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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 67549 (ALL)

NEERAJ KUMAR v. State of U.P.

BAIL/21520/2024 · 2025-10-05

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 21520 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक नीरज कु मार की ओर से मु०अ०स० 287/2022, अन्तगर्त धारा 406/ 420/ 467/ 468/ 471/ 504/ 506 भा.दं.सं., थाना कोतवाली सादाबाद, िजला हाथरस में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा, पिरवादी के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक के आदेश पर िजन मिहलाओं को कजर् िदया जाता था, उसकी मािसक िकश्तें अपने उच्चािधकािरयों के आदेश पर अपनी ़्ान्च में देता था, जो उसकी नैितक िजम्मेदारी थी और खुलवाने व दस्तावेज लेने व उनके सत्यापन करने व के ०वाई०सी० एवं खाताधारकों या पा्ऴ ्िि्वयों के खातों का पूणर् सत्यापन की पूणर् सन्तुि्ि से जाव कर ़्ान्च मैनेजर व उनके उच्चािधकािरयों का कायर् था व खाताधारकों के खाते में कम्पनी के खातों से अन्य खातों में रूपया अन्तरण करने का कायर् भी ़्ान्च मैनेजर व उनके उच्चािधकािरयों का कायर् होता है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् के अनुसार उ्व कम्पनी मिहलाओं के स्वावलम्बन के िलए समूह के रूप में कजार् देने का कायर् करती है, उनके खाते में जो धनरािश जानी थी, उ्व धनरािश को उनके खातों में न भेजकर अन्य खातों में ्िांसफर करा िदया, उपरो्व अिभयोजन कथानक में आवेदक का इंकार है, क्योंिक अगर उनके खाते से िकसी ्ऺकार का धोखाधडी करके कोई धनरािश िनकाली गयी होती तो वह वादी मुकदमा बनकर एफ०आई०आर० दजर् कराती, जबिक उपरो्व एफ०आई०आर० िकसी भी पीिड़ता खाताधारक के ्षारा दजर् नहीं करायी गयी है। जो भी एफ०आई०आर० दजर् करायी गयी है, वह कम्पनी से साज करके झूठी दजर् करायी गयी है। आवेदक साफ सुथरी छिव के साथ उ्व कम्पनी में िपछले पांच वषर् से कायर् कर रहा है तथा कहीं भी उसने अपनी छिव धूिमल नहीं की है। आवेदक का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। उ्व वाद िसिवल नेचर का है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस Versus Counsel for Applicant(s) : Manoj Kumar Patel, Pradeep Chauhan, Ranjana Gaur Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Indra Kumar Singh, Piyush Mishra Neeraj Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) ्ऺकरण में िद० 20.03.2024 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 5. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं उसी धनरािश के दो ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिध कािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 6, 2025 S.Mishra BAIL No. 21520 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad