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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 69065 (ALL)
MOHD SAHABUDDIN ALIAS SAHABUDDIN MOHD KHAN v. STATE OF U.P.
BAIL/22437/2025 · 2025-07-20
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 69065 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:118417 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22437 of 2025 Applicant :- Mohd Sahabuddin Alias Sahabuddin Mohd Khan Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Jitendra Singh,Vipin Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Mohd Sahabuddin Alias Sahabuddin Mohd Khan ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 177/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बली भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा हरपसुर बसुदहट, धजलद्वा रकोरखपसुर मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक प्रद्वाथवमककी मम नद्वामजद अवभयसुक नहहीं हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररपकोटर अवत - ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा वकसली भली प्रकद्वार कद्वा फजर्जीवद्वाडद्वा नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , न हली ककोई कझू टरवचत दस्तद्वाववेज तहैयद्वार वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक वतरमद्वान वद्वाद मम न तको कवे तद्वा हहै , न ववकवे तद्वा हहै, न हली रवद्वाह हहै। उक वद्वाद मम अन्य सह-अवभयसुक महवेश कसु मद्वार रगौंड ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 1664/2025, आदवेश वदनद्वावंवकत 02.04.2025 कको स्वलीकक त हको चसुककी हहै। आववेदक ककी वकसली भली जमलीन कवे कय-ववकय मम ककोई भझूवमकद्वा नहहीं हहै। उसवे उपरकोक आरद्वाजली कवे बहैनद्वामम ककी ककोई जद्वानकद्वारली नहहीं हहै। कवे तद्वा धजसकवे दद्वारद्वा वद्वादली ककी जमलीन खरलीदली रयली हहै , ककी जमद्वानत हको चसुककी हहै। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवकयद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 31.05.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय।
4.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अतनः वद्वाद कवे रसुर -दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पलीवडतद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 21.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad