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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 63004 (ALL)
SALMAN ALIAS SAHIL v. STATE OF U.P.
BAIL/17988/2025 · 2025-07-24
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 63004 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:122644 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 17988 of 2025 Applicant :- Salman Alias Sahil Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Preetam Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा दद्वारद्वा आज प्रवति शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा , धजसस पत्रद्वाविलली पर रखिद्वा जद्वाय।
2. आविसदक कस वविदद्वान अधधिविकद्वा एविवं रद्वाज्य ककी तिरफ सस वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा कको ससुनद्वा तिथद्वा पत्रद्वाविलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
3. वितिरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानति प्रद्वाथरनद्वा पत्र आविसदक सलमद्वान उफर सद्वावहिल ककी ओर सस मसु०अ०सवं० 71/2025, अवंतिगरति धिद्वारद्वा 309(4), 317(2), 61(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा जद्वाफरद्वाबद्वाद, धजलद्वा जजौनपसुर मम जमद्वानति पर मसुक करनस हिसतिसु प्रस्तिसुति वकयद्वा गयद्वा हिहै।
4. आविसदक कस वविदद्वान अधधिविकद्वा नस तिकर प्रस्तिसुति वकयद्वा वक आविसदक कको इस प्रकरर मम गलति एविवं फजर्जी ढवंग सस झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हिहै, उसनस कधथति अपरद्वाधि कद्वाररति नहिहीं वकयद्वा हिहै। आविसदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररति नहिहीं वकयद्वा गयद्वा हिहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरति वकयद्वा गयद्वा हिहै। प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर वविलम्ब सस दजर करद्वायली गयली हिहै तिथद्वा उक वविलम्ब कद्वा ककोई समसुवचति स्पषलीकरर नहिहीं वदयद्वा गयद्वा हिहै। आविसदक प्रद्वाथवमककी मम नद्वावमति नहिहीं हिहै , दजौरद्वान वविविसचनद्वा आविसदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हिहै। आविसदक कस पद्वास सस वितिरमद्वान घरनद्वा सस सवंबवंधधिति वकसली भली सवंवदग्धि विस्तिसु ककी बरद्वामदगली दवशरति नहिहीं ककी गयली हिहै , जको भली बरद्वामदगली दवशरति ककी गयली हिहै , विहि पझूररतियद्वा फजर्जी एविवं बनद्वाविरली हिहै। कधथति घरनद्वा कद्वा ककोई स्वितिवंत्र सद्वाकली नहिहीं हिहै। आविसदक दद्वारद्वा अपनस पझूविर कस आपरद्वाधधिक इवतिहिद्वास कको पझूविर मम दद्वाधखिल पझूरक शपथपत्र कस प्रस्तिर सवं० 3 मम स्पष वकयद्वा गयद्वा हिहै। पसुननः उनकद्वा यहि भली कथन हिहै वक आविसदक ककी तिरफ सस यहि आश्विद्वासन वदयद्वा गयद्वा हिहै वक विहि कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहियकोग करनस कस धलए तिहैयद्वार हिहै और जब भली आविश्यकतिद्वा हिकोगली विहि ईमद्वानदद्वारली सस अदद्वालति कस समक खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतिरवं कको स्विलीकद्वार करनस कस धलए भली तिहैयद्वार हिहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपति करसगली। आविसदक वनदरष हिहै तिथद्वा विहि इस प्रकरर मम वद० 23.04.2025 सस कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हिहै। इसधलए आविसदक कको जमद्वानति पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
5. वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा नस आविसदक कस जमद्वानति कद्वा प्रबल वविरकोधि करतिस हिहए तिकर प्रस्तिसुति वकयद्वा वक आविसदक दद्वारद्वा कद्वाररति अपरद्वाधि सवंवंजसय एविवं गवंभलीर प्रकक वति कद्वा हिहै , इसधलए आविसदक कको जमद्वानति पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
6.
आविसदक कस वविदद्वान अधधिविकद्वा कस तिकरवं कस पररप्रसक्ष्य मम पत्रद्वाविलली पर उपलब्धि सद्वारविद्वान तिथ्ययों एविवं पररणस्थवतिययों कद्वा समग्र रूप सस अविलकोकन करनस कस बद्वाद , सबझूतियों ककी प्रकक वति और वकसली भली ठकोस वविरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवति एविवं उपलब्धि सद्वामग्रली सस छसड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वाविनद्वा न हिकोनस कस तिथ्य कको दसखितिस हिहए मसरली रद्वाय मम आविसदक कको जमद्वानति पर मसुक करनस कद्वा उपयसुक आधिद्वार हिहै।
7. अतिनः विद्वाद कस गसुर -दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए हिहए आविसदक कको उपरकोक विवररति अपरद्वाधि मम सवंबवंधधिति न्यद्वायद्वालय ककी सवंतिसुवष पर व्यवकगति बवंधि-पत्र एविवं अधधिक धिनरद्वावश कस ककोई भली दको प्रवतिभझू प्रस्तिसुति करनस पर वनम्नधलधखिति शतिरवं कस सद्वाथ जमद्वानति पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आविसदक वविविसचनद्वा यद्वा परलीकर कस दजौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कस सद्वाथ छसड़छद्वाड़ नहिहीं करसगद्वा। ii. आविसदक अवभयकोजन सद्वावकययों वि पलीवड़तिद्वा/ वशकद्वायतिकतिद्वार कको ण्डिरद्वायसगद्वा/धिमकद्वायसगद्वा नहिहीं। iii. आविसदक न्यद्वायद्वालय कस आदसशयों कद्वा पद्वालन करसगद्वा , विहि परलीकर कस दजौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वाविश्यक स्थगन धलए वनयति वतिधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थति हिकोगद्वा तिथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सस सहियकोग करसगद्वा। iv. आविसदक जमद्वानति पर ररहिद्वा हिकोनस कस बद्वाद जमद्वानति ककी स्वितिवंत्रतिद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहिली करसगद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक गवतिवविधधि मम धलप्त नहिहीं हिकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करसगद्वा। v. आविसदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सस मद्वामलस कस तिथ्ययों सस पररवचति वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहिहीं दसगद्वा न हिली उनसस ककोई विद्वायदद्वा करसगद्वा , धजसकस कद्वारर उन्हिम न्यद्वायद्वालय मम तिथ्ययों कको उजद्वागर करनस सस वविरति रहिनद्वा पण्डिसडे़।
8. उपरकोक शतिरवं मम सस वकसली कस उलवंघन कस मद्वामलस मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आविसदक ककी जमद्वानति वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनस कको स्वितिवंत्र हिहै। Order Date :- 25.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad