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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 60804 (CHH)
STATE OF CHHATTISGARH v. BITTU VISHWAS
ACQA/840/2024 · 2025-12-07
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 60804 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 7 {Acq. A. No.-840 of 2024}
2025:CGHC:59563 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल ्ቅमु!क
-840
/2024
छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर पुलिलस थाना-ग!धी नागर, अ!तिकपुर, लि/ल-सरग/, छቈኍ सगढ़ -----अपु लथा0/रज्या तिवेरू्ሾ तिሾ4 तिवेश्वेस तिपु-्ቚपु तिवेश्वेस, उ्-लगभग 22 वेष8, तिनावेस -भगवेनापुर, पुलिलस थाना-ग!धी नागर, लि/ल-सरग/, छቈኍ सगढ़ -----उቈኍरवेदो /अतिभया अपु लथा0/रज्या ቛኋर : ቦኍ एच.ए.पु .एस. भति=या, पु>नाल अलिधीवे । अतिभया/उቈኍरवेदो ቛኋर : ቦኍ अरूण क मुर शुक्ल, अलिधीवे । मुनाना या न्यायामु4ति8 ቦኍ स!/या क मुर /यासवेल
, न्यायाधी शु
!! तिनाण8या पु ठ पुर पुरिर !! 08/12/2025
1. दोण्ड ्ቚति्ቅया स!तिJ, 1973 कN धीर-378 (1) क J दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मुS तिवेचरण न्यायालया-अपुर स्ቔ न्यायाधी शु, फास्= =Vक स्पुशुल क=8 (लWतिगक अपुरधीX स लकX क स!र्ቌण अलिधीतिनायामु, 2012 क अ!ग8 गतिठ न्यायालया, लि/स आग POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.12.09 16:35:21 +0530
2 / 7 {Acq. A. No.-840 of 2024} स!्ቌपु मुS “तिवेशुष अलिधीतिनायामु” कJ गया J>), अ!तिकपुर, लि/ल-सरग/, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेशुष आपुरलिधीक (पु]क्स) ्ቚकरण ्ቅमु!क-31/2019 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ तिሾ4 तिवेश्वेस” मुS पुरिर तिनाण8या तिदोना!क-12/12/2022 कN वे>धी क चना^ दो गई J> । लि/सक J अतिभया/ना क मुमुल ्ቚमुतिण ना पु J`ए अतिभया क धीर-363, 366-क, 354, 354(क), 354(ख) एवे! 506 (भग-दो) भर या दोण्ड स!तिJ था तिवेशुष अलिधीतिनायामु कN धीर-07/08 क अपुरधी स दोषमु तिकया गया । लि/स आग स!्ቌपु मुS “्ቚश्नाधी ना तिनाण8या” स स!लिधी तिकया / रJ J> ।
2.
अतिभया/ना क मुमुल स!्ቌपु मुS इस ्ቚकर J> तिक 11 वेष0या पु तिc तिदोना!क 21.05.2019 क अपुना घर स ख ቝኌस्था 4वेल चल4 करना / रJ था । रस् मुS पुलिलया क पुस भगवेनापुर तिनावेस अतिभया ना उसकN इज्/ करना क आशुया स उसक Jथा पुकc और लगभग 100 मु =र दो4र मुJ`आ क पुc क पुस ल /कर उसक शुर र क आपुलिቈኍ/नाक र क स स्पुशु8 तिकया था याJ धीमुकN भ तिदोया तिक यातिदो वेJ तिचቤኋई उसक गल दो दोग । उस समुया पु तिc क चचर भई (अ.स.-2) वेJi पुJ`iच गया और अतिभया क पुकc लिलया । त्पुश्च घ=ना कN /नाकर पु तिc क तिपु (अ.स.-1) क दो गई, लि/नाक ቛኋर उस तिदोना थाना अ!तिकपुर दोJ (ग!धी नागर) मुS रिरपु=8 दो/8 करई गई, लि/स पुर ्ቚदोशु8 पु -1 क ्ቚथामु स4चना रिरपु=8 दो/8 तिकया गया । घ=नास्थाल क नाक्शु ्ቚदोशु8 पु -2 >यार तिकया गया । पु=वेर स घ=नास्थाल क नाक्शु भ >यार करया गया । सति्ቌयाX क कथाना लिलए गए । पु तिc कN आया क ्ቚमुण J तिवे्ቕलया क दोलिखल-खरिर/ पु!/ /ब् तिकया गया । समुस् तिवेवेचना पु4ण8 करना क उपुर! अतिभयाग-पु्ቔ ्ቚस् तिकया गया ।
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3. आरपु क ्ቚमुणना J अतिभया/ना पु्ቌ ना अपुना समुथा8ना मुS क ल 08 सति्ቌयाX क पुर ्ቌण करया था 12 दोस्वे/ ्ቚदोशु8 तिचन्J!तिक करया गया । धीर 313 दोण्ड ्ቚति्ቅया स!तिJ क J दो/8 कथाना मुS अतिभया ना अपुना तिवेरु्ቍ आए सቌኚया क इ!कर कर J`ए कJ तिक उस झू4ठ फाi सया गया J>, /तिक वेJ तिनादोpष JW । अतिभया कN ओर स चवे मुS तिकस
स्ቌ क पुर ्ቌण नाJr करया गया । उभयापु्ቌ क सना /कर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर “्ቚश्नाधी ना तिनाण8या” पुरिर कर J`ए अतिभया क दोषमु तिकया गया, लि/स दोषमुति क इस अपु ल मुS चना^ दो गई J> ।
4.
अपु लथा0/रज्या क तिवेቛኋना अलिधीवे क क8 J> तिक पु तिc (अ.स.4) ना न्यायालया ना कथाना मुS अतिभया/ना मुमुल क पु4ण8s समुथा8ना तिकया J> । पु तिc क कथाना क समुथा8ना अतिभलख मुS उपुलब्धी अन्या सቌኚया स भ J J> । तिवेचरण न्यायालया ቛኋर उसक सቌኚया पुर तिवेश्वेस ना कर J`ए ्ቔति=पु4ण8 तिनाष्कष8 तिनाकल गया J> / तिवेलिधी कN दृतिv मुS ቝኌस्थार रख /ना याग्या नाJr J> । अतिभया क तिवेरू्ሾ अतिभया/ना क मुमुल ्ቚमुतिण रJ J> । अs ्ቚश्नाधी ना दोषमुति क तिनाण8या अपुस् कर J`ए अपु ल स्वे कर कN /कर अतिभया क दोषलिस्ቍ कर दोቝኌण्ड तिकया /ए ।
5. अतिभया/उቈኍरवेदो क तिवेቛኋना अलिधीवे ቛኋर तिवेचरण न्यायालया क “्ቚश्नाधी ना तिनाण8या” क समुथा8ना कर J`ए क8 तिदोया गया J> तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर / दोषमुति क तिनाष्कष8 अ!तिक गया J>, वेJ पु4ण8s उतिच J> । अपु लथा0/रज्या पु्ቌ ቛኋर अपु ल मुS उठए गए क8 स्वे कर याग्या नाJr JW । अs अपु ल खरिर/ कN /ए ।
6. उभयापु्ቌ क क8 ቦኍवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख क स4ቌኚमुपु4वे8क पुरिरशु लना तिकया गया ।
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7. न्यायादृv! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुS मुनाना या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क तिनारकरण J क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए JW / कቝኌण्डक-42 मुS तिनाम्नानासर J>s-
“42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice.
The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality,
5 / 7 {Acq. A. No.-840 of 2024} perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.”
8. तिवेचरण न्यायालया ना ्ቚस् सቌኚया क आधीर पुर याJ तिनाष्कष8 तिनाकल J> तिक घ=ना तिदोना!क 21/05/2019 क पु तिc, लि/सकN /न्मुतिलिथा 24/07/2007 J>, 18 वेष8 स कमु आया कN अथा8 लगभग 11–12 वेष8 कN नालिलग था । तिवेचरण न्यायालया क याJ तिनाष्कष8 अतिभलख मुS उपुलब्धी थ्या एवे! सቌኚया क तिवेपुर अथावे तिवेरधीभस नाJr J> । अs याJ तिनाष्कष8 उतिच पुया / J> तिक कलिथा घ=ना तिदोना!क-21/05/2019 क पु तिc (अ.स.-4) नालिलग था ।
9. अतिभया क तिवेरु्ቍ अतिभया/ना क मुमुल मु4लs दो सति्ቌयाX क कथानाX पुर आधीरिर J>— ्ቚथामु, स्वेया! पु तिc (अ.स.–4), / मुख्या स्ቌ J>; था तिቛኋ या, उसक चचर भई (अ.स.–2), लि/सना पु तिc क सथा अतिभया क गल Jरक कर J`ए दोख था
10.
पु तिc क चचर भई (अ.स.–2) ना अपुना न्यायालया ना कथाना मुS मु्ቔ इना कJ J> तिक दोकना स वेपुस आ समुया उसना दोख तिक पु तिc एवे! उसकN Jना कN सइतिकल सcक तिकनार पुc J`ई था । इसक पुश्च उसना /!गल कN ओर स पु तिc और अतिभया क आ दोख था अतिभया क पुकc लिलया । स्ቌ क पु्ቌቖኘJ घतिष कर स4चक ्ቚश्ना पु4छ /ना पुर भ उसना इस थ्या कN पुतिv नाJr कN तिक उसना पु तिc (अ.स.–4) क सथा अतिभया क तिकस ्ቚकर कN गल Jरक कर J`ए दोख था । ्ቚतिपुर ्ቌण मुS उसना याJ भ कJ तिक पु तिc और अतिभया दोनाX अलग-अलग तिदोशु स आ रJ था । उसना याJ कथाना भ नाJr तिकया तिक पु तिc ना उस अतिभया ቛኋर कN गई तिकस ग!दो या गल Jरक क स!!धी मुS क छ या J । इस ्ቚकर, चचर भई (अ.स.–2) ना अतिभया/ना मुमुल कN पुतिv नाJr कN J> ।
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11. पु तिc (अ.स.–4) ना मुख्या पुर ्ቌण मुS अतिभया क पुJचनाना स था घ=ना कN तिलिथा कN /नाकर Jना स इनाकर तिकया J> और क वेल इना कJ J> तिक एक व्याति कN सइतिकल उसकN सइतिकल स =करई था , लि/सक लकर झूगc J`आ था । Jल!तिक, अतिभया/ना ቛኋर पु्ቌቖኘJ घतिष कर स4चक ्ቚश्ना पु4छ /ना पुर उसना अतिभया/ना क अनासर स!पु4ण8 घ=ना्ቅमु कN पुतिv अवेश्या कN J>, तिक!
्ቚतिपुर ्ቌण मुS वेJ पुनाs अपुना कथाना पुर ቝኌस्थार नाJr रJ । ्ቚतिपुर ्ቌण मुS पु तिc ना स्वे कर तिकया तिक सइतिकल =करना कN घ=ना क पुJल वेJ अतिभया क नाJr /ना था और ना J दो मुS उसस कभ तिमुल । वेJ याJ भ नाJr /ना तिक उस व्याति क नामु ‘तिሾ4 तिवेश्वेस’ था या नाJr । पु तिc लगर अपुना कथाना मुS पुरिरवे8ना कर रJ । उसना याJ भ कJ तिक न्यायालया मुS सቌኚया क दो^रना उस / फा=ቇኋफ्स तिदोखकर पुJचना करई गई था , उनामुS स तिकस क वेJ पुJचना नाJr पुई । क! तिडक–13 मुS उसना स्पुv कJ तिक उसक सथा क वेल सइतिकल =करना कN J घ=ना J`ई था । न्यायालया ቛኋर ्ቚश्ना पु4छ /ना पुर भ वेJ स!पु4ण8 घ=ना्ቅमु क स!!धी मुS स्पुv /नाकर नाJr दो सकN । पुनाs ्ቚतिपुर ्ቌण मुS उसना याJ भ कJ तिक पुलिलस वेलX ना अपुना ओर स रिरपु=8 लिलख ल था और रिरपु=8 लिलखना क दो सइतिकल =करना वेल व्याति क उस पुनाs नाJr तिदोखया गया । अ! मुS उसना याJ भ स्वे कर तिकया तिक पुलिलस ቛኋर अतिभया क नामु लिलख दोना क करण J वेJ न्यायालया मुS उसक नामु रJ J> । इस ्ቚकर स्वेया! पु तिc क कथाना स याJ थ्या स!दोJ स पुर ्ቚमुतिण नाJr J तिक अतिभया ना अतिभया/ना ቛኋर वेतिण8 तिकस भ ्ቚकर कN घ=ना उसक सथा करिर कN J ।
12. उपुर न्यायादृv! क ्ቚकशु मुS सቌኚया तिवेवेचना क फालस्वेरूपु याJ न्यायालया पु J> तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर / दोषमुति क तिनाष्कष8 अ!तिक तिकया गया J> वेJ अतिभलख मुS
7 / 7 {Acq. A. No.-840 of 2024} उपुलब्धी थ्या और सቌኚया क तिवेपुर या तिवेरधीभस नाJr J> था ्ቚश्नाधी ना दोषमुति क तिनाण8या मुS कई अवे>धी या अशु्ሾ पुरिरलति्ቌ नाJr J । इसलिलए उसमुS Jस््ቌपु कN आवेश्याक नाJr पुया / ।
13. अs दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याJ अपु ल स्वे कर याग्या ना Jना स खरिर/ कN / J> ।
14.
तिनाण8या कN ्ቚतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख शु ्ቈपु4वे8क वेपुस ्ቚतिष J । सJ /- (स!/या क मुर /यासवेल) न्यायाधी शु पुमुना