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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 72866 (ALL)

SURENDRA SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/23858/2025 · 2025-09-08

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 23858 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक सुरेन्द्र िसह की ओर से मु०अ०स० 480/2024, अन्तगर्त धारा 420/ 467/ 468/ 471/ 120बी भा.दं.सं, थाना कोतवाली, िजला मथुरा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा पूरकशपथ पत्र दािखल िकया गया उसे पत्रावली पर रखा जाए। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक को कै रीकल िलिवग से कु छ समय पूवर् ही ऋण अिधकारी /लोन अिधकारी के रूप में प्रोन्नत िकया गया था। उक्त मामला प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से संबंिधत है। उक्त योजना में ऋण िलये जाने हेतु बैंक से सीधा सम्पकर् नहीं होता, बिल्क िजला उद्योग के न्द्र कायार्लय में संबंिधत अभ्यथीर् स्वयं के माध्यम से अथवा मध्यस्थ या एजेन्ट के माध्यम से ऋण योजना से उद्योग का चयन कर ऋण हेतु अपनी पत्रावली मय आधार काडर् व पैन काडर् प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार आये िविभन्न प्रपत्रों की छंटनी करने के उपरांत िजला उद्योग के न्द्र उिचत ऋण प्राप्तकतार्ओं की पत्राविलयां अपनी संस्तुित सिहत िविभन्न बैंक की िविभन्न शाखाओं के पोटर्ल पर अपलोड कर देते हैं। कम्प्यूटर िनधार्िरत पासवडर् होने के नाते के वल संबंिधत बैंक शाखा का प्रबन्धक ही उक्त पत्राविलयों को दे सकता है। िनयमानुसार ऐसे प्रबन्धक को ही पोटर्ल पर आयी पत्रावली के संबंध में मौिखक ही जांच कर ऋण लेने की प्रिक्रया को संतुष्ट होकर आगे बढ़ाया जाता है। यहां तक की प्रिक्रया में फील्ड आफीसर / ऋण अिधकारी या उसके समकक्ष पद पर आसीन व्यिक्त Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Daga, Kamlesh Kumar Dwivedi, Saurabh Dwivedi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Surendra Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) को प्रबन्धक की सहमित पर अिग्रम कायर्वाही और संस्तुित िकये जाने हेतु प्रबन्धक द्वारा िनदेर्िशत िकया जाता है। प्रस्तुत मामले में प्रबन्धक श्री रोिहतदास ने मौके पर जाकर ऋण संबंधी जांच करते हुये अपनी सहमित व्यक्त कर आवेदक को आदेिशत िकया िक वह पत्रावली अग्रसािरत करे। विरष्ठ अिधकारी होने के नाते उसके द्वारा सह अिभयुक्त के आदेशानुसार पत्रावली को इस आधार पर अग्रसािरत िकया िक िजला उद्योग कायार्लय की संस्तुित पर आये प्राथर्नापत्र का स्थलीय िनरीक्षण आिद कर संतुष्ट होकर पत्रावली को अग्रसािरत िकये जाने के आदेश का पालन िकया। उक्त धोखाधड़ी की जांच के िलए बैंक द्वारा िवभागीय जांच आिद करने के बाद सह अिभयुक्त को नौकरी से बखार्स्त कर िदया, जो फरार है। आवेदक को िसफर् लापरवाही के कारण एक वषर् के िलए वेतन वृिद्ध रोकने के उपरांत यथावत कायर् करने का आदेश िदया है। वािदनी ने उक्त मामले में प्रबन्धक रोिहत दास सिहत फजीर् मिहला को ही मुकदमें की तहरीर में अिभयुक्त माना है, न िक आवेदक को उसके द्वारा िकसी प्रकार की कोई अिभलेखीय कू टरचना नहीं की है, न उनको असल मानकर प्रयोग िकया है, न धोखाधड़ी की है, न कोई नाजायज लाभ प्राप्त िकया है। उसके िवरूद्ध दशार्ये गये अपराधों से संबंिधत कोई साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। आवेदक का अन्य कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। वािदनी द्वारा ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है िक आवेदक ने वािदनी को ऋण लेने हेतु प्रेिरत िकया हो अथवा इस संबंध में कोई नफा नाजायज अिजत िकया हो। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 02.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. BAIL No. 23858 of 2025 2 आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 9, 2025 S.Mishra BAIL No. 23858 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad