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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22058 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीिक्षत। पिरवादी की तरफ से कोई उपिस्थत नहीं हैं।
2. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 399/2021, अंतगर्त धारा 147, 148, 149, 323, 307, 302, 504, 506 भा.दं.सं., थाना मेजा, िजला इलाहाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 4.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। प्राथिमकी में आवेदक सिहत 8 लोगों को नािमत िकया गया है। आवेदक को प्रश्नगत किथत घटना में सामान्य भूिमका सौंपी गई है और आवेदक को कोई िविशष्ट हिथयार नहीं सौंपा गया है। िववेचक ने आवेदक को अन्य सह-अिभयुक्त राहुल ितवारी के साथ िदनांक 24.08.2021 को िगरफ्तार िकया और आवेदक की संयुक्त िनशानदेही पर दो डंडों की झूठी बरामदगी िदखाई। उक्त बरामदगी का तथा घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। यह उल्लेिखत तथ्य है िक आवेदक पक्ष की पूनम ितवारी भी उक्त घटना में घायल हुई हैं। आवेदक को गाँव की चुनावी रंिजश की वजह से वतर्मान वाद में िमथ्यारोिपत िकया गया है। आवेदक की िनशानदेही पर कोई भी हिथयार बरामद नहीं हुआ है, एक डंडे की बरामदगी दिशत की गयी है, जो झूठी है। आवेदक के िवरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो वतर्मान मामले में उसकी संिलप्तता की पुिष्ट कर सके । िवचारण के दौरान अिभयोजन पक्ष के गवाहों अथार्त् जय शंकर ितवारी (सूचनाकतार्) को पी.डब्लू.1 के रूप में और संदीप ितवारी (घायल) को भी पी.डब्लू.2 के रूप में परीिक्षत िकया गया है, डॉ.
सूयर्भान को पी.डब्लू.4 के रूप में परीिक्षत िकया गया है, िजसमें उन्होंने परीक्षण Versus Counsel for Applicant(s) : Abdul Zarrar Khan, Deepak Singh Patel, Mohd.Sartaz Ahmad Siddiqui Counsel for Opposite Party(s) : Vijaya Pratap Singh, G.A. Lal Chandra Tiwari .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
न्यायालय के समक्ष िवरोधाभासी बयान िदए हैं। पी.डब्ल्यू.-2 ने सत्र परीक्षण के दौरान सह- अिभयुक्त शिशकान्त ितवारी के िवरुद्ध िविशष्ट कथन िकया है िक "शिशकान्त ितवारी हाथ में धारदार कटवासा िलये हुए ललकारते हुए िक मार दो, यह कहकर मारने लगे” उक्त कथन से यह भी स्पष्ट है िक सह-अिभयुक्त शिशकान्त ितवारी की धारदार हिथयार से हमला करने की भूिमका विणत की है। (ख) आवेदक न तो किथत घटना के समय मौजूद था और न ही उसने मृतक की हत्या की है और न ही आवेदक के कब्जे से कोई आपित्तजनक वस्तु बरामद हुई है। मात्र संदेह के आधार पर सूचनाकतार् द्वारा आवेदक के िवरुद्ध पूरी अिभयोजन कहानी थोपी गई है तथा रंिजश के कारण आवेदक के िवरुद्ध वतर्मान झूठी प्राथिमकी दजर् की गई है। पोस्टमाटर्म िरपोटर् से एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से भी अिभयोजन कथानक का समथर्न नहीं हो रहा है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। वतर्मान वाद में अन्य सह-अिभयुक्तगण गुलाब चंद्र ितवारी, उमा कांत ितवारी, अजय ितवारी, शिशकांत ितवारी और राहुल ितवारी को जमानत, जमानत प्राथर्नापत्र सं०1836/2022, 24683/2023, 11943/2024, 21367/2024 और 43896/2024 में अन्य न्यायपीठों द्वारा िभन्न-िभन्न ितिथ को स्वीकृ त की जा चुकी है। सह- अिभयुक्तों से समान भूिमका के आधार पर भी आवेदक जमानत प्राप्त करने का अिधकारी है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 24.08.2021 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। BAIL No. 22058 of 2025 2
iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 17, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 22058 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad