, जूतिक मां क कथासर उन्हूg रिरपु*ट घट क लगभग 02-03 सप्तहू पुश्च हू जू करई था । अतिभया*जू द्वार रजूक मांर क पुर र्ण हूu करए जू क करर्ण घट कO जूकर क मां5ल स्रो* स हूस्पु प्र
हू* हूL । ऐस पुरिरण्डिस्थाति मांV, याहू न्यायालया पु हूL तिक लगभग 03 मांहू 10 ति क तिवेल स जू प्रथामां स5च रिरपु*ट क स H मांV प्रस् तिकया गया स्पुष्टा करर्ण समांHप्र हूu हूL ।
11. पु तिh (अ०स०-1) एवे उसक तिपु (अ०स०-3) क या था लिललिख रिरपु*ट (प्रशु पु -6) स याहू थ्या स्पुष्टा हू* हूL तिक वेमां तिवेचरर्ण या घट स लगभग 02 वे+ पु5वे अपु लथाB शुभमां सहू@ क भई स जूया सहू@ क तिवेरुद्ध, पु तिh द्वार इस प्रकर क घट कO रिरपु*ट पुर एक अन्या ण्डि./क प्रकरर्ण पु जू द्ध हूnआ था, लिजूसमांV स जूया सहू@ करवेस मांV
8 / 11 {Cr. A. No.-253 of 2025} रहू । ऐस ण्डिस्थाति मांV याहू भ स्पुष्टा हूL तिक पु तिh एवे उसक पुरिरवेरजूg क सथा अपु लथाB शुभमां सहू@ कO पु5वे स र लिजूशु तिवेद्यमां रहू हूL । जू पु5वे र लिजूशु कO ण्डिस्थाति रहू हूL याहू आवेश्याक हू* जू हूL तिक पु तिh और उसक पुरिरजू सतियाg क या कO समां
सक पु5वेक और स5क्ष्मांपु5वेक कO जूए ।
12.
पु तिh (अ०स०-1) अपु न्यायालया या मांV अतिभया*जू मांमांल कO पुतिष्टा कO हूL तिक क छ ल*पु वे तिवेर*Hभस हूL । उस मांख्या पुर र्ण मांV याहू * अवेश्या कहू हूL तिक अपु लथाBगर्ण द्वार उसक सथा अप्रकk तिक ष्कमां तिकया, तिक पुलिलस क समां अ ग Hर-161 ./ प्रतिक्रया स तिहू क हू जू या (प्रशु पु -6) मांV लिजूस प्रकर उस या था तिक अपु लथाBगर्ण पुहूल उसस अपु लिल ग पुकhवेकर हूस्मांLथा करए, वेLस कथा न्यायालया या मांV हूu तिकया । प्रतिपुर र्ण मांV उस याहू भ स्वे कर तिकया हूL तिक Hर-164 ./ प्रतिक्रया स तिहू क अ ग जू उसक या (प्रशु / -1) मांV भ
हूस्मांLथा स स लिH क उल्लेख हूu तिकया गया था । ऐस शु मांV पु तिh (अ०स०-1) क कथाg मांV तिवेर*Hभस पुरिरलति हू* हूL, लिजूसस उसक न्यायालया
या स हूस्पु हू* जू हूL ।
13. जूहूv क तिचतिकत्स या सक्ष्या क प्रश् हूL, इस स H मांV पु तिh (अ०स०-1) क पुर र्ण /\क्टर / .ए. शुमां (अ०स०-7) द्वार ति क 14/11/2019 क* तिकया जू या गया हूL, जू* तिक कलिथा घट ति क-03/08/2019 क लगभग 03 मांहू 10 ति पुश्च कO ण्डिस्थाति हूL । /\क्टर शुमां द्वार प्रमांतिर्ण मांलतिहूजू रिरपु*ट (प्रशु पु -30) क असर, पु तिh क ग त्र मांV स्पुशु एवे वे पुर पु h हू* पुया गया था हूर
भग मांV तिछल एवे खर*च क ऐस तिचह्न पुरिरलति हूnए जू* घवे भर कO अवेस्था मांV था । तिचतिकत्स या अतिभमांसर उक्त च*टV 10–15 ति पुर प्र हू* थाu । /\. शुमां
9 / 11 {Cr. A. No.-253 of 2025} याहू मां व्याक्त तिकया था तिक पु तिh क सथा अप्रकk तिक कk त्या तिकया गया हू* सक हूL । तिक , उल्लेख या हूL तिक तिचतिकत्सक क असर पुर र्ण ति क-14/11/2019 स 10–15 ति पु5वे हू उक्त च*टV करिर हूnई थाu, जूतिक घट ति क-03/08/2019, अथाr पुर र्ण स लगभग 03 मांहू 10 ति पु5वे कO ई गई हूL । इसक अतिरिरक्त, /\.
शुमां याहू भ स्पुष्टा तिकया हूL तिक तिछल एवे खर*च क तिचह्न स्वेया खजूल स भ उत्पुन्न हू* सक हूf और वेहू तिण्डिश्च रूपु स याहू हूu कहू सक तिक पु तिh क सथा अप्रकk तिक कk त्या तिकया हू गया था । इस प्रकर स, याहू ण्डिस्थाति स्पुष्टा हूL तिक तिचतिकत्सक शुमां क या * तिश्चयात्मांक प्रकk ति क हूL और हू उसस इस थ्या कO पुतिष्टा हू* हूL तिक पुर र्ण स 03 मांहू 10 ति पु5वे पु तिh क सथा अप्रकk तिक कk त्या तिकया गया हू* ।
14. /\क्टर शुमां द्वार पुर र्ण पुश्चr था प्रभर , जूमांल, ग क तिवे पुर लिसतिवेल सजू सहू मांख्या अस्पुल अH क, ग द्वार * तिचतिकत्सकg कO ट मां गतिठा कO गई, लिजूसमांV /\. / .स . जूL (सजूर तिवेशु+ज्ञ) एवे /\. आर.क . याक (अ०स०-10) सण्डिम्मांलिल था । उक्त तिचतिकत्सकg कO ट मां ति क-15/11/2019 कO रतित्र लगभग 08:30 जू पु तिh क पुर र्ण तिकया । पुर र्ण क :र उन्हूg पुया तिक पु तिh क ग क चरg ओर * तिकस प्रकर क खरgच क तिशु था और हू मां सपुतिशुयाg मांV स5जू अथावे पुरिरलति हूnआ । इस प्रकर, तिचतिकत्सकg कO ट मां द्वार तिए गए तिष्क+ मांV याहू स्पुष्टा शुया गया हूL तिक पु तिh क सथा ष्कमां क क*ई लर्ण हूu पुए गए । इस रहू स, तिचतिकत्स या सक्ष्या स भ पु तिh (अ०स०-1) क कथाg कO पुतिष्टा हूu हू* हूL ।
15. जूहूv क अप्रकk तिक कk त्या क घटक्रमां क वे ति/या* ए जू और उसक वेयारल तिकए जू क प्रश् हूL? इस स H मांV अतिभया*जू कO ओर स उपुतिर क Hरमां मां /वे
(अ०स०-9), जू* प्रकरर्ण क तिवेवेचक रहू, था उपुतिर क ओमांप्रकशु शुमां
10 / 11 {Cr.
A. No.-253 of 2025} (अ०स०-8), जू* त्समांया पुलिलस मांख्यालया कO सइर लL मांV पुस्था था, क कथा मांहूत्वेपु5र्ण हूf । इक असर अपु लथाBगर्ण स मां*इल फा* जूब् तिकए गए था था एक मां*इल फा*, लिजूसमांV कलिथा वे ति/या* हू* या गया था, रजूक मांर गप्त स जूब् तिकया गया, लिजूसक पु चमां भ Lयार तिकया गया । थातिपु, रजूक मांर गप्त क पुर र्ण हूu करया गया और उक्त मां*इल मांV पुया गया तिक कलिथा वेयारल तिकया गया वे ति/या* पुहूल हू
ति/ल ट तिकया जू चक था । उल्लेख या हूL तिक ऐस तिकस वे ति/या* क पु चमां भ प्रस् हूu तिकया गया । भर या सक्ष्या अलिHतियामां कO Hर 65(ख) क अ ग प्रमांर्णपुत्र प्र कर वेल उपुतिर क ओमांप्रकशु शुमां (अ०स०-8) अपु कथा मांV स्पुष्टा कहू हूL तिक उक समां प्रस् मां*इल एवे मांमां*र क/ (प्रशु-ए, एवे स ) कO जू च मांV तिकस भ
प्रकर क अश्ल ल अथावे अप्रकk तिक ष्कमां स स लिH फा*ट* या वे ति/या* हूu पुया गया । उन्हूg याहू भ स्वे कर तिकया तिक याति वेस्वे मांV ऐस फा*ट* अथावे वे ति/या* मां:जू5 हू*, * वे पुd प्रप्त तिकए जू सक था । इस तिवे+या मांV स्वेया पु तिh (अ०स०-1) क कथाg मांV भ तिवेर*Hभस पुरिरलति हू* हूL । उस न्यायालया या मांV याहू कहू तिक उसक सथा हूnए घटक्रमां क वे ति/या* या गया था, तिक प्रतिपुर र्ण मांV उस याहू स्वे कर तिकया तिक उस घटस्थाल पुर क*ई मां*इल फा* अथावे ऐस क*ई उपुकरर्ण हूu ख लिजूसस याहू पु चल तिक रिरक\ति/‹ग हू* रहू हूL । इस प्रकर स, कलिथा वे ति/या* रिरक\ति/‹ग क स H मांV प्रस् सक्ष्या * स्पुष्टा और पुयाप्त हूf और हू तिवेश्वेस या हूL । इस प्रकर मां*ईल फा*, मांमां*र क/ कO जूब् , Lयार पु चमां वे पु /Zईवे आति स भ
पु तिh क कथा क* समांथा प्रप्त हूu हू* ।
16. उपुर*क्त न्यायादृष्टा क प्रकशु मांV अतिभया*जू कO ओर स प्रस् सक्ष्या कO स पु5र्ण और तिवेश्वेस या पुर तिवेचर कर पुर याहू तिष्कति+ हू* हूL तिक पु तिh (अ०स०-1),
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A. No.-253 of 2025} लिजूसक अपु लथाB शुभमां सहू@ एवे उसक पुरिरवेर स पु5वे स र लिजूशु रहू हूL, वेहू पु तिh स हू स पुर तिवेश्वेस या स हूu हूL । उसक कथाg मांV आपुस तिवेर*Hभस वे ल*पु हूL । उसक कथाg कO पुतिष्टा तिचतिकत्स या अथावे रसयातिक पुर र्ण रिरपु*ट स हूu हूnई हूL और हू
इलक्टZ\तिक सक्ष्या स हूnई हूL । मांमांल कO रिरपु*ट कर 03 मांहू 10 ति क तिवेलम् स लिलखई गई हूL लिजूसक क*ई समांHप्र स्पुष्टा करर्ण हूu हूL । इस प्रकर, अपु लथाBगर्ण क तिवेरूद्घो अतिभया*जू अपु मांमांल स्पुष्टा, पुयाप्त और स हू स पुर तिवेश्वेस या सक्ष्या द्वार प्रमांतिर्ण कर मांV असफाल रहू हूL । इसलिलए अपु लथाBगर्ण कO *+लिसतिद्ध और ./शु क तिर्णया ण्डिस्थार रख जू या*ग्या हूu पुया जू ण्डिŒक अपु लथाBगर्ण स हू क लभ प्रप्त कर क हूक़र हूf ।
17. अd अपु ल स्वे कर कO जू हूL । “प्रश्H *+लिसतिद्ध वे ./शु” क तिर्णया अपुस् तिकया जू हूL था अपु लथाBगर्ण क* स हू क लभ हूnए आर*तिपु अपुरH स *+मांक्त तिकया जू हूL ।
18. अपु लथाBगर्ण क* जूल मांV तिरूद्घो या गया हूL । याति उकO अन्या मांमांल मांV आवेश्याक हू* * उन्हूV त्कल रिरहू तिकया जूए ।
19. तिर्णया कO प्रति क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क* मां5ल अतिभलख था तिर्णया कO सत्याप्रतिलिलतिपु स लिH जूल अH क क* आवेश्याक कयावेहू हू स5चथा एवे पुलथा शु घ्रपु5वेक प्रति+ हू* । सहू /- (स जूया क मांर जूयासवेल) न्यायाH शु पु*मां