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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 69200 (ALL)

SAWAN KUMAR JAISWAL v. STATE OF U.P.

BAIL/22802/2025 · 2025-09-22

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22802 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 07 /2025 अन्तगर्त धारा 191(2), 318(4), 338, 319(2), 336(3), 340(2), 329(3), 351(2), 351(3), 61(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना बारादरी, िजला बरेली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा प्रितशपथ-पत्र, िदनांिकत 22.09.2025 दािखल िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। प्रथम सूचना िरपोटर् में आवेदक के िवरूद्ध िविशष्ट भूिमका विणत नहीं है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक प्रथम सूचना िरपोटर् के अनुसार आवेदक को िशकायतकतार् के िनमार्ण कायर् में हस्तक्षेप करने का दाियत्व सौंपा गया है, जबिक न्यायालय पहले ही िनषेधाज्ञा जारी कर चुका है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है िक आवेदक ने न तो कोई िवक्रय िवलेख िनष्पािदत िकया है और न ही वह किथत िवक्रय िवलेख में गवाह के रूप में उपिस्थत हुआ है। आगे यह भी प्रस्तुत िकया गया िक आवेदक एक सरकारी कमर्चारी है, िजसका खसरा संख्या 259, क्षेत्रफल 250.83 वगर् मीटर, में शािमल भूिम से कोई संबंध नहीं है। उक्त भूखंड िशकायतकतार् द्वारा उसके स्वामी से खरीदा गया था और उक्त िवक्रय िवलेख से संबंिधत एक दीवानी वाद, दीवानी न्यायालय में चल रहा है, अतः न तो आवेदक ने कोई जाली दस्तावेज प्रस्तुत िकया है और न ही उसका इससे कोई संबंध है। इसके अितिरक्त, आवेदक को उस क्षेत्र Versus Counsel for Applicant(s) : Archana Singh, Satya Prakash Rai, Yogesh Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sawan Kumar Jaiswal .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) के लेखपाल के रूप में कभी भी िनयुक्त नहीं िकया गया, जहाँ संबंिधत भूिम िस्थत है। सह-अिभयुक्त अिमत और सिचन को अवर अदालत द्वारा पहले ही जमानत पर िरहा िकया जा चुका है। आगे यह भी प्रस्तुत िकया गया िक असीम हुसैन ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है िक छोटे लाल गंगवार नामक व्यिक्त द्वारा वषर् 1988 में इतवारी लाल के पक्ष में एक पावर ऑफ अटॉनीर् िनष्पािदत की गई थी। हालाँिक, इतवारी लाल की मृत्यु वषर् 1991 में हो गई थी, और उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नगर िनगम, बरेली द्वारा िविधवत जारी िकया गया था। इसिलए, यह सम्मानपूवर्क प्रस्तुत िकया जाता है िक िदनांक 09.07.1992 और िफर िदनांक 26.05.2012 को की गई भूिम की कोई भी िबक्री पूरी तरह से अवैध, शून्य और अमान्य है, क्योंिक इतवारी लाल की मृत्यु के साथ पावर ऑफ अटॉनीर् स्वतः ही समाप्त हो गई। इस माननीय न्यायालय के िवचाराथर्, स्वगीर्य इतवारी लाल के मृत्यु प्रमाण पत्र की एक फोटोकॉपी इस हलफनामे के साथ संलग्न है। आवेदक के आपरािधक इितहास का वणर्न आवेदन पत्र के प्रस्तर 17 में िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक प्रश्नगत प्रकरण में पूणर्तः िदवानी प्रकृ ित का है। सूचनाकतार् ने माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा िनधार्िरत िविध के िवरुद्ध प्राथिमकी दजर् कराकर दीवानी िववाद को अवैध रूप से आपरािधक मामले में बदल िदया। इसिलए, आवेदक जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है । इसिलए, अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। BAIL No. 22802 of 2025 2 आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 23, 2025 CP.sahani BAIL No. 22802 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad