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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 70332 (ALL)

ALOK KUMAR v. STATE OF U.P.

BAIL/22997/2025 · 2025-09-22

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22997 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 130/2023 अन्तगर्त धारा 406, 419, 420, 467, 467, 468, 471, 120बी भारतीय न्याय संिहता, थाना बांसगावं, िजला गोरखपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक यह िद्वतीय जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम जमानत, जमानत आवेदन पत्र सं० 51393/2023 में इस न्यायालय के अन्य न्यायपीठ के आदेश िदनांक 07.08.2024 के द्वारा िनरस्त िकया गया है। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने नवीन तथ्य यह प्रस्तुत िकया गया िक इस मामलें में आवेदक के िवरूद्ध िदनांक 09.02.2024 को आरोप िवरिचत िकया गया है, िकतु अभी तक इस मामलें के सत्र परीक्षण में िकसी भी अिभयोजन साक्षी का परीक्षण शुरू नहीं हो पाया है। इससे, इस मामलें के सत्र परीक्षण का शीघ् िनस्तारण िनकट भिवष्य में होने की संभावना पिरलिक्षत नहीं हो रही है। उनके द्वारा आगे भी प्रस्तुत िकया गया है िक अिभलेख से ही यह स्पष्ट है िक िजस अपराध के तहत आवेदक का चालान िकया गया है और जेल में िनरुद्ध िकया गया था, वह िवशेष रूप से िवद्वान मिजस्ट्रेट की न्यायालय द्वारा िवचारणीय है। िनिववाद रूप से जांच एजेंसी ने किथत अपराध के संबंध में आरोपी आवेदक के िखलाफ िवद्वान मिजस्ट्रेट की न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत िकया था और उक्त आरोप पत्र पर िवद्वान मिजस्ट्रेट ने िदनांक 20.12.2023 के आदेश के तहत अपराध का संज्ञान िलया था और उसके बाद आरोपी आवेदक (जो आरोप पत्र प्रस्तुत करने की तारीख को जेल में िनरुद्ध था) का वारंट भी धारा 309 दं०प्र०सं० के तहत तैयार िकया गया था और उसके बाद िवद्वान िवचारण न्यायालय ने िदनांक 09.02.2024 को आरोपी आवेदक के िवरूद्ध औपचािरक आरोप िवरिचत िकया Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Daga, Sapna Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Alok Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) और मामले में साक्ष्य लेने के िलए िदनांक 22.02.2024 की तारीख तय की। आपरािधक मामलें के आदेश-फलक से स्पष्ट है िक औपचािरक आरोप-पत्र के दािखल होने के उपरांत साक्ष्य लेने के िलए िदनांक 22.02.2024 पहली ितिथ िनधार्िरत की गई थी, लेिकन एक वषर् और ग्यारह माह से अिधक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमें की कायर्वाही पूरी नहीं हो सकी। दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 437 (6) के अनुसार, यिद िकसी ऐसे मामले में, जो मिजस्ट्रेट द्वारा िवचारणीय है, िकसी गैर-जमानती अपराध के अिभयुक्त व्यिक्त का मुकदमा साक्ष्य लेने के िलए िनधार्िरत पहली ितिथ से 60 िदनों की अविध के भीतर समाप्त नहीं होता है, तो ऐसा व्यिक्त, यिद वह उक्त पूरी अविध के दौरान िहरासत में रहता है, तो उसे जमानत पर िरहा कर िदया जाएगा। दंड प्रिक्रया संिहता की धारा 437(6) के प्रावधान नीचे उद्धृत हैं: "(6) If, in any case triable by a Magistrate, the trial of a person accused of any non-bailable offence is not concluded within a period of sixty days from the first date fixed for taking evidence in the case, such person shall, if he is in custody during the whole of the said period, be released on bail, to the satisfaction of the Magistrate, unless for reasons to be recorded in writing, the Magistrate otherwise directs." इससे पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदक जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 30.09.2023 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत BAIL No. 22997 of 2025 2 करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 23, 2025 CP.sahani BAIL No. 22997 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad