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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 21491 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 167/2023 अन्तगर्त धारा 420, 406, 409, 120बी भारतीय दण्ड संिहता, थाना नगीना, िजला िबजनौर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता श्रीमती स्वाती अग्रवाल श्रीवास्तव एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है। प्रश्नगत प्रकरण में प्रासंिगक तथ्य यह है िक किथत घटना िदनांक 16.12.2021 का बताया गया है, िकतु इस घटना के संबंध में सूचनाकतार् ने 17.08.2022 को संबंिधत न्यायालय के समक्ष धारा 156 (3) दं०प्र०सं० के तहत एक आवेदन प्रस्तुत िकया था, लेिकन िवद्वान न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 09.09.2022 के तहत सूचनाकतार् की अनुपिस्थित के कारण इसे खािरज कर िदया, तदोपरांत पुनः धारा 156(3) दं०प्र०सं० के तहत िदनांक 21.09.2022 को संबंिधत न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत िकया, िजस न्यायालय ने अपने आदेश िदनांक 19.04.2023 के द्वारा उसे स्वीकार कर िलया गया। यहाँ यह उल्लेख करना महत्वपूणर् है िक यह सूचनाकतार् का अपना प्रस्तुतीकरण है िक उसने गोल्ड िबिस्कट को रखकर अिभयुक्त से एक लाख रुपये का ऋण िलया था, लेिकन उसके द्वारा यह नहीं बताया िक उपरोक्त रािश यानी एक लाख रुपये सूचनाकतार् को िकस खाते में प्राप्त हुए हैं, चाहे वह नकद में था या िकसी बैंक खाते से था और इतना ही नहीं, भले ही किथत अिभयोजन पक्ष का बयान सही हो, उस िस्थित में सूचनाकतार् ने यह नहीं बताया है िक यद्यिप उन्होंने पूरी ऋण रािश यानी एक लाख रुपये कं पनी को जमा या वापस कर िदए थे, इसके बावजूद कं पनी ने सूचनाकतार् को उनके सोने के िबिस्कट वापस नहीं िकए। पुनः यहाँ यह प्रस्तुत करना महत्वपूणर् है िक अिभयोजन पक्ष के अनुसार, किथत ऋण Versus Counsel for Applicant(s) : Swati Agrawal Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Faizan Alias Faiji .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) कं पनी द्वारा सूचनाकतार् को िदनांक 16.12.2021 को िदया गया था, लेिकन अिभयोजन पक्ष की पासबुक में िदनांक 08.04.2021 के बाद की प्रिविष्ट है तथा किथत ऋण अनुबंध पर आवेदक का हस्ताक्षर भी नहीं है, के वल सूचनकतार् के हस्ताक्षर है, जबिक िकसी भी अनुबंध पर उभय पक्ष के हस्ताक्षर होना आवश्यक है। इससे यह अनुबंध प्रमाण पत्र भी कृ टरिचत पिरलिक्षत हो रहा है। उपरोक्त तथ्यों से आवेदक के िवरूद्ध कोई भी प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। आवेदक के आपरािधक इितहास का वणर्न आवेदन पत्र के प्रस्तर-11 में िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध
कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 07.05.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा उसका इसी प्रकृ ित के अपराधों का आपरािधक इितहास, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4.
BAIL No. 21491 of 2025 2
आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 1, 2025 CP.sahani BAIL No. 21491 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad