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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 64384 (ALL)

SHYAMSUNDAR ALIAS SHYAM v. STATE OF U.P.

BAIL/18679/2025 · 2025-10-06

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 18679 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 49/2025, अन्तगर्त धारा 64, 351(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना बसई मोहम्मदपुर, िजला िफरोजाबाद में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. अिभयोजन कथानक सं्षेप में यह है िक ्ऺथम सूचनाकतार् के चाचा की लगभग 22 वषर्य पु्ऴी मडुवा माता मंिदर गई थी, जहां उसका भाई रवीं्श मंिदर के पीछे गया, जहां उसने पीिड़ता को झािड़यों से रोते हुए िनकलते देखा और उसके पीछे श्यामसुन्दर उफर् श्याम भी बाहर आ रहा था और जब उससे पूछा गया तो वह रोने लगी, उसने कु छ नहीं बताया और श्याम वहां से भाग गया। उसी िदन शाम को पीिड़ता ने अपनी मां को बताया िक आवेदक उसे बहला-फु सलाकर झािड़यों के पीछे ले गया और उसके साथ बलात्कार िकया और िपछले एक साल से आवेदक उसे एक वीिडयो के आधार पर ब्लैकमेल कर रहा था, जो उसने बनाया था और उसे जान से मारने और वीिडयो वायरल करने की धमकी दे रहा है और इसी कारण से पीिड़ता ने 1.4.2025 को सुबह 05.30 बजे ्िेन के आगे कू दकर आत्महत्या करने की कोिशश की, िजससे वह घायल हो गई, उसे एसएन मेिडकल कॉलेज ले जाया गया, जहां से उसे जीजी निसग होम रेफर कर िदया गया, इस बीच आवेदक के बड़े भाई नरें्श और नंद िकशोर ने उन्हें धमकी दी िक अगर उन्होंने कोई कानूनी कारर्वाई की तो वे जान से मार देंगे। 4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् िवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्प्िीकरण नहीं Versus Counsel for Applicant(s) : Rahul Pandey, Raj Kishor Mishra, Rakesh Kumar Verma, Rang Nath Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Shyamsundar Alias Shyam .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) िदया गया है। ्ऺथम सूचनाकतार् या उसके पिरवार के सदस्यों ने बलात्कार की घटना के बारे में कोई ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् नहीं कराई है, जो किथत तौर पर िदनांक 26.3.2025 को घिटत हुई थी। आवेदक पर किथत रूप से अिभयो्वा को ्ऺतािड़त करने का आरोप आ्षेिपत िकया गया है, क्योंिक अिभयो्वा ने िदनांक 1.4.2025 को ्िेन के सामने कू दकर आत्महत्या करने का ्ऺयास िकया, लेिकन कु छ चोटों के साथ बच गई, िजससे अिभयोजन प्ष की कहानी अत्यिधक संिदग्ध हो जाती है। आवेदक ्षारा किथत अपराध कािरत िकये जाने का कोई हेतुक नहीं है। आवेदक के िखलाफ आरोप झूठे और मनग़ांत हैं और आवेदक ने अिभयोजन प्ष की कहानी में आरोिपत ऐसा कोई अपराध नहीं िकया है। ्ऺथम सूचनाकतार् और अन्य गवाह ्ऺत्य्षदशर् नहीं हैं और उन्होंने घटना नहीं देखी है। यहां यह उल्लेख करना उिचत है िक बलात्कार की किथत घटना 26.3.2025 को घिटत हुई थी और किथत घटना/बलात्कार के बाद भी आत्महत्या के ्ऺयास की दुघर्टना की ितिथ अथार्त िदनांक 1.4.2025 तक अिभयो्वा के शरीर का कोई मेिडकल परी्षण नहीं िकया गया था, जो पूरे अिभयोजन मामले को झूठा सािबत करता है। आगे यह भी कहा गया िक इस मामले में अिभयो्वा का धारा 180/183 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के तहत बयान भी दजर् नहीं िकया गया है, िजससे आवेदक के ्षारा किथत अपराध िकये जाने की पिरपुि्ि हो सके । के वल संशय व अिभयोगी के अिभकथन के आधार पर आवेदक को इस मामलें में नािमत िकया गया है। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है िक "इस मामलें के किथत स्वतं्ऴ सा्षी रिवन््श कु मार ्षारा अपने बयान में िदनांक 26.03.2025 को मैंने देखा िक श्याम सुन्दर की पु्ऴी झािड़यों की तरफ से रोते हुए आती िदखाई दी। पीिड़ता के पीछे श्याम आ रहा था मैंने सुिम्ऴा से पूछा िक क्या हुआ तो वह रोने लगी और कु छ न बताया श्याम वहां से मुझे देखकर भाग गया" इसके अितिर्व आवेदक के िवरू्ध को िविश्ि भूिमका अिभकिथत नहीं की गयी। आवेदक को के वल पिरिस्थितजन्य साष्यों के आधार पर इस मामलें में आिलप्त िकया गया है। आवेदक का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 05.04.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न BAIL No. 18679 of 2025 2 होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 7, 2025 CP.sahani BAIL No. 18679 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad