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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 63513 (ALL)

SMT GUDIYA AND 3 OTHERS v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

ABAIL/13554/2023 · 2025-09-16

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 13554 of 2023 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदकगण श्रीमती गुिड़या, माया देवी, पूनम व आिशकी की ओर से पिरवाद सं० 913/2021 अन्तगर्त धारा 395, 323 भारतीय दण्ड संिहता, थाना ितवार्, िजला कन्नौज में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदकगण को जमानत पर िरहा िकया जा सके । 2. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रत्युत्तरशपथ पत्र दािखल िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. आवेदकगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उनके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। प्रश्नगत प्रकरण में अिभयुक्तगण पर अनाज, पीतल के वतर्न, एक घण्टा व तीन लाख रूपये लूट कािरत करने का आक्षेप है, िकतु प्रासंिगक तथ्य यह है िक इस मामलें में पिरवादी के धारा 200 दं०प्र०सं० एवं पिरवादी की ओर से प्रस्तुत साक्षीगण के धारा 202 दं०प्र०सं० के बयान के आधार पर उक्त धाराओं में संज्ञान लेते हुए संबंिधत न्यायालय द्वारा आवेदक को तलब िकया गया है, जो िविधनुकू ल पिरलिक्षत नहीं हो रहा है। आवेदक के िवरूद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी तकर् है िक आवेदकगण को इस मामले में अंतिरम आदेश प्रदत्त है। पुनः उनका कथन है िक आवेदकगण िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देते है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेंगे एवं आवेदकगण की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्तगण के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्तगण की भूिमका पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना Versus Counsel for Applicant(s) : Dileep Singh Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Smt Gudiya And 3 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) में उसकी भूिमका संभाव्य है। इसी आधार पर िवचारण न्यायालय द्वारा इसे पिरवाद के रूप में दजर् िकया गया है। इसिलए अिभयुक्तगण को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय। 6. यहां प्रासंिगक तथ्य है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए। 7. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है। 8. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है। 9. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदकगण की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत िवचारण न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो-दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेदकगण अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। ii) आवेदकगण अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेंगे। iii) आवेदकगण िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ पर उपिस्थत होंगे। iv) आवेदकगण उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेंगे, िजसका आरोप आवेदकगण पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेदकगण मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेंगे, िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी को तथ्य बताने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करें। 10. उपयुर्क्त िकसी भी शतर् के उल्लंघन की िस्थित में, िवचारण न्यायालय कानून के अनुसार आवेदकगण की जमानत रद्द करने के िलए स्वतंत्र होगा। (Dr. Gautam Chowdhary,J.) September 17, 2025 CP.sahani ABAIL No. 13554 of 2023 2 Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad