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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 66478 (ALL)

RAKESH SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/20582/2025 · 2025-08-31

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 20582 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 74/2025, अंतगर्त धारा 115(2), 109, 351(3), 352, 324(4) बी.एन.एस., थाना हल्दी, िजला बिलया में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। उपरोक्त घटना में दोनों तरफ से चोटें कािरत की गयी हैं तथा आवेदक द्वारा भी सूचनाकतार् के िवरुद्ध प्राथिमकी दजर् करायी गयी है। अिभयोजन कथानक के अनुसार आवेदक पर कु ल्हाड़ी से चोट पहुंचाने का आरोप लगाया है, िजसमें कु ल्हाड़ी के हत्थे से सूचनाकतार् के हाथ पर चोटें आईं , जो िक सामान्य प्रकृ ित की हैं। सूचनाकतार् तथा अन्य चुटैलों िप्रयंका कु मारी और लूटन राजभर की िचिकत्सीय परीक्षण िरपोटर् के मात्र अवलोकन से उनके शरीर पर प्राप्त सभी चोटें सामान्य प्रकृ ित की पाई गई हैं और कोई भी चोट गंभीर प्रकृ ित की नहीं है तथा उक्त चोटों के संबंध में िचिकत्सीय परीक्षण आख्या भी अनुलग्नक सं० 2 के रूप में संलग्न है, िजसमें सभी चोटें साधारण प्रिकृ त की विणत की गयी हैं एवं िचिकत्सक की राय में भी सभी चोटें साधारण प्रकृ ित की हैं, जो िकसी कठोर एवं कुं द वस्तु से लगी हैं।चुटैल व्यिक्त तेज नारायण, िप्रयंका कु मारी और लूटन राजभर की चोट िरपोटर् के मात्र अवलोकन से आवेदक के िवरुद्ध भारतीय दंड संिहता की धारा 109 के अंतगर्त कोई अपराध नहीं बनता है। आवेदक द्वारा आज दािखल पूरक शपथपत्र के प्रस्तर सं० 2 के माध्यम से अपने पूवर् के आपरािधक इितहासों को स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह Versus Counsel for Applicant(s) : Kameshwar Singh, Sudhanshu Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : Awesh Kumar Bhardwaj, G.A. Rakesh Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) इस प्रकरण में िद० 28.04.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागम के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 1, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 20582 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad