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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 70227 (ALL)

RAJENDRA KUMAR SINGH ALIAS R.K. SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/23182/2025 · 2025-09-08

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 23182 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 57/2024, अंतगर्त धारा 420, 406, 467, 468, 471, 504, 506, 120-बी. भा.दं.सं., थाना िसकं दरा, िजला आगरा में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान विरष्ठ अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता की तरफ से आज प्रित शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. संक्षेप में अिभयोजन कथानक इस प्रकार है िक वादी द्वारा धारा 156 (3) दं०प्र०सं० के अन्तगर्त प्राथर्नापत्र इन आशय से दािखल िकया गया िक वषर् 2013 में प्रतीक िवहार में आवासीय प्लॉट िवक्रय िकये जा रहे थे, उक्त आवासीय प्लॉटों को िशल्पक सहकारी आवास सिमित के िनदेशक/संरक्षक आर०के ० िसह तथा उनके पुत्र प्रतीक चौहान द्वारा वादी को आश्वासन िदया गया िक प्लॉट हर तरह से पाक साफ हैं। उसने उनकी बातों पर िवश्वास करके अपनी पुत्री सुषमा िसह के नाम से एक प्लॉट भूखण्ड संख्या 131 प्रतीक िवहार फे स-िद्वतीय मौजा िसकन्दरा, आगरा क्रय िकया। खरीदने के पश्चात् जब वह वषर् 2016 में उक्त प्लॉट पर काम कराने गया तो उसकी जानकारी में आया िक उक्त प्लॉट को िशल्पक सहकारी आवास सिमित के सिचव अरून कु मार िसह ने पूवर् में ही श्रीमती आशा शमार् को िदनांक 07.06.2000 को िवक्रय िकया जा चुका है। तत्सम्बन्ध में िशकायत करने पर अिभयुक्तगण द्वारा कानूनी कायर्वाही से बचने हेतु अित शीघ्र ही प्लॉट को खरीदते समय िलये गये 14 लाख रूपये ब्याज सिहत लौटाने अथवा दूसरी कॉलोनी में इतने ही रूपयों में प्लॉट देने का आश्वासन िदया गया, परन्तु न तो रूपये वापस िकये गये, न ही प्लॉट ही िदया गया। जब वादी अिभयुक्तगण के घर पर रूपये मांगने गया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गयी एवं रूपये देने से मना िकया गया। Versus Counsel for Applicant(s) : Anubhav Singh, Arvind Kumar, Kiran Tiwari, Mahesh Chandra Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rajendra Kumar Singh Alias R.K. Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) 5.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी लगभग दस वषर् बाद काफी िवलम्ब से पंजीकृ त करायी गयी है। आवेदक किथत सोसाइटी का िनदेशक है, िजसकी आयु लगभग 70 वषर् है और वह 15 वषर् पूवर् हृदय रोग से पीिड़त था। उसने सूचना देने वाले को कोई वचन नहीं िदया था और न ही िकसी व्यिक्त के साथ कोई किथत िवक्रय िवलेख िनष्पािदत िकया गया था। सभी िवक्रय-िवलेख सिचव अिभयुक्त अरुण कु मार िसह और अन्य व्यिक्तयों द्वारा िनष्पािदत िकए गए थे। आवेदक द्वारा वादी की पुत्री एवं अन्य के िवरूद्ध न्यायालय मध्यस्थ/अपर आवास आयुक्त/ अपर िनबन्धक, उ०प्र० आवास एवं िवकास पिरषद, लखनऊ में वाद संख्या-137 डब्लू/2014 िशल्पक सहकारी आवास सिमित िवरुद्ध श्रीमती आशा शमार् आिद प्रश्नगत भूखण्ड से सम्बिन्धत िवलेख िदनांिकत 07.06.2000 एवं 21.02.2013 को शून्य घोिषत िकये जाने हेतु संिस्थत िकया गया था, जो आदेश िदनांिकत 22.01.2018 के माध्यम से स्वीकार करते हुए किथत िवक्रय िवलेख शून्य घोिषत हो चुका है। िववेचक ने आवेदक के िवरुद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य एकित्रत िकए िबना, मात्र आवेदक और सह-अिभयुक्तों के इकबािलया बयान के आधार पर, वतर्मान मामले में िमथ्यारोिपत कर िदया, जबिक उक्त घटना के संबंध में कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है।आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना/धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है, न ही वादी अथवा उसकी पुत्री को िकसी प्रकार की धमकी दी है, बिल्क वादी द्वारा आवेदक को मानिसक रूप से परेशान करने हेतु वतर्मान वाद में अिभयुक्त बना िदया गया है। (ख) अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया है िक आवेदक किथत संपित्त का न तो िवक्रयकतार् है और न ही उसका गवाह है। वतर्मान वाद दीवानी प्रकृ ित का है, िकन्तु जानबूझकर इसे आपरािधक रूप िदया गया है और दोनों पक्षों के बीच िसिवल वाद संख्या 97/18 भी लंिबत है। वादी की पुत्री और सह-अिभयुक्त गोपेश्वर गुप्ता ने उपरोक्त वाद में शपथ पत्र दािखल कर बताया है िक दोनों पक्षों के मध्य कोई िववाद नहीं है और प्राप्त िवक्रय पत्र की किथत धनरािश पर कोई िववाद नहीं है तथा भिवष्य में भी कोई िववाद नहीं होगा। अतः आवेदक पर कोई आपरािधक दाियत्व नहीं बनता। किथत िवक्रय िवलेख की कोई भी किथत धनरािश आवेदक या उसकी सोसाइटी के खाते में स्थानांतिरत नहीं की गई है। आवेदक के कब्जे से कु छ भी बरामद नहीं हुआ है और न ही आवेदक के िवरुद्ध कोई साक्ष्य अिभलेख में दजर् िकया गया है तथा न्यायालय मध्यस्थ/अपर आवास आयुक्त/ अपर िनबन्धक, उ०प्र० आवास एवं िवकास पिरषद, लखनऊ द्वारा प्रश्नगत िवक्रय-िवलेख शून्य घोिषत िकये जा चुके हैं, िजससे आवेदक के िवरुद्ध उक्त आरोिपत अपराध बनता पिरलिक्षत नहीं हो रहा है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 05.05.2025 से कारागार में BAIL No. 23182 of 2025 2 िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 7. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 8. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 9. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 9, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 23182 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad