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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 60848 (CHH)
STATE OF CHHATTISGARH v. TEEJRAM KENWAT
ACQA/517/2024 · 2025-12-07
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 60848 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 8 {Acq. A. No.-517 of 2024}
2025:CGHC:59473 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल ्ቅमु!क
-517
/2024
छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर थाना ्ቚभार , पुलिलस थाना-तिलईगढ़, लि2ल-ल3दो2र- भाटापुर, छቈኍ सगढ़ । -----अपु लथा6/रज्या तिवेरू्ሾ
1. 2रमु क9 वेटा तिपु-दोवेर क9 वेटा, उ्-लगभाग 24 वेष;, तिनावेस -तिमुरतिचदो, पुलिलस थाना-तिलईगढ़, लि2ल-ल3दो2र-भाटापुर, छቈኍ सगढ़,
2. दोवेर क9 वेटा तिपु-तिपुम्र क9 वेटा, उ्-लगभाग 50 वेष;, तिनावेस -तिमुरतिचदो, पुलिलस थाना-तिलईगढ़, लि2ल-ल3दो2र-भाटापुर, छቈኍ सगढ़,
3. रमुक= ष्ण क9 वेटा तिपु-समुरू क9 वेटा, उ्-लगभाग 33 वेष;, तिनावेस -दोर;, पुलिलस थाना-कसडोल, लि2ल-ल3दो2र-भाटापुर, छቈኍ सगढ़ -----उቈኍरवेदो गण/अतिभायागण अपु लथा6/रज्या ቛኋर : ቦኍ अ!क र कश्यापु, उपु शासकFया अलिGवे । अतिभायागण/उቈኍरवेदो गण ቛኋर : ቦኍ सत्या ्ቚकशा वेमु;, अलिGवे । मुनाना या न्यायामुIति; ቦኍ स!2या क मुर 2यासवेल
, न्यायाG शा
!! तिनाण;या पु ठ पुर पुरिर !! 08/12/2025 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.12.09 10:29:10 +0530
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1. दोण्डो ्ቚति्ቅया स!तिO, 1973 कF Gर-378 (1) क O दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मु9 तिवेचरण न्यायालया-तिवेशाष न्यायाG शा (लUतिगक अपुरGV स लकV क स!र्ቌण अलिGतिनायामु, 2012 क अ!ग; गतिठ न्यायालया, लि2स आग स!्ቌपु मु9 “तिवेशाष अलिGतिनायामु” कO गया O[), लि2ल-ल3दो2र, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेशाष दोቄኌण्डोक ्ቚकरण (पु]क्स) ्ቅमु!क-15/2017 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ 2रमु क9 वेटा वेग[रO” मु9 पुरिर तिनाण;या तिदोना!क-23/07/2019 कF वे[G क चना3 दो गई O[ । लि2सक O अतिभाया2ना क मुमुल ्ቚमुतिण ना पु O_ए अतिभायागण क Gर-341, 354, 294 एवे! 506 (भाग- दो) भार या दोण्डो स!तिO था तिवेशाष अलिGतिनायामु कF Gर-08 एवे! 10 क अपुरG स दोषमु तिकया गया । लि2स आग स!्ቌपु मु9 “्ቚश्नाG ना तिनाण;या” स स!लिG तिकया 2 रO O[ ।
2.
अतिभाया2ना क स!ति्ቌ् तिवेवेरण इस ्ቚकर O[ तिक पु तिc (अ.स.-1), लि2सकF आया लगभाग 15 वेष; था और 2 क्ቌ दोसवेf मु9 नागरदो ቄኌस्था शाल मु9 अध्यायानार था , घटाना तिदोना!क 17/02/2017 कF शामु शाल स अपुना ग=O ቇኋमु तिमुरतिचदो ल3टा रO था । उस समुया अतिभायागण ना उसक रस् रककर उसक Oथा पुकc लिलया था लत्कर कF GमुकF दो O_ए कO तिक वेO “अपुना पु क दोमु पुर उछल रO O[।” उन्OVना पु तिc क तिपु क
“गcवे, क ቈኍ, कमु ना” कOकर अपुशाब्दो ल और उस “सल गc कF औलदो” कOकर अश्ल ल गलिलयाk दोf । सथा O याO GमुकF दो तिक यातिदो वेO कभा तिशावेर नारयाण अक ल
2एग , वे उसक लत्कर कर उस झातिcयाV मु9 ेር9 क दो9ग । पु तिc (अ.स.-1) घर पुO_kचकर घटाना कF 2नाकर अपुना तिपु (अ.स.-3) और दोदो (अ.स.-2) क दो । तिपु ना दो अतिभायाV क घर लकर समुझाना क ्ቚयास तिकया, लतिकना वे नाशा कF ቄኌस्थाति मु9 था और घर मु9 मुरपु टा कर 2ना स मुरना कF GमुकF दोना लग । इसक दो, लिललिn
3 / 8 {Acq. A. No.-517 of 2024} तिशाकया (्ቚदोशा; पु -1) क आGर पुर थाना तिलईगढ़ मु9 उस र लगभाग 08:30 2 ्ቚथामु सIचना रिरपुटा; (्ቚदोशा; पु -2) दो2; कF गई और आO क तिचतिकत्स या पुर ्ቌण करया गया । तिपु (अ.स.-3) क समुन्या nरVच पुई गई । घटानास्थाल क मु3क नाक्शा (्ቚदोशा; पु -3) [यार तिकया गया । पु तिc (अ.स.-1) कF आया ्ቚमुतिण करना O अ!कसIच था अन्या दोस्वे2 2ब् तिकए गए । सति्ቌयाV क याना लिलए गए था स!पुIण; तिवेवेचना उपुर! अतिभायाग-पु्ቔ ्ቚस् तिकया गया ।
3.
अतिभायाग-पु्ቔ ्ቚस् तिकया गया ।
3. आरपु क ्ቚमुणना O अतिभाया2ना पु्ቌ ना अपुना समुथा;ना मु9 क ल 08 सति्ቌयाV क पुर ्ቌण करया था 15 दोस्वे2 ्ቚदोशा; तिचन्O!तिक करया गया । Gर 313 दोण्डो ्ቚति्ቅया स!तिO क O दो2; कथाना मु9 अतिभायागण ना अपुना तिवेरु्ቍ आए सቌኚया क इ!कर कर O_ए कO तिक भाIतिमु-तिवेवेदो क करण उन्O9 झाIठ ेርk सया गया O[ 2तिक वे तिनादोsष OU । अतिभायागण कF ओर स चवे मु9 ओमु्ቚकशा क9 वेटा (.स.-1), सn रमु क9 वेटा (.स.-2) था Oर (.स.-3) क पुर ्ቌण करया गया । इना सति्ቌयाV क कथाना इस आशाया क रO तिक अतिभाया क c तिपु Oर (.स.-3) कF भाIतिमु पुर पु तिc (अ.स.-1) क तिपु (अ.स.-3) ቛኋर अवे[G रूपु स ठल रnकर शार, अ!डो आतिदो क तिवे्ቅया तिकया 2 था, लि2सक करण Oर था पु तिc क तिपु (अ.स.-3) क मुध्या पुIवे; स तिवेवेदो चल रO था । Oर कF रिरपुटा; पुर पु तिc क तिपु (अ.स.-3) क तिवेरु्ቍ आपुरलिGक ्ቚकरण भा ल!ति था, लि2स र!लि2शावेशा अतिभायागण क तिवेरु्ቍ झाIठ रिरपुटा; दो2; करई गई O[ ।
4. उभायापु्ቌ क सना 2कर तिवेचरण न्यायालया ना याO पुया तिक पु तिc (अ.स.-1), उसक तिपु (अ.स.-3), दोदो (अ.स.-2), लिललिn रिरपुटा; ्ቚदोशा; पु -1, था Gर 164 दोण्डो
4 / 8 {Acq. A. No.-517 of 2024} ्ቚति्ቅया स!तिO क O दो2; कथाना मु9 इस ति!दो पुर तिवेरGभास O[ तिक कलिथा घटाना मु9 ना अतिभाया सቄኌम्मुलिल था या नाOf । इस ्ቚकर इस ति!दो पुर भा तिवेरGभास पुया गया तिक सcक पुर घतिटा घटाना क उपुर! Oना वेल कलिथा मुरपु टा दोकना मु9 O_ई या पु तिc क घर मु9 । इसक अतिरिर कई स्वे!्ቔ सቌኚया भा ्ቚस् नाOf तिकया गया लि2सस घटाना कF पुतिu O सक । सथा O , पुIवे; र!लि2शा क Oना भा पुया गया O[ । याO भा ्ቚमुतिण नाOf पुया गया तिक घटाना क समुया पु तिc (अ.स.-1) कF आया 18 वेष; स कमु था । इना सभा
पुरिरቄኌस्थातियाV क दृतिuग रn O_ए तिवेचरण न्यायालया ቛኋर पु तिc वे सति्ቌयाV क स!दोO स पुर तिवेश्वेसना या नाOf पु O_ए अतिभायागण क दोषमु कर तिदोया । इस दोषमुति क तिनाण;या क इस अपु ल मु9 चना3 दो गई O[ ।
5.
अपु लथा6/रज्या क तिवेቛኋना अलिGवे क क; O[ तिक अतिभाया2ना सति्ቌयाV ना अतिभाया2ना मुमुल क पुIण;w समुथा;ना तिकया O[ । तिवेचरण न्यायालया ቛኋर उनाक सቌኚया पुर तिवेश्वेस ना कर O_ए ्ቔतिटापुIण; तिनाष्कष; तिनाकल गया O[ 2 तिवेलिG कF दृतिu मु9 ቄኌस्थार रn 2ना याग्या नाOf O[ । अतिभायागण क तिवेरू्ሾ अतिभाया2ना क मुमुल ्ቚमुतिण रO O[ । अw ्ቚश्नाG ना दोषमुति क तिनाण;या अपुस् कर O_ए अपु ल स्वे कर कF 2कर अतिभायागण क दोषलिस्ቍ कर दोቄኌण्डो तिकया 2ए ।
6. अतिभायागण/उቈኍरवेदो गण क तिवेቛኋना अलिGवे ቛኋर तिवेचरण न्यायालया क “्ቚश्नाG ना तिनाण;या” क समुथा;ना कर O_ए क; तिदोया गया O[ तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर 2 दोषमुति क तिनाष्कष; अ!तिक गया O[, वेO पुIण;w उतिच O[ । अपु लथा6/रज्या पु्ቌ ቛኋर अपु ल मु9 उठए गए क; स्वे कर याग्या नाOf OU । अw अपु ल nरिर2 कF 2ए ।
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7. उभायापु्ቌ क क; ቦኍवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभालn क सIቌኚमुपुIवे;क पुरिरशा लना तिकया गया ।
8. न्यायादृu! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मु9 मुनाना या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क तिनारकरण O क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए OU 2 कቄኌण्डोक-42 मु9 तिनाम्नानासर O[w-
“42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the
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A. No.-517 of 2024} reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.”
9. उपुर न्यायादृu! क ्ቚकशा मु9, अतिभालn मु9 उपुलब्G थ्या और सቌኚया क पुरिरशा लना करना पुर याO स्पुu O O[ तिक लिललिn तिशाकया (्ቚदोशा; पु -1) मु9 क वेल अतिभाया 2रमु क9 वेटा वे उसक सथा उቤኔलिn O[ । अन्या दो अतिभायाV क नामु क उቤኔn नाOf O[ । उस लिललिn तिशाकया पु्ቔ स याO स्पुu नाOf O तिक घटाना क अ!2मु दोना वेल क वेल दो नाOf ቄኌ{क ना अतिभाया था । Gर 164 दोण्डो ्ቚति्ቅया स!तिO क O दो2; कथाना (्ቚदोशा; पु - 7) मु9 भा
सर अतिभाया दोवेर क नामु नाOf O[ । न्यायालया ना कथाना मु9 या्ቕतिपु पु तिc ना
नाV अतिभायाV क पुOचनाना कF कO O[, तिक! घटाना्ቅमु क समुया तिकस अतिभाया ना क्या तिकया, इसक स्पुu तिवेवेरण नाOf तिदोया O[ । पु तिc ना क वेल समुन्या रूपु स कO O[ तिक “अतिभायागण ना ऐस तिकया था।” इस ्ቚकर, घटाना्ቅमु मु9 ्ቚत्याक अतिभाया क क= त्याV क स!!G मु9 कई स्पुu और तिनाቄኌश्च तिवेवेरण नाOf O[ ।
10. इस ्ቚकर, लिललिn तिशाकया मु9 शाल स वेपुस घर ल3टा समुया सcक पुर O_ई घटाना क पुश्च अतिभायागण ቛኋर पु तिc क घर मु9 आकर मुरपु टा कF घटाना Oना क उቤኔn O[ । Gर 164 दोण्डो ्ቚति्ቅया स!तिO क O दो2; कथाना (्ቚदोशा; पु -7) मु9 भा घर मु9 O_ई घटाना क उቤኔn O[, तिक! न्यायालया ना याना मु9 पु तिc (अ.स.-1) ना इस घर क 2या अपुना तिपु क दोकना मु9 O_ई घटाना या O[ । दोदो (अ.स.-2) ना भा याO कO तिक घटाना दोकना मु9 O_ई था । तिपु (अ.स.-3) ना भा घटाना क दोकना अथा; ठल क पुस घतिटा या, और घर मु9 O_ई घटाना क कOf कई उቤኔn नाOf तिकया । अन्या स्ቌ (अ.स.-5)
7 / 8 {Acq.
A. No.-517 of 2024} ना या तिक पु तिc और अतिभाया क मुध्या ्ቚमु स!!G था, और इस क लकर तिवेवेदो कF ቄኌस्थाति था । उसना भा घटाना क दोकना मु9 घतिटा लया । स्वे!्ቔ स्ቌ तिेርरना क9 वेटा (अ.स.-4) ना अतिभाया2ना पु्ቌ क कथाना क समुथा;ना नाOf तिकया, ቄኌ{क ्ቚतिपुर ्ቌण मु9 कO तिक पु तिc क तिपु (अ.स.-3), अपुना ठल !दो करक घर चल गए था । इस ्ቚकर, घटानास्थाल क लकर पु तिc (अ.स.-1) सतिO अन्या सति्ቌयाV क कथानाV और लिललिn तिशाकया मु9 ग!भा र तिवेरGभास कF ቄኌस्थाति O[ ।
11. चवे सति्ቌयाV क कथाना अनासर, पु तिc क तिपु (अ.स.-3) ቛኋर अतिभायागण क रिरश्दोर (c तिपु) Oर कF 2मु ना पुर ठल लगना क करण तिवेवेदो उत्पु्ቐ O_आ था । पु तिc क तिपु (अ.स.-3) ना सቌኚया कF क! तिडोक-4 मु9 स्वे कर तिकया तिक अतिभाया क रिरश्दोर Oर और उसकF पुत्ना ना उसक तिवेरु्ቍ मुरपु टा, लcई-झागc, 2ना स मुरना कF GमुकF आतिदो क मुमुल दो2; करया था । इसक अलवे Oर (.स.-3) कF 2मु ना मु9 अवे[G ठल स!चलिल करना क स!!G मु9 तिवेवेदो था । न्यातियाक दो!डोलिGकर , तिलईगढ़ क न्यायालया मु9 मुमुल चल रO था । स्वे!्ቔ स्ቌ तिेርरना क9 वेटा (अ.स.-4) ना भा ्ቚतिपुर ्ቌण मु9 इस सझावे क स्वे कर तिकया तिक अतिभाया दोवेर क भाई Oर कF 2मु ना मु9 पु तिc क तिपु (अ.स.-3) ቛኋर ठल रn गया था और इस क लकर दोनाV पु्ቌV क मुध्या तिवेवेदो था ।
12. इस ्ቚकर, उपुर सति्ቌयाV क कथाना मु9 तिवेरGभास, घटानास्थाल क लकर तिवेरGभास और उभायापु्ቌ क मुध्या पुIवे; र!लि2शा क दृतिuग रn O_ए न्यायादृu! क ्ቚकशा मु9 उपुर सቌኚया तिवेवेचना क ेርलस्वेरूपु याO न्यायालया पु O[ तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर 2 दोषमुति क तिनाष्कष; अ!तिक तिकया गया O[ वेO अतिभालn मु9 उपुलब्G थ्या और सቌኚया क
8 / 8 {Acq.
A. No.-517 of 2024} तिवेपुर या तिवेरGभास नाOf O[ था ्ቚश्नाG ना दोषमुति क तिनाण;या मु9 कई अवे[G या अशा्ሾ पुरिरलति्ቌ नाOf O । इसलिलए उसमु9 Oस््ቌपु कF आवेश्याक नाOf पुया 2 ।
13. अw दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याO अपु ल स्वे कर याग्या ना Oना स nरिर2 कF 2 O[ ।
14. तिनाण;या कF ्ቚतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभालn शा ्ቈपुIवे;क वेपुस ्ቚतिष O । सO /- (स!2या क मुर 2यासवेल) न्यायाG शा पुमुना