Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 24523 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक मोहन की ओर से मु०अ०स० 125/2023, अन्तगर्त धारा 306 भा.दं.सं., थाना कोतवाली, िजला फतेहपुर में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. यह आवेदक का ि्षतीय जमानत आवेदन प्ऴ है, ्ऺथम जमानत आवेदन प्ऴ इसी न्यायपीठ ्षारा िदनांक 22.08.2023 को िनरस्त कर िदया गया था।
4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक के िव्षान अिधव्वा अपने समथर्न में इस वाद से संबंिधत वाद के आदेश फलक की ्ऺितिलिप की ओर न्यायालय का ध्यान आकृ ्ि िकया िजसके अवलोकन से यह िविदत होता है िक अवर न्यायालय में उ्व मामले से संबंिधत अिभयोजन सा्षी स्ऴ परी्षण के िनस्तारण में उपिस्थत न होकर जानबूझकर हीला हवाली कर रहे हैं एवं अिभयोजन साि्षयों के िखलाफ एन.बी.डब्लू भी जारी है एवं उ्व वाद से सबंिधत स्ऴ परी्षण में शी्स संभावना नजर नहीं आ रही है। आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने अपने तकर् के समथर्न में Indrani Pratim Mukerjea Vs. Central Bureau of Investigation and Another passed in Special Leave to Appeal (Crl.) No. 1627 of 2022 to submit that prolonged incarceration of a person as an under trial is against his fundamental rights under Article 21 of the Constitution of India. में माननीय उच्चतम न्यायालय ्षारा ्ऺितपािदत िविध- ्िवस्था की ओर न्यायालय का ध्यान आकृ ्ि िकया। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार Versus Counsel for Applicant(s) : Baleshwar Dayal, Ram Prasad Kanaujiya Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mohan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 16.06.2023 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5.
िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
6. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
7. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं उसी धनरािश के दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 6, 2025 S.Mishra BAIL No. 24523 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad