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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 69951 (ALL)

PAVNESH MINOR v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NABAIL/5234/2025 · 2025-07-02

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:103190 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 5234 of 2025 Applicant :- Pavnesh Minor Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Rakesh Kumar Rathore,Sanjeev Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. वविपकक्षी ससं० 2 कके वविदद्वान अधधिविकद्वा शक्षी अननुरद्वाग दनुबके ककी तरफ सके आज विकद्वालतनद्वामद्वा प्रस्तनुत वकयद्वा गयद्वा, धजसके पतद्वाविलक्षी पर रखद्वा जद्वाए। 2. वितरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाररनद्वा पत आविकेदक पविनकेश (वकशशोर) ककी ओर सके मनु०अ०स० 100/2025, अन्तगरत धिद्वारद्वा 191(2), 190, 115(2), 333, 352, 351(2), 105 बक्षी.एन.एस., रद्वानद्वा बकेविर, धजलद्वा ममैनपनुरक्षी मम अवग्रिम जमद्वानत पर मनुक करनके हकेतनु प्रस्तनुत वकयद्वा गयद्वा हमै। 3. आविकेदक कके वविदद्वान अधधिविकद्वा, वविपकक्षी कके वविदद्वान अधधिविकद्वा एविसं वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा शक्षी चसंदन धससंह कशो सनुनद्वा तरद्वा पतद्वाविलक्षी कद्वा पररशक्षीलन वकयद्वा। 4. आविकेदक कके वविदद्वान अधधिविकद्वा नके तकर प्रस्तनुत वकयद्वा वक आविकेदक वनदर्दोष हमै , उसके उपरशोक धिद्वारद्वाओसं मम दकेषविश तसंग वि परकेशद्वान करनके ककी वनयत सके आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हमै , उसके आशसंकद्वा हमै वक उसके उपरशोक विवररत मद्वामलके मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हमै , जबवक उसकके वविरूद्ध कशोई वविश्विसनक्षीय सद्वाक्ष्य नहहीं हमै। आविकेदक दद्वारद्वा प्रद्वारवमककी मम दवशरत उपरशोक धिद्वारद्वाओसं कद्वा अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हमै। आविकेदक कके वविरुद्ध वकसक्षी प्रकद्वार ककी एन .सक्षी.आर. इससके पपूविर दवशरत नहहीं हहई हमै। घटनद्वा कके समयय आविकेदक ममौकके पर ममौजपूद नहहीं रद्वा , मगर पनुरद्वानक्षी रसंधजश ककी विजह सके उसके वितरमद्वान विद्वाद मम वमथ्यद्वारशोवपत वकयद्वा गयद्वा हमै। आविकेदक ककी ओर सके यह भक्षी आश्विद्वासन वदयद्वा गयद्वा हमै वक विह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयशोग करनके कके धलए तमैयद्वार हमै और जब भक्षी आविश्यकतद्वा हशोगक्षी विह ईमद्वानदद्वारक्षी सके न्यद्वायद्वालय कके समक खनुद कशो उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभक्षी शतर्दोसं कशो स्विक्षीकद्वार करनके कके धलए भक्षी तमैयद्वार हमै जशो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरशोवपत करकेगक्षी। 5. वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तनुत वकयद्वा गयद्वा वक अवभयनुक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गसंभक्षीर प्रकक वत कद्वा हमै तरद्वा आविकेदक दद्वारद्वा अन्य सह -अवभयनुकक्तों कके सद्वार वमलकर चनुटमैल कशो गम्भक्षीर चशोटम कद्वाररत ककी गयक्षी, धजससके इलद्वाज कके दमौरद्वान चनुटमैल ककी मकत्यनु हशो गयक्षी। पनुननः यह भक्षी करन वकयद्वा गयद्वा वक मकतक ककी पशोस्टमद्वाटरम आख्यद्वा मम भक्षी उसकके शरक्षीर पर आठ चशोटक्तों कद्वा आनद्वा असंवकत वकयद्वा गयद्वा हमै। आविकेदक कके वविरुद्ध पपूविर मम वदनद्वासंक 10.04.2025 कशो गमैर जमद्वानतक्षी विद्वारणट ककी कद्वायरविद्वाहक्षी वनगरत हशो चनुककी हमै तरद्वा आविकेदक न्यद्वायद्वालय मम आत्मसमपरर नहहीं कर रहद्वा हमै और न हक्षी पनुधलस दद्वारद्वा ककी जद्वा रहक्षी वविविकेचनद्वा मम सहयशोग कर रहद्वा हमै। इसधलए आविकेदक कशो अवग्रिम जमद्वानत पर मनुक वकयके जद्वानके कद्वा कशोई औवचत्य प्रतक्षीत नहहीं हशोतद्वा हमै। अतनः अवभयनुक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आविकेदन पत वनरस्त वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हमै वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कके मद्वामलके मम मद्वाननक्षीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नके मद्वानद्वा हमै वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनररय करतके समय न्यद्वायद्वालय कशो आरशोप ककी प्रकक वत और गसंभक्षीरतद्वा, अवभयनुक कद्वा पपूविरविकत, अवभयनुक कके न्यद्वाय सके भद्वागनके ककी ससंभद्वाविनद्वा पर वविचद्वार करनद्वा चद्वावहए तरद्वा न्यद्वायद्वालय कशो अवभयनुक कके वविरुद्ध उपलब्धि ससंपपूरर सद्वामग्रिक्षी कद्वा सद्वाविधिद्वानक्षीपपूविरक मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए तरद्वा अवभयनुक ककी सटक्षीक भपूवमकद्वा कशो भक्षी ध्यद्वान मम रखनद्वा चद्वावहए। 7. वितरमद्वान मद्वामलके मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिक्षी वविधधि कके स्रद्वावपत धसद्धद्वासंतक्तों कशो ध्यद्वान मम रखतके हहए और पककद्वारक्तों कके वविदद्वान अधधिविकद्वाओसं कके करनक्तों , आरशोपक्तों ककी प्रकक वत , आविकेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलके कके सभक्षी तथ्यक्तों एविसं पररणस्रवतयक्तों कशो ध्यद्वान मम रखतके हहए चपूसंवक आविकेदक कके वविरुद्ध एन.बक्षी.ण्डिब्ल्यपू. ककी कद्वायरविद्वाहक्षी ककी जद्वा चनुककी हमै, उसकके बद्वाविजपूद आविकेदक आत्मसमपरर नहहीं कर रहद्वा हमै, न हक्षी वविविकेचनद्वा मम सहयशोग कर रहद्वा हमै , अतनः मद्वामलके कके गनुर -दशोष पर वबनद्वा कशोई वविचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आविकेदन पत स्विक्षीकद्वार वकए जद्वानके यशोग्य नहहीं हमै , तद्ननुसद्वार आविकेदक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आविकेदन पत अस्विक्षीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हमै। 8. उपरशोकद्वाननुसद्वार विद्वाद कके गनुर-दशोष पर वटप्परक्षी वकयके बगमैर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाररनद्वापत वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हमै। 9. इस विद्वाद मम यवद कशोई असंतररम आदकेश हशो, तशो विह स्वितनः समद्वाप्त समझद्वा जद्वाए। 10. आविकेदक वनयवमत जमद्वानत प्रद्वाररनद्वापत दद्वाधखल करनके हकेतनु स्वितसंत हमै। Order Date :- 3.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad