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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 22494 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 08/2025 अन्तगर्त धारा 191(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 329(3), 351(2), 351(3), 61(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना बारादरी, िजला बरेली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा प्रितशपथ-पत्र, िदनांिकत 22.09.2025 दािखल िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।
4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रत्युत्तरशपथ-पत्र दािखल िकया गया, इसे पत्तावली पर रखा जाय।
5.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। प्रथम सूचना िरपोटर् में आवेदक के िवरूद्ध िविशष्ट भूिमका विणत नहीं है। इस मामलें में प्रासंिगक तथ्य यह भी है प्रथम सूचना िरपोटर् के अनुसार भी िवक्रय-पत्र सह-अिभयुक्त रेणु द्वारा िनष्पािदत िकया गया था और जहाँ तक आवेदक का संबंध है, न तो उसने कोई िवक्रय-पत्र िनष्पािदत िकया और न ही वह िवक्रय-पत्र के गवाह के रूप में उपिस्थत हुआ, इसिलए आवेदक के िवरुद्ध कोई किथत अपराध नहीं बनता। इसिलए, सूचनाकतार् के पास िवक्रय-पत्र को रद्द करने के िलए दीवानी वाद दायर करने का िवकल्प था, लेिकन िशकायतकतार् ने ही आवेदक के ऊपर िमथ्या आक्षेप आरोिपत दीवानी िववाद को आपरािधक मामलें में पिरवितत कर िदया गया है, जो कानून के तहत स्वीकायर् नहीं है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक Versus Counsel for Applicant(s) : Archana Singh, Satya Prakash Rai, Yogesh Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sawan Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
एक सरकारी कमर्चारी है, िजसका सूचनाकतार् की भूिम और उसके स्वामी के बीच कोई संबंध नहीं है और उपरोक्त िवक्रय-पत्र से संबंिधत एक दीवानी वाद, दीवानी न्यायालय में चल रहा है। इसिलए, न तो आवेदक ने कोई जाली दस्तावेज तैयार िकया है और न ही उसका इससे कोई संबंध है। इसके अलावा, आवेदक को उस क्षेत्र के लेखपाल के रूप में कभी भी तैनात नहीं िकया गया जहाँ संबंिधत भूिम िस्थत है। सह-अिभयुक्त रेनू, िजसने िवक्रय-पत्र िनष्पािदत िकया था, को अपर िजला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या 12, बरेली द्वारा पहले ही जमानत पर िरहा िकया जा चुका है। आवेदक के आपरािधक इितहास का वणर्न आवेदन पत्र के प्रस्तर 20 में िकया गया है। इसिलए, आवेदक जमानत पर मुक्त िकये जाने योग्य है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
6.
िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है । इसिलए, अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
7. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
8. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. BAIL No. 22494 of 2025 2
आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 9. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 23, 2025 CP.sahani BAIL No. 22494 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad