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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 6310 (CHH)

KRISHNA KUMAR RANGARE v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/184/2021 · 2025-08-07

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} 2025:CGHC:39684 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिर्णया सरति ति क-31/07/2025 तिर्णया उद्घो+ति, ति क-08/08/2025 ण्डि/0क अपु ल क्रमां क -184 /2021 1. क4 ष्र्ण क मांर र गर तिपु-क+06रमां र गर, उम्र-लगभग 56 वे,, तिवेस -लघाट, मांध्याप्रश, वेमां तिवेस -आईल@0 कAल+ , तिवेधा सभ, रयापुर, जिDल-रयापुर, छत्ती सगढ़ (चल क असर) । -----अपु लर्थीI तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार र्थी प्रभर , पुजिलस र्थी-मां कM म्पु, रयापुर, जिDल-रयापुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे अपु लर्थीI द्वार : सश्री फौRजिDया तिमांD, वेरिरष्ठ अजिधावेक्ता सतिV सश्री रण्डिWमां ट/0, अजिधावेक्ता । रज्या/उत्तीरवे द्वार : श्री मां सति मांतिकपुर , उपु शसकXया अजिधावेक्ता । मां या न्यायामां6ति श्री स Dया क मांर Dयासवेल , न्यायाधा श !! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. /0 प्रतिक्रया स तिV, 1973 कX धार-374 (2) क V प्रस् इस ण्डि/0क अपु ल मां_ तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाधा श/तिद्वा या फौस्ट टaक तिवेश, न्यायालया, रयापुर, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.08 14:40:00 +0530 2 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} जिDल-रयापुर, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेश, आपुरजिधाक (पुAक्स+) प्रकरर्ण क्रमां क-83/2018 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो क4 ष्र्ण क मांर र गर” मां_ पुरिर तिर्णया ति क-25/01/2021 क+ चR गई VM । जिDसक V अपु लर्थीI क+ तिम्सर +,जिसद्ध कर ण्डि/0 तिकया गया VM । जिDस आग स पु मां_ “प्रWधा तिर्णया” स स +जिधा तिकया D रV VMf- +,जिसतिद्ध /0श धार-376(2)(झ) भर या /0 स तिV, 1860 [कजिर्थी घाट ण्डि/0क तिवेजिधा (स श+धा) अजिधातियामां, 2018 (स . 22/2018) कX प्रवे तिजिर्थी स पु6वे कX VM, अf उस समांया प्रभवेश ल तिवेजिधाक व्यावेस्र्थी क असर अपुरधा धार 376(2)(झ), भर या /0 स तिV, 1860 क अधा /0 या र्थी, और अतिभयाक्ता क+ उस प्रवेधा क अ ग +,जिसद्ध कर ण्डि/0 तिकया गया VM] 10 वे, क कठो+र करवेस एवे 5,000/- रूपुया क अर्थी/0 र्थी अर्थी/0 रतिश अ कर कX श मां_ 03 मांV क अतिरिरक्ता करवेस कX सD स ण्डि/0 तिकया गया । धार-376(2)(च) भर या /0 स तिV, 1860 [धार 376(2)(च), भ. .स . एवे धार 5(ढ) तिवेश, अजिधातियामां क अ ग क4 त्या धार-6 क अधा /0 या VM । अजिधातियामां कX धार-42 क असर, अजिधाक कठो+र /0 क प्रवेधा लग6 V+ VM; अf धार-376(2)(च) भ. .स . क अधा ण्डि/0 तिकया गया VM] 10 वे, क कठो+र करवेस एवे 10,000/-रूपुया क अर्थी/0 र्थी अर्थी/0 रतिश अ कर कX श मां_ 03 मांV क अतिरिरक्ता करवेस कX सD स ण्डि/0 तिकया गया । सभ मां6ल सDए सर्थी-सर्थी चल_ग । 3 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} 2. याV अतिवेवेति थ्या VM तिक मांमांल कX पु तिq (अ०स०-1) क अपु लर्थीI रिरW मां_ q तिपु VM । अपु लर्थीI क तिवेस स्र्थी आईल@0 कAल+ , तिवेधासभ, रयापुर, जिDल रयापुर, छत्ती सगढ़ र्थी । 3. अतिभया+D मांमांल, स पु मां_, इस प्रकर VM तिक पु तिq (अ०स०-1) कजिर्थी घाट क समांया क-9 वेs मां_ अध्यायार र्थी , D+ शसकXया प्र -मांMतिटaक अस6तिच Dति छत्रवेस, आर ग मां_ तिवेसर र्थी । पु तिq क+ उक्ता छत्रवेस मां_ ति क-13/03/2018 क+ फौ+ आ पुर वेV कर क पुWच तिगरकर V+श V+ गई । उस समांया कX छत्रवेस अधा तिक श्री मां आर शमां क+ पु तिq Dकर तिक पु6वे मां_ उसक q तिपु अर्थी अपु लर्थीI द्वार पुवेल क अवेकश मां_ उस छत्रवेस स घार ल D समांया या रDधा , रयापुर ल Dकर लत्कर तिकए र्थी । श्री मां आर शमां द्वार उक्ता Dकर वेरिरष्ठ अजिधाकरिरयाt क+ गई । त्पुWच पु तिq (अ०स०-1) कX जिलजिu तिशकया प्रश पु -1 क आधार पुर र्थी-मां क@ पु, जिDल-रयापुर मां_ ति क-16/ 03/2018 क+ अपुरधा क्रमां क-69/2018 क प्रर्थीमां स6च पुत्र प्रश पु -2 अ ग धार-376 भर या /0 स तिV एवे धार-4 वे 6 ल@तिगक अपुरधाt स लकt क स रर्ण अजिधातियामां, 2012 अपु लर्थीI क तिवेरूद्घो कयामां तिकया गया । 4. पु तिq कX जिलजिu तिशकया इस आशया कX र्थी तिक D वेV छत्रवेस मां_ र्थी , वे,-2016 क वेम्र मांV मां_, अर्थी रिरपु+ट स कर 0ढ वे, पु6वे, अपु लर्थीI उस मां+टरसयाकल मां_ घार लकर आ समांया या रDधा , रयापुर घा6मां रV और र मां_ एक स मांक मां_ ल Dकर ज़रस् उसक सर्थी लत्स ग तिकया । त्पुWच अपु घार ल गया और घाट तिकस क+ स मां तिकया । 6सर ति सV D उसक तिपु ल 4 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} आए और सर्थी मां_ उस Dगन्नार्थी गर ल गए, वेV अपु तिपु क+ घाट ई + वे क छ Vs +ल और तिफौर उसक तिपु भ र मां_ उसक सर्थी ज़रस् कई र ल@तिगक श+,र्ण तिकया । 5. उक्ता तिशकया क आधार पुर अपुरधा कयामां क पुWच पु तिq क तिचतिकत्स या पुर र्ण करया गया । उसक उम्र स धा स्वेD स कजिल तिकए गए । सतियाt क या जिलए गए । मांRक क्श Mयार तिकया गया । अपु लर्थीI क भ तिचतिकत्स या पुर र्ण करया गया । तिचतिकत्सक द्वार Mयार कर तिए गए आतिटकल्स क+ रसयातिक पुर र्ण V भD गया । अपु लर्थीI कX तिगरफ्र कX गई । स पु6र्ण तिवेवेच उपुर अतिभया+ग-पुत्र न्यायालया मां_ प्रस् तिकया गया । 6. अतिभया+D कX ओर स अपु पु समांर्थी मां_ 11 सतियाt क पुर र्ण र्थी 19 स्वेD प्रश तिचन्V तिक करवेया गया । धार-313 /0 प्रतिक्रया स तिV क V या मां_ अपु लर्थीI अपु तिवेपुर सतियाt क कर्थीt क+ इकर कर V{ए कV VM तिक वेV ति|, VM और उस झ6ठो फौ सया गया VM । जिDस चवे मां_ ठोक र सधा र जिललVर (०स०-1) क पुर र्ण करया । उभयापु क स Dकर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लर्थीI क+ इस तिर्णया कX कण्डि/0क-1 क असर +,जिसद्ध कर ण्डि/0 तिकया गया VM । जिDस इस अपु ल मां_ चR गई VM । 7. अपु लर्थीI पु क तिवेद्वा अजिधावेक्ता क क VM तिक चवे स क्रमां क-1, ठोक र सधा र जिललVर क कर्थी असर, अपु लर्थीI क मांक मां_ उस समांया तिमांर्ण कया चल रV र्थी, जिDस ठोक र पुर उक्ता स द्वार स पुति तिकया D रV र्थी । उक्ता मांक क एक भग मां_ अपु लर्थीI एवे पु तिq तिवेसर र्थी, Dतिक 6सर भग मां_ ठोक र र्थी उसक मांज़6र आति 5 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} रV र्थी । रतित्र लगभग 0ढ़ D अपु लर्थीI पु तिq क+ एक मांज़6र, ल, क सर्थी स तिग्धा अवेस्र्थी मां_ एक V तिस्र पुर u, जिDस पुर उक्ता मांज़6र क+ 0 ट गया और ठोक र सधा र भ त्कल वेV उपुण्डिस्र्थी V+ गया । इस घाट स पु तिq तिचढ़ गई । वेV छत्रवेस मां_ तिवेस Vs कर चV र्थी । 8. उक्ता करर्णवेश पु तिq द्वार अपु लर्थीI क तिवेरुद्ध झ6ठो तिशकया D करया गई, जिDसमां_ उस क वेल अपु लर्थीI V Vs, ण्डिल्क अपु स्वेया क तिपु क तिवेरुद्ध भ तिशकया D करया V@ । पु तिq कX मां• तिकस अन्या पुरु, क सर्थी रV रV VM र्थी अपु पुति क सर्थी Vs रV , जिDसस पुरिरवेरिरक पु4ष्ठभ6तिमां मां_ अस ल पुरिरलति V+ VM । स्वेया पु तिq क या मां_ ग भ र तिवेर+धाभस कX ण्डिस्र्थीति VM । 9. तिशकया ति क 16.03.2018 क+ D कX गई VM, Dतिक कजिर्थी घाट वे, 2016 कX V+ ई गई VM, जिDसस तिशकया मां_ लगभग 0ढ़ वे, क तिवेल VM । तिशकया मां_ घाट क समांया वे, 2016 या गया VM, वेVs न्यायालया कर्थीt मां_ पु तिq घाट वे, 2017 कX ई VM । इस प्रकर, तिशकया मां_ याV कV गया VM तिक अपु लर्थीI पु तिq क+ मां+टरसयाकल स ल Dकर ष्कमां तिकया, Dतिक प्रतिपुर र्ण मां_ पु तिq स्वेया कV VM तिक वेV स स ल Dई गई र्थी । इस प्रकर स ग भ र तिवेर+धाभस क करर्ण पु तिq स V स पुर तिवेWवेस या स Vs VM । 10. तिचतिकत्सक D ०स ० सरकर (अ०स०-2) अपु लर्थीI क तिचतिकत्स या पुर र्ण कर प्रतिवे प्रश पु -7 तिया VM, जिDसमां_ याV उल्लेजिu VM तिक अपु लर्थीI शर रिरक स भ+ग कर मां_ समां Vs VM । इस प्रकर, पु तिq क या क समांर्थी उसकX तिचतिकत्स या पुर र्ण प्रतिवे और एफौ०एस०एल प्रतिवे स Vs V+ VM । पु तिq क या पु6र्णf 6 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} स Vस्पु VM । अपु लर्थीI क+ झ6ठो फौ स गया VM । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार सक्ष्या कX उतिच रूपु स समां कर V{ए अपु लर्थीI क+ त्रतिटपु6वेक +,जिसद्ध कर ण्डि/0 तिकया गया VM । अपु लर्थीI कX +,जिसतिद्ध स V स पुर स्पुष्ट, पुयाप्त और तिवेWवेस या सक्ष्या पुर आधारिर Vs VM । “प्रWधा तिर्णया” ण्डिस्र्थीर रu D या+ग्या Vs VM । अf अपु ल स्वे कर कर उस +,मांक्ता तिकया Dए । तिवेद्वा अजिधावेक्ता द्वार अपु क क समांर्थी मां_ तिम्सर न्यायादृष्ट t क Vवेल तिया गया VMf- .i Pandurang Sitaram Bhagwat v. State of Maharashtra, (2005) 9 SCC 44. ii. Radhu v. State of Madhya Pradesh, (2007) 12 SCC 57. iii. Krishna Kumar Malik v. State of Haryana, (2011) 7 SCC 130. iv. Rai Sandeep alias Deepu v. State (NCT of Delhi), (2012) 8 SCC 21. 11. उत्तीरवे /शस पु कX ओर स उपुण्डिस्र्थी तिवेद्वा अजिधावेक्ता इस अपु ल क तिवेर+धा कर V{ए क तिकया VM तिक अतिभया+D सतियाt पु6र्ण रूपु स अतिभया+D मांमांल क समांर्थी तिकया VM जिDपुर अतिवेWवेस तिकया D क क+ई करर्ण Vs VM । तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रWधा तिर्णया” सक्ष्या कX उतिच समां पुर आधारिर VM । अतिभया+D अपु लर्थीI क तिवेरूद्घो अपु मांमांल स V स पुर प्रमांतिर्ण तिकया VM । अपु लर्थीI पु द्वार अपु ल मां_ उठोया गया क स्वे कर या+ग्या Vs VM । अf अपु ल uरिरD तिकया Dया । 12. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलu क स6क्ष्मांपु6वेक पुरिरश ल तिकया गया । 13. उभयापु कX ओर स प्रस् सक्ष्या क पुरिरश ल स याV स्पुष्ट V+ VM तिक अपु लर्थीI पु द्वार इस थ्या क u/0 Vs तिकया गया VM तिक कजिर्थी घाट, D+ वेम्र, 2016 कX कV गई VM, उस समांया पु तिq कX उम्र 18 वे, स कमां र्थी । इस प्रकर, पु तिq कX उम्र क+ चR Vs गई VM । 7 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} 14. प्रस् सक्ष्या स याV ण्डिस्र्थीति भ स्पुष्ट VM तिक पु तिq (अ०स०-1) कजिर्थी घाट क समांया छत्रवेस मां_ तिवेसर र्थी । उसक मां-तिपु अलग V+ चक V@, और उसकX मां• तिकस अन्या पुरु, क सर्थी रV VM । मां• कX क ल चर स V@, जिDन्V_ वेV छ+qकर चल गया VM । याV भ उल्लेu या VM तिक जिलजिu तिशकया मां_ घाट वेम्र 2016 कX ई गई VM, D+ पुजिलस मां_ ति क 16.03.2018 क+ गई, जिDसक आधार पुर अपुरधा D तिकया गया । इस प्रकर, पु तिq द्वार कजिर्थी घाट कX तिशकया मां_ लगभग 0ढ़ वे, क तिवेल V{आ VM । उपुर+क्ता अवेस्र्थी मां_, पु तिq (अ०स०-1) क या क स6क्ष्मांपु6वेक समां कर स पु6वे अन्या उपुलब्धा सक्ष्या क समांतिच मां6ल्या क तिकया D आवेWयाक V+ग । 15. अन्या सक्ष्याt मां_ तिवेश, रूपु स पु तिq कX मां• (अ०स०-9) क कर्थी उल्लेu या VM, जिDसक असर D अपु लर्थीI क पुरिरDt उसस तिवे तिकया तिक अपु लर्थीI Dल मां_ VM और वेV अपु पुत्र स तिमांलकर ण्डिस्र्थीति स्पुष्ट कर, वेV रयापुर ण्डिस्र्थी सu स_टर Dकर पु तिq स तिमांल , DV• पुर पु तिq उस घाट क स धा मां_ या । उक्ता घाटक्रमां क आधार पुर मां• (अ०स०-9) पु तिq क कर्थीt कX पुतिष्ट कX VM । तिक प्रतिपुर र्ण मां_ उक्ता स याV स्वे कर तिकया VM तिक D वेV छत्रवेस मां_ पु तिq स तिमांल D र्थी , + पु तिq छत्रवेस मां_ Vs रV चV र्थी र्थी उसस सर्थी ल चल क+ कV र्थी । सक्ष्या कX कण्डि/0क-7 मां_ कV VM तिक उसक च्च कV• पुढ़ रV V@, इसकX Dकर उस Vs र्थी । याV स प्रतिपुर र्ण मां_ याV भ कV VM तिक उसक मांयाक वेल अपु लर्थीI क+ Dल मां_ V रu चV V@ । इस प्रकर स, पु तिq और उसकX मां• (अ०स०-9) र्थी अपु लर्थीI क च क्या व्यावेVर और स धा रV याV ण्डिस्र्थीति स्पुष्ट V+ VM । याV भ स्पुष्ट V+ VM तिक D मां• छत्रवेस मां_ पु तिq स तिमांल र्थी , कभ भ पु तिq उसक समां ऐस तिकस घाट क उल्लेu Vs तिकया र्थी । 8 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} 16. A. No.-184 of 2021} 16. 6सर मांVत्वेपु6र्ण स छत्रवेस कX अधा तिक श्री मां आर शमां (अ०स०-7) V@, DV• कजिर्थी घाट क समांया पु तिq तिवेसर र्थी । श्री मां शमां अपु कर्थी मां_ कV VM तिक वेV जिसम्र 2017 स उक्ता छत्रवेस मां_ पुस्र्थी V@ । Dतिक घाट वेम्र 2016 कX ई गई VM । जिDसस याV स्पुष्ट V+ VM तिक कजिर्थी घाट क समांया श्री मां शमां उस छत्रवेस कX अधा तिक Vs र्थीs । श्री मां आर शमां कV VM तिक V+ल क अवेसर पुर ति क 13.03.2018 क+ पु तिq अपु घार D स मां कर तिया र्थी । उस ति पु तिq क तिपु क फौ+ आया, जिDस पुर कर क पुWच पु तिq V+श V+कर तिगर गई । अगल ति D अधा तिक पु तिq स पु6छछ कX, वेV र+ V{ए लग तिक उसक तिपु तिवेग 0ढ़ वे, स उसक सर्थी लत्कर कर आ रV V@ और उस तिकस क+ स मां तिकए V@ । सर्थी V , पु तिq याV भ या तिक पुवेल कX छ ति‡याt मां_ अपु लर्थीI, D+ उसक q तिपु V@, उस छत्रवेस स घार ल D समांया रयापुर क या रDधा त्र मां_ उसक सर्थी लत्कर तिकए र्थी । उक्ता Dकर अधा तिक द्वार वेरिरष्ठ अजिधाकरिरयाt क+ गई, जिDसक पुWच मांमांल D तिकया गया । उल्लेu या VM तिक पु तिq क कर्थी क आधार पुर उसक तिपु क तिवेरुद्ध रयापुर क सरस्वे गर र्थी मां_ पु4र्थीक आपुरजिधाक प्रकरर्ण D तिकया गया VM, जिDसकX समां इस अपु ल मां_ Vs कX D रV VM । 17. श्री मां आर शमां क कर्थीt स याV भ स्पुष्ट V+ VM तिक वेम्र 2016 कX कजिर्थी घाट क समांया वेV छत्रवेस मां_ पुस्र्थी Vs र्थीs । सर्थी V , स याV भ या तिक फौ+ पुर तिपु द्वार 0 ट क करर्ण पु तिq V+श V+ गई र्थी । याV स , पु तिq कX मां• (अ०स०-9) क कर्थीt स तिवेपुर याV कV VM तिक पु तिq स तिमांल उसक तिपु और भई आ र्थी, पुर उसकX मां• कभ Vs आया । इस प्रकर याV थ्या भ स्पुष्ट V+ VM तिक 9 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} श्री मां आर शमां क कयाभर ग्रVर्ण कर क पुWच पु तिq स तिमांल V उसकX मां• कभ छत्रवेस Vs आया । 18. अपु लर्थीI पु क क असर, तिचतिकत्सक 0A. D ०स ० सरकर (अ०स०-2) द्वार अपु लर्थीI क पुर र्ण ति क 17.03.2018 क+, अर्थी अपुरधा D V+ क पुWच, तिकया गया र्थी पुर र्ण प्रतिवे प्रश पु -7 क रूपु मां_ प्रस् तिकया गया । उक्ता प्रतिवे क असर, अपु लर्थीI कX आया लगभग 56 वे, र्थी और पुर र्ण क Rर याV पुया गया तिक उसक D ग (प्रइवेट पुट) मां_ उत्तीD कX ण्डिस्र्थीति तिवेद्यमां Vs र्थी । प्रतिपुर र्ण मां_ उक्ता तिचतिकत्सक याV स्पुष्ट तिकया VM तिक याR-स धा (स भ+ग) कX तिक्रया क जिलए तिकस भ पुरु, क D ग मां_ उत्तीD कX ण्डिस्र्थीति आवेWयाक V+ VM, याति प्रयास कर क उपुर भ उत्तीD उत्पुन्ना Vs V+ VM, + वेV व्यातिक्ता स भ+ग कर मां_ समां Vs मां Dएग । इस प्रकर तिचतिकत्सक क मां असर अपु लर्थीI याR-स धा स्र्थीतिपु कर मां_ समां Vs र्थी । 19. पु तिq अपु प्रतिपुर र्ण क कण्डि/0क-13 मां_ याV स्वे कर तिकया VM तिक अपु लर्थीI क @गल+र मां_ हृया क + र ऑपुरश V{आ VM, उस मांधामांV (0यातिट D) VM, उसकX +t आ•ut मां_ मां+तियाति क ऑपुरश V+ चक VM, वेV शर रिरक रूपु स कमांD+र VM र्थी अक प्रकर कX वेइया तियातिमां रूपु स चल VM । ऐस श मां_, तिचतिकत्सक 0A. D .स . सरकर द्वार प्रश पु -7 क मांध्यामां स प्रस् पुर र्ण प्रतिवे, जिDसमां_ अपु लर्थीI क+ स भ+ग कर मां_ असमांर्थी या गया VM, उस समांर्थी प्रप्त V+ VM । 20. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार अतिभव्याक्ता तिकया गया VM तिक DV•, अतिभया+क्त्र V एक प्रमांu स V+ वेV• उसकX सक्ष्या कX समां स6क्ष्मांपु6वेक V+ चतिVए । इस स धा मां_, 10 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} मां या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट Raju and others v. State of Madhya Pradesh (2008) 15 SCC 133 कX कण्डि/0क-11 वे 12 मां_ तिम्वे अतिभव्यातिक्ता VMf- “11. It cannot be lost sight of that rape causes the greatest distress and humiliation to the victim but at the same time a false allegation of rape can cause equal distress, humiliation and damage to the accused as well. The accused must also be protected against the possibility of false implication, particularly where a large number of accused are involved. It must, further, be borne in mind that the broad principle is that an injured witness was present at the time when the incident happened and that ordinarily such a witness would not tell a lie as to the actual assailants, but there is no presumption or any basis for assuming that the statement of such a witness is always correct or without any embellishment or exaggeration. 12. Reference has been made in Gurmit Singh case [(1996) 2 SCC 384 : 1996 SCC (Cri) 316] to the amendments in 1983 to Sections 375 and 376 of the India Penal Code making the penal provisions relating to rape more stringent, and also to Section 114-A of the Evidence Act with respect to a presumption to be raised with regard to allegations of consensual sex in a case of alleged rape. It is however significant that Sections 113-A and 113-B too were inserted in the Evidence Act by the same amendment by which certain presumptions in cases of abatement of suicide and dowry death have been raised against the accused. These two sections, thus, raise a clear presumption in favour of the prosecution but no similar presumption with respect to rape is visualised as the presumption under Section 114-A is extremely restricted in its applicability. This clearly shows that insofar as allegations of rape are concerned, the evidence of a prosecutrix must be examined as that of an injured witness whose presence at the spot is probable but it can never be presumed that her statement should, without exception, be taken as the gospel truth. Additionally, her statement can, at best, be adjudged on the principle that ordinarily no injured 11 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} witness would tell a lie or implicate a person falsely. We believe that it is under these principles that this case, and others such as this one, need to be examined.” 21. इस रV, मां या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट Rai Sandeep alias Deepu v. State (NCT of Delhi) (2012) 8 SCC 21 कX कण्डि/0क-22 मां_ तिम्वे अतिभव्यातिक्ता VMf- “22. In our considered opinion, the “sterling witness” should be of a very high quality and caliber whose version should, therefore, be unassailable. The Court considering the version of such witness should be in a position to accept it for its face value without any hesitation. To test the quality of such a witness, the status of the witness would be immaterial and what would be relevant is the truthfulness of the statement made by such a witness. What would be more relevant would be the consistency of the statement right from the starting point till the end, namely, at the time when the witness makes the initial statement and ultimately before the Court. It should be natural and consistent with the case of the prosecution qua the accused. There should not be any prevarication in the version of such a witness. The witness should be in a position to withstand the cross-examination of any length and howsoever strenuous it may be and under no circumstance should give room for any doubt as to the factum of the occurrence, the persons involved, as well as, the sequence of it. Such a version should have co-relation with each and every one of other supporting material such as the recoveries made, the weapons used, the manner of offence committed, the scientific evidence and the expert opinion. The said version should consistently match with the version of every other witness. It can even be stated that it should be akin to the test applied in the case of circumstantial evidence where there should not be any missing link in the chain of circumstances to hold the accused guilty of the offence alleged against him. Only if the version of such a witness qualifies the above test as well as all other similar such tests to be applied, it can be held that such a witness can be called as a “sterling witness” whose version can be accepted by the court without any corroboration and based on which the guilty can be punished. To 12 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} be more precise, the version of the said witness on the core spectrum of the crime should remain intact while all other attendant materials, namely, oral, documentary and material objects should match the said version in material particulars in order to enable the Court trying the offence to rely on the core version to sieve the other supporting materials for holding the offender guilty of the charge alleged.” 22. न्यायादृष्ट Santosh Prasad @ Santosh Kumar v. State of Bihar, (2020) 3 SCC 443 मां_ मां या उच्चमां न्यायालया द्वार अवेधारिर तिकया गया VM तिक लत्कर क अपुरधा मां_ एकमांत्र पु तिq क कर्थी पुर भ +,जिसतिद्ध कX D सक VM तिकन् याV V+ चतिVए D पु तिq क या तिवेWवेस पुM कर_ र्थी पु6र रV स तिवेWवेस या, ग और उत्क4 ष्ट गर्णवेत्ती क प्र V+ । जिDसक स धा मां_ कण्डि/0क-5.4.3, 5.5 एवे 6 मां_ तिम्सर अवेधारिर तिकया गया VM:- “5.4.3. In Krishan Kumar Malik v. State of Haryana (2011) 7 SCC 130 it is observed and held by this Court that no doubt, it is true that to hold an accused guilty for commission of an offence of rape, the solitary evidence of the prosecutrix is sufficient provided the same inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and should be of sterling quality. 5.5 With the aforesaid decisions in mind, it is required to be considered, whether is it safe to convict the accused solely on the solitary evidence of the prosecutrix? Whether the evidence of the prosecutrix inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and is of sterling quality?” 6. Having gone through and considered the deposition of the prosecutrix, we find that there are material contradictions. Not only there are material contradictions, but even the manner in which the alleged incident has taken place as per the version of the prosecutrix is not believable. In the examination- in-chief, the prosecutrix has stated that after jumping the fallen compound wall accused came inside and 13 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} thereafter the accused committed rape. She has stated that she identified the accused from the light of the mobile. However, no mobile is recovered. Even nothing is on record that there was a broken compound wall. She has further stated that in the morning at 10 O’clock she went to the police station and gave oral complaint. However, according to the investigating officer a written complaint was given. It is also required to be noted that even the FIR is registered at 4:00 p.m. In her deposition, the prosecutrix has referred to the name of Shanti Devi, PW1 and others. However, Shanti Devi has not supported the case of the prosecution. Therefore, when we tested the version of PW5-prosecutrix, it is unfortunate that the said witness has failed to pass any of the tests of “sterling witness”. There is a variation in her version about giving the complaint. There is a delay in the FIR. The medical report does not support the case of the prosecution. FSL report also does not support the case of the prosecution. As admitted, there was an enmity/dispute between both the parties with respect to land. The manner in which the occurrence is stated to have occurred is not believable. Therefore, in the facts and circumstances of the case, we find that the solitary version of the prosecutrix-PW5 cannot be taken as a gospel truth at face value and in the absence of any other supporting evidence, there is no scope to sustain the conviction and sentence imposed on the appellant and accused is to be given the benefit of doubt.” 23. उपुर+क्ता उपुर+क्ता न्यायादृष्ट t क प्रकश मां_ अ प्रमांu रूपु स पु तिq (अ०स०-1) क या क+ u D मांVत्वेपु6र्ण VM । 24. पु तिq (अ०स०-1) अपु न्यायालया कर्थी मां_ स्वेया द्वार गई जिलजिu तिशकया प्रश पु -1 कX पुतिष्ट कर V{ए याV कV VM तिक अपु लर्थीI उस ल आर ग ण्डिस्र्थी छत्रवेस पुV{•च र्थी, र्थी मां+टरसयाकल मां_ तिभर घामां क पुWच या रयापुर ण्डिस्र्थी मांक मां_ ल Dकर, उसक इकर क वेD6, उसक सर्थी ज़रस् लत्कर तिकया । त्पुWच, अगल सV D उसक तिपु उस सरस्वे गर ण्डिस्र्थी अपु घार ल गए, उसक तिपु 14 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} भ उसक सर्थी लत्कर तिकया और तिकस क+ स मां तिकया, जिDस करर्ण वेV भयावेश घाट तिकस क+ Vs या । पुWच मां_ D वेV छत्रवेस लRट + उसकX या तिगq गई, जिDसक चल उस छत्रवेस कX अधा तिक क+ उक्ता घाट क र मां_ या । अधा तिक र्थी अन्या ल+गt कX सVया स उस प्रश पु -1 क रूपु मां_ जिलजिu तिशकया प्रस् कX, जिDसक आधार पुर पुजिलस द्वार D च एवे अन्या क6 कयावेV कX गई । याV उल्लेu या VM तिक जिलजिu रिरपु+ट प्रश पु -1, प्रर्थीमां स6च रिरपु+ट प्रश पु -2 एवे धार 164 /0 प्रतिक्रया स तिV क अ ग D कर्थी प्रश पु -6 मां_ पु तिq अपु लर्थीI द्वार कX गई कजिर्थी घाट वेम्र 2016 कX V+ या VM, तिक न्यायालया मां_ अपु सक्ष्या मां_ उक्ता घाट क+ वे, 2017 कX या VM । याV तिभन्ना लगभग एक वे, कX VM, जिDस चवे पु द्वार एक ग भ र तिवेर+धाभस कX ण्डिस्र्थीति मां_ V+ कV गया VM । याV उल्लेu या VM तिक प्रश पु -1 (जिलजिu तिशकया) मां_ घाट कX तिजिर्थी स्पुष्ट रूपु स उल्लेजिu Vs VM, Dतिक धार 164 क अ ग D या प्रश पु -6 मां_ घाट कX तिजिर्थी 01 वेम्र 2016 क रूपु मां_ शई गई VM । इस प्रकर स, घाट तिकस वे, अर्थी वे,-2016 कX VM या वे,-2017 कX VM इस तिवे,या मां_ ग भ र तिवेर+धाभस कX ण्डिस्र्थीति VM । 25. याV भ उल्लेu या थ्या VM तिक जिलजिu तिशकया प्रश पु -1 मां_ स्पुष्ट रूपु स याV उल्लेu तिकया गया VM तिक अपु लर्थीI पु तिq क+ छत्रवेस स मां+टरसयाकल मां_ अपु सर्थी लकर गया र्थी । अतिभया+D क अन्या स्वेDt मां_ भ इस क उल्लेu तिकया गया VM तिक अपु लर्थीI पु तिq क+ मां+टरसयाकल मां_ तिठोकर अपु सर्थी ल गया । मांख्या पुर र्ण मां_ भ पु तिq इस कर्थी कX पुतिष्ट कX VM । तिकन् प्रतिपुर र्ण कX कण्डि/0क-11 मां_ पु तिq क कर्थी तिभन्ना VM, जिDसमां_ वेV कV VM तिक छत्रवेस स Vर तिकल क पुWच वे +t रयापुर D वेल स कX प्र कर रV र्थी, और र लगभग 08:00 D वे पुMल र+0 15 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} क गए, स क+ Vर्थी कर र+क और उसमां_ Mठोकर रयापुर स स्ट@0 पुV{•च, DV• भ+D कर क पुWच घार गए । पु तिq याV भ स्वे कर कर VM तिक अपु लर्थीI ति क 24 या 25 अक्ट6र क+ उस ल छत्रवेस आया र्थी, Dतिक तिशकया मां_ याV आर+पु VM तिक अपु लर्थीI वेम्र 2016 मां_ उस मां+टरसयाकल स ल Dकर लत्कर तिकया । इस प्रकर, पु तिq क कर्थीt मां_ सधा क+ लकर मां+टरसयाकल या स र्थी घाट कX तिजिर्थी क स धा मां_ ग भ र तिवेर+धाभस पुरिरलति V+ VM, D+ उसकX तिवेWवेस या पुर स V उत्पुन्ना कर VM । 26. अपु लर्थीI पु द्वार प्रस् क र्थी चवे स क कर्थीt क पुरिरप्रक्ष्या मां_ स्वेया पु तिq क न्यायालया कर्थी कX कण्डि/0क-14 अत्या मांVत्वेपु6र्ण VM, जिDसमां_ उस याV स्वे कर तिकया VM तिक पुवेल कX छ ति‡याt मां_ D वेV घार आई र्थी , रतित्र लगभग 0ढ़ D अपु लर्थीI उस, उसक तिस्र पुर एक लqक क Vर्थी पुकq V{ए u जिलया र्थी । अपु लर्थीI द्वार उस लqक क+ 0 टकर भग तिया गया, D+ या रयापुर कतिठोया क तिवेस र्थी । उस समांया उक घार मां_ तिमांर्ण कया चल रV र्थी र्थी मांज़6रt क आ-D V+ रV र्थी । पु तिq याV भ स्वे कर तिकया VM तिक उस स्वेया अपु लर्थीI स मां याच कX र्थी और रिरपु+ट कर क अर+धा तिकया र्थी । उस याV भ कV VM तिक वेV लqक उसस तिफौर कभ Vs तिमांल र्थी याV घाट लगभग + वे, पु6वे कX VM । उक्ता कर्थी स चवे स क उस कर्थी क+ ल तिमांल VM, जिDसक असर अपु लर्थीI रतित्र मां_ पु तिq क+ अपु घार मां_ एक मांज़6र यावेक क सर्थी स तिग्धा अवेस्र्थी मां_ पुया र्थी और +t क+ 0 ट र्थी । इस ण्डिस्र्थीति क+ दृतिष्टग रu V{ए अपु लर्थीI पु क इस क क+ Dर अ ज़ Vs तिकया D सक तिक उक्ता घाट स आV V+कर पु तिq अपु लर्थीI क तिवेरुद्ध भवेवेश प्रकरर्ण D करया । पु तिq प्रतिपुर र्ण कX कण्डि/0क-20 मां_ याV भ 16 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} स्वे कर तिकया VM तिक उस अधा तिक श्री मां आर शमां क कV पुर रिरपु+ट D करई र्थी । ऐस श मां_ पु तिq क कर्थी स तिग्धा V+ D VM । 27. पु तिq अपु प्रतिपुर र्ण मां_ याV स्वे कर तिकया VM तिक उसक तिपु क तिवेस स्र्थी Dगन्नार्थी गर, क+ट कAल+ , रयापुर VM, Dतिक उसकX मां•, जिDसक मां ‘स’ या गया VM, लघाट मां_ तिवेस कर VM । वेVs मां• (अ०स०-9) अपु मां ‘र’ या VM । इस प्रकर, पु तिq कX मां• क मां क+ लकर तिवेर+धाभस VM, जिDसस याV ण्डिस्र्थीति उत्पुन्ना V+ VM तिक वेस्वे मां_ पु तिq कX मां• कR VM—याV थ्या स Vस्पु VM । मां• (अ०स०- 9) र्थी स्वेया पु तिq क कर्थीt स याV थ्या भ स्पुष्ट V+ VM तिक पु तिq क क ल भई और एक V V@, और उकX मां• उन्V_ छ+qकर चल गई र्थी र्थी लघाट मां_ तिकस अन्या व्यातिक्ता '' क सर्थी वेMवेतिVक स धा कर रV रV VM, Dतिक पु तिq क मां-तिपु क च तिवेजिधाक रूपु स लक Vs V{आ VM । उक्ता पुरिरवेरिरक पु4ष्ठभ6तिमां स याV पुरिरलति V+ VM तिक पु तिq क पुरिरवेरिरक वेवेरर्ण अण्डिस्र्थीर एवे उपुति रV VM, र्थी उसक uरu कर वेल प्रक4 तिक स रकt (मां-तिपु) क आचरर्ण स्वेया मां_ स Vस्पु VM । याV थ्या भ मांVत्वेपु6र्ण VM तिक पु तिq, छत्रवेस मां_ तिवेसर र्थी , पुर वेV वेV• रV Vs चV र्थी । प्रतिपुर र्ण कX कण्डि/0क-15 मां_ उस याV स्वे कर तिकया VM तिक उसकX मां• उसस तिमांल कभ Vs आ र्थी , और वेV अपु मां• क पुस रV चV र्थी , तिक मां• क तिकस अन्या पुरु, क सर्थी रV क करर्ण उस अपु सर्थी Vs रu पु रV र्थी । पु तिq याV भ कV VM तिक छत्रवेस क वेवेरर्ण उस अत्या अतिप्रया लग र्थी क्याtतिक वेV• उस रV पुq र्थी और तिकस स तिमांल-Dल स भवे Vs र्थी । 28. पु तिq स प्रतिपुर र्ण क Rर उसक छत्रवेस कX पु D (रजिDस्टर) क स धा मां_ प्रW तिकए D पुर उस स्वे कर तिकया VM तिक उक्ता पु D क असर ति क 02.10.2016 क+ 17 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} उसकX मां एवे तिपु उस छत्रवेस स घार ल D V आए र्थी, र्थी पुf ति क 01.12.2016 क+ उसक तिपु उस छत्रवेस स ल आए र्थी । याद्यतिपु उक्ता पु D क+ तिवेजिधावे प्रश तिचन्V तिक कर सक्ष्या मां_ सण्डिम्मांजिल Vs तिकया गया VM, र्थीतिपु इसस याV थ्या अवेWया पुरिरलति V+ VM तिक छत्रवेस मां_ D भ क+ई अतिभभवेक या पुरिरD तिकस छत्र क+ ल D अर्थीवे तिमांल आ र्थी, + उसकX तिवेजिधावे प्रतिवेतिष्ट तिकया D र्थी । इस पुरिरप्रक्ष्या मां_, याति अतिभया+D कर्थीसर अपु लर्थीI द्वार वेम्र 2016 मां_ पु तिq क+ छत्रवेस स अपु सर्थी ल Dया गया र्थी, + उसक भ इ द्राD छत्रवेस पु D मां_ V+ अपुति र्थी । र्थीतिपु, अतिभया+D पु द्वार ऐस क+ई अतिभलu प्रस् Vs तिकया गया VM, जिDसस याV प्रमांतिर्ण V+ सक तिक अपु लर्थीI, उक्ता तिजिर्थी पुर छत्रवेस स पु तिq क+ अपु सर्थी ल Dया गया र्थी । 29. उपुर+क्ता समांस् प्रस् सक्ष्या क+ दृतिष्टग रu V{ए न्यायादृष्ट t क प्रकश मां_ याV न्यायालया पु VM तिक मांमांल कX पु तिq स V स पुर तिवेWवेस या स Vs VM । इस प्रकर, अपु लर्थीI क तिवेरूद्घो अतिभया+D अपु मांमांल स्पुष्ट, तिवेWवेस या और स V स पुर सक्ष्या द्वार प्रमांतिर्ण कर मां_ असफौल रV VM । इसजिलए अपु लर्थीI कX +,जिसतिद्ध और /0श क तिर्णया ण्डिस्र्थीर रu D या+ग्या Vs पुया D ण्डिल्क अपु लर्थीI स V क लभ प्रप्त कर क Vक़र VM । 30. अf अपु ल स्वे कर कX D VM । “प्रWधा +,जिसतिद्ध वे /0श” क तिर्णया अपुस् तिकया D VM र्थी अपु लर्थीI क+ स V क लभ V{ए आर+तिपु अपुरधा स +,मांक्ता तिकया D VM । 31. अपु लर्थीI क+ Dल मां_ तिरूद्घो या गया VM । याति उसकX अन्या मांमांल मां_ आवेWयाक V+ + उस त्कल रिरV तिकया Dए । 18 / 18 {Cr. A. No.-184 of 2021} 32. तिर्णया कX प्रति क सर्थी तिवेचरर्ण न्यायालया क+ मां6ल अतिभलu र्थी तिर्णया कX सत्याप्रतिजिलतिपु स जिधा Dल अधा क क+ आवेWयाक कयावेV V स6चर्थी एवे पुलर्थी श घ्रपु6वेक प्रति, V+ । सV /- (स Dया क मांर Dयासवेल) न्यायाधा श पु+मां