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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 71841 (ALL)
SACHIN CHAUHAN v. State of U.P.
BAIL/23982/2024 · 2025-08-21
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 71841 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:144739 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 23982 of 2024 Applicant :- Sachin Chauhan Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Jeet Narayan Dubey,Meera Verma,Shailesh Upadhyay,Shashi Shekhar Mishra,Surendra Tiwari,Vivek Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक सवचिन चिचौहद्वान ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 157/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 409, 411 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा धलवंक रकोण्डि, धजलद्वा रद्वाधजयद्वाबद्वाद मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3.(क) आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। प्रद्वासवंवरक तथ्य यह हहै वक आववेदक और अवनल दकोननों हली कवं पनली कवे सवंरक्षक थवे और आववेदक कवं पनली मम कधथत घटनद्वा कवे दको वदन पझूवर हली नयली वनयसुक प्रद्वाप्त ककी थली तथद्वा उसकको वनयसुवक पत जद्वारली नहहीं वकयद्वा रयद्वा थद्वा और उसवे सभली वनयमनों ककी पझूरली जद्वानकद्वारली नहहीं थली। सवंरक्षक अवनल और सझूचिनद्वाकतद्वार कवे बयद्वाननों मम परस्पर ववरकोधिद्वाभद्वास हहै, सवंरक्षक अवनल नवे अपनवे बयद्वान मम कहद्वा हहै वक कवं पनली ककी ओर सवे उसवे 500 रुपयवे कवे 3 कहै सवेट और 200 रुपयवे कद्वा एक कहै सवेट वदयद्वा रयद्वा थद्वा , लवेवकन उसनवे यह नहहीं बतद्वायद्वा हहै वक कवं पनली नवे आववेदक कको ककोई कहै सवेट यद्वा पहैसद्वा वदयद्वा हहै, जबवक सहली तथ्य यह हहै वक सवंरक्षक अवनल नवे आववेदक कवे 5 लद्वाख रुपयवे और अपनवे पक्ष कवे 5 लद्वाख रुपयवे प्रद्वाप्त वकए थवे और आववेदक नवे अपनवे 5 लद्वाख रुपयवे बबक कवे ए.टली.एम. मम लकोण्डि कर
वदए और ए.टली.एम.
मम लकोण्डि कर
वदए और ए.टली.एम. मम सवंरक्षक अवनल ककी रद्वावश लकोण्डि करनवे कवे धलए अवनल कद्वा इवंतजद्वार कर रहद्वा थद्वा, लवेवकन शद्वाम तक उक सवंवंरक्षक अवनल वद्वापस नहहीं आयद्वा, तको आववेदक कद्वायद्वारलय मम रयद्वा तथद्वा आववेदक नवे कस्टकोवण्डियन अवनल सवे उक धिनरद्वावश प्रद्वाप्त करनवे कद्वा अनसुरकोधि वकयद्वा, तको कस्टकोवण्डियन अवनल नवे मचौधखक रूप सवे आववेदक कको धिनरद्वावश घर लवे जद्वानवे कवे धलए कहद्वा। आववेदक ककी उपणस्थवत कद्वायद्वारलय कवे वफवं रर वप्रवंट अटमण्डिमस और अटमण्डिमस रधजस्टर सवे दवेखद्वा जद्वा सकतद्वा हहै। आववेदक वदनद्वावंक 11.05.2024 कको अपनवे घर पर थद्वा तको पसुधलस नवे मसुखवबर और कस्टकोवण्डियन अवनल ककी वमललीभरत सवे उसवे उसली वदन रद्वावत 2 बजवे वररफ्तद्वार कर धलयद्वा और आववेदक कको पसुधलस थद्वानवे मम बहैठद्वा धलयद्वा और वदनद्वावंक 12.05.2024 ककी ससुबह कधथत रबन कद्वा आरकोप लरद्वाकर आववेदक कवे ववरुद्ध प्रद्वाथवमककी पवंजलीकक त कर लली रयली। (ख) आववेदक दद्वारद्वा उक कवं पनली कवे पहैसवे कद्वा रबन नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै तथद्वा वतरमद्वान मद्वामलद्वा पररणस्थवतजन्य सद्वाक्ष्य पर आधिद्वाररत हहै। आववेदक कवे ववरुद्ध ककोई उक कहै सवेट चिकोरली करनवे कद्वा ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य पद्वायद्वा नहहीं रयद्वा हहै। आववेदक कवे ववरुद्ध भद्वारतलीय दवंण्डि सवंवहतद्वा ककी धिद्वारद्वा 409 और 411 कवे अवंतररत ककोई भली तथ्य नहहीं पद्वायद्वा रयद्वा हहै, इसधलए आववेदक कवे ववरुद्ध ककोई मद्वामलद्वा नहहीं बनतद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 12.05.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यनों एववं पररणस्थवतयनों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद प्रथमदृष्टयद्वा यह पररलवक्षत हको रहद्वा हहै वक वतरमद्वान मद्वामलद्वा पररणस्थवतजन्य सद्वाक्ष्य पर आधिद्वाररत हहै। आववेदक कवे ववरुद्ध उक कहै सवेट चिकोरली करनवे कद्वा ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं पद्वायद्वा रयद्वा हहै , अतनः सबझूतनों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे दचौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यनों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षयनों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशनों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे दचौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यनों सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयनों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली
उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यनों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 22.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad