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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 70907 (ALL)

VIKAS YADAV v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

BAIL/25639/2025 · 2025-08-18

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:142728 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 25639 of 2025 Applicant :- Vikas Yadav Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Anand Kumar,Nilesh Kumar Dubey,Shashi Shekhar Maurya Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय। 2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा शली रद्वाजजद्र धसवंह कको ससुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक ववकद्वास यद्वादव ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 89/2025, अवंतगरत धिद्वारद्वा 309(6), 109(1), 317(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा बडद्वागद्वागाँव, धजलद्वा वद्वारद्वारसली मज जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा गयद्वा हहै। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मज गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झपूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , आववेदक दद्वारद्वा कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। मसुखिवबर खिद्वास ककी सपूचनद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक कको वगरफ्तद्वार कर वतरमद्वान वद्वाद मज अवभियसुक बनद्वा वदयद्वा गयद्वा हहै। यहद्वावं प्रद्वासवंवगक तथ्य हहै वक वतरमद्वान वद्वाद मज अन्य सह -अवभियसुक गकोलपू उफर आशलीष यद्वादव ककी जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र सवं० 26894/2025 मज इसली न्यद्वायपलीठ दद्वारद्वा वभिन्न वतधथ कको स्वलीकक त ककी जद्वा चसुककी हहै। अततः जमद्वानत प्रद्वाप सह-अवभियसुक सवे समद्वान भिपूवमकद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक भिली जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारली हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पपूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको आज दद्वाधखिल पपूरक शपथपत्र कवे प्रस्तर सवं० 2 मज स्पष्ट वकयद्वा गयद्वा हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भिली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मज सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भिली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभिली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भिली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मज वद० 06.04.2025 सवे कद्वारद्वागद्वार मज वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभिलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मज पत्रद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद, सबपूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भिली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभिद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरली रद्वाय मज आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 7. अततः वद्वाद कवे गसुर -दकोष पर वबनद्वा ककोई वटिप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मज सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकगत बवंधि- पत्र एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भिली दको प्रवतभिपू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे ददौरद्वान अवभियकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभियकोजन सद्वावक्षययों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा, वह परलीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मज उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परलीक्षर मज ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंत्रतद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहली करवेगद्वा और वकसली भिली अपरद्वाधधिक गवतववधधि मज धलप नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भिली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभिन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हज न्यद्वायद्वालय मज तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 8. उपरकोक शतरवं मज सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मज , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत्र हहै। Order Date :- 19.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad