Research › Search › Judgment

High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 60642 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. AJAY PRAKASH CHAURASIYA

ACQA/828/2024 · 2025-12-07

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} 2025:CGHC:59474 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल ्ቅमु!क -828 /2024  छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर थाना ्ቚभार , पुलिलस थाना-ोሣ0गरगढ़, लि1ल-र1ना!दोग!वे, छቈኍ सगढ़ । -----अपु लथा3/रज्या तिवेरू्ሾ 1. अ1या ्ቚकश च7रलिसया तिपु-अमुरनाथा च7रलिसया, उ्቞-लगभाग 28 वेष9, तिनावेस -च7तिकया (खाश), पुलिलस थाना-ग1 पुर, लि1ल-ग1 पुर, उቈኍर्ቚदोश, वे9मुना तिनावेस -ही रतिगर दोफाई, हील्दो ़ቡ , तिचरतिमुर , पुलिलस थाना-तिचरतिमुर , लि1ल-करिरया, छቈኍ सगढ़ -----उቈኍरवेदो /अतिभाया अपु लथा3/रज्या ቛኋर : ोሣDक्टर सरन््ቖ दोवे!गना, पुHनाल अलिIवे । अतिभाया/उቈኍरवेदो ቛኋर : ቦኍ तिवे्ቕ भाKषण सना , अलिIवे । मुनाना या न्यायामुKति9 ቦኍ स!1या क मुर 1यासवेल , न्यायाI श !! तिनाण9या पु ठ पुर पुरिर !! 08/12/2025 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.12.09 10:32:04 +0530 2 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} 1. दोण्ोሣ ्ቚति्ቅया स!तिही, 1973 कU Iर-378 (1) क ही दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मुX तिवेचरण न्यायालया-अतिरिर स्ቔ न्यायाI श, ोሣ0गरगढ़, लि1ल-र1ना!दोग!वे, छቈኍ सगढ़ ቛኋर स्ቔ ्ቚकरण ्ቅमु!क-04/2019 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ अ1या ्ቚकश च7रलिसया” मुX पुरिर तिनाण9या तिदोना!क-23/03/2021 कU वेHI क चना7 दो गई हीH । लि1सक ही अतिभाया1ना क मुमुल ्ቚमुतिण ना पु ही\ए अतिभाया क Iर-306 भार या दोण्ोሣ स!तिही क अपुरI स दोषमु तिकया गया । लि1स आग स!ቌኔपु मुX “्ቚश्नाI ना तिनाण9या” स स!लिI तिकया 1 रही हीH । 2. अतिभाया1ना क मुमुल इस ्ቚकर हीH तिक 24 वेष3या मुbक पुKनामु टम्भाKरकर, तिनावेस — रमुनागर, अम्ोሣकर वेोሣ9 ्ቅमु!क-9, ोሣ0गरगढ़, थाना-ोሣ0गरगढ़, लि1ल र1ना!दोग!वे (छቈኍ सगढ़) था । मुbक ना वेष9 2016-17 मुX अपुना तिमु्ቔ र1ना च7Iर (अ.स.-9) एवे! पुK1 क सथा ቇኋमु-पुदोमुर, लि1ल र1ना!दोग!वे मुX कपु टgोሣ क आई.ट .आई. ्ቚतिशቌኔण ्ቚ्቎ तिकया था । मुbक पुKनामु क अतिभाया अ1या क सथा ्ቚमु स!!I था । अतिभाया ना उस तिवेवेही क आश्वेसना तिदोया था, तिकन् दो मुX उसना Iखा दोकर तिवेवेही करना स इ!कर कर तिदोया । इस करण दोष््ቚरिर हीकर तिदोना!क 19/10/2018 क मुbक ቛኋर फाjस लगकर आत्मुहीत्या कर ल । घटना कU सKचना मुbक क मुमु दोवेन््ቖ अम्दो (अ.स.-2) ቛኋर थाना-ोሣ0गरगढ़ क दो गया , लि1स पुर मुग9 कयामु कर शवे क पु!चनामु Hयार तिकया गया । तिचतिकत्सक ोሣD. एस. एस. च7Iर (अ.स.-5) ቛኋर शवे पुर ቌኔण कर ्ቚतिवेदोना (्ቚदोश9 पु -7) तिदोया गया, लि1समुX मुbत्या क करण फा!स क फालस्वेरूपु दोमु घटना था मुbत्या कU ्ቚकb ति आत्मुहीत्यात्मुक हीना दोश9या गया । मुग9 1jच क दो7रना मुbक क अ!रवेኚᮌ स आतिट9कल-A क रूपु मुX मुbत्याकल ना पु्ቔ (ससइोሣल नाट) 1ब् तिकया गया था उसक मुइल फाना भा 1ब् तिकया गया, लि1समुX अतिभाया क नामु पुया गया । इसक उपुर! 3 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} अपुरI पु!1 ्ቍ कर सतिቌኔया0 क याना लिलए गए । तिमु्ቔ र1ना च7Iर (अ.स.-9) ቛኋर अपुना कथाना मुX याही ्ቚमुखा थ्या पु्ቖ तिकया गया तिक मुbक पुKनामु क अतिभाया अ1या क सथा ्ቚमु स!!I था । समुቇኋ ्ቚकरण मुX अतिभाया क दोष््ቚरक पुए 1ना पुर उसक तिवेरु्ቍ अतिभायागपु्ቔ ्ቚस् तिकया गया । 3. आरपु ्ቚमुणना ही अतिभाया1ना ना अपुना समुथा9ना मुX क ल 15 सतिቌኔया0 क पुर ቌኔण करया था 15 दोस्वे1 ्ቚदोश9-तिचन्ही!तिक करए गए । Iर 313 दोण्ोሣ ्ቚति्ቅया स!तिही क ही दो19 कथाना मुX अतिभाया ना अपुना तिवेपुर सतिቌኔया0 क कथाना0 क इ!कर कर ही\ए स्वेया! क तिनादोsष या था कही तिक उस झूKठ फाj सया गया हीH । अतिभाया कU ओर स चवे मुX तिकस भा सቌኔ क पुर ቌኔण नाहीv करया गया । उभायापुቌኔ क सनाना क उपुर! तिवेचरण न्यायालया ቛኋर याही थ्या ्ቚमुतिण पुया गया तिक मुbक पुKनामु कU मुbत्या, आत्मुहीत्या स्वेरूपु था , तिकन् याही थ्या ्ቚमुतिण नाहीv पुया गया तिक उ आत्मुहीत्या, अतिभाया क दोष््ቚरण क फालस्वेरूपु कU गई था । फालw तिवेचरण न्यायालया ቛኋर “्ቚश्नाI ना तिनाण9या” पुरिर कर ही\ए अतिभाया क Iर 306 भार या दोण्ोሣ स!तिही क आरपु स दोषमु कर तिदोया गया । उ दोषमुति तिनाण9या क ही इस अपु ल मुX चना7 दो गई हीH । 4. अपु लथा3/्ቚथा3 क तिवेቛኋना अलिIवे क क9 हीH तिक अतिभाया1ना सतिቌኔया0 ना अतिभाया1ना मुमुल क पुKण9w समुथा9ना तिकया हीH । तिवेचरण न्यायालया ቛኋर उनाक सቌኚया पुर तिवेश्वेस ना कर ही\ए ्ቔतिटपुKण9 तिनाष्कष9 तिनाकल गया हीH 1 तिवेलिI कU दृति्ቖ मुX ቝኌस्थार रखा 1ना याग्या नाहीv हीH । अतिभाया क तिवेरू्ሾ अतिभाया1ना क मुमुल ्ቚमुतिण रही हीH । अw ्ቚश्नाI ना दोषमुति क तिनाण9या अपुस् कर ही\ए अपु ल स्वे कर कU 1कर अतिभाया क दोषलिस्ቍ कर दोቝኌण्ोሣ तिकया 1ए । 4 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} 5. A. No.-828 of 2024} 5. अतिभाया/उቈኍरवेदो क तिवेቛኋना अलिIवे ቛኋर तिवेचरण न्यायालया क “्ቚश्नाI ना तिनाण9या” क समुथा9ना कर ही\ए क9 तिदोया गया हीH तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर 1 दोषमुति क तिनाष्कष9 अ!तिक गया हीH, वेही पुKण9w उतिच हीH । अपु लथा3/रज्या पुቌኔ ቛኋर अपु ल मुX उठए गए क9 स्वे कर याग्या नाहीv ही| । अw अपु ल खारिर1 कU 1ए । 6. उभायापुቌኔ क क9 ቦኍवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभालखा क सKቌኚमुपुKवे9क पुरिरश लना तिकया गया । 7. न्यायादृ्ቖ! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुX मुनाना या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क तिनारकरण ही क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए ही| 1 कቝኌण्ोሣक-42 मुX तिनाम्नानासर हीHw- “42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; 5 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.” 8. तिचतिकत्सक एस. च7Iर (अ.स.-5) ቛኋर ्ቚमुतिण शवे पुर ቌኔण ्ቚतिवेदोना ्ቚदोश9 पु -7 था अन्या सतिቌኔया0 क कथाना0 क आIर पुर तिवेचरण न्यायालया ना याही तिनाष्कष9 तिनाकल हीH तिक मुbक पुKनामु ना फा!स लगकर आत्मुहीत्या कU था । याही तिनाष्कष9 अतिभालखा पुर उपुलब्I थ्या एवे! सቌኚया क तिवेपुर अथावे तिवेरIभास नाहीv हीH । इस ्ቚकर याही तिनाष्कष9 उतिच पुया 1 हीH तिक पुKनामु ना अपुना ही घर मुX फा!स लगकर आत्मुहीत्या कU था । 9. Iर 306 भार या दोण्ोሣ स!तिही क अपुरI क ्ቚमुणना ही अतिभाया1ना क लिलए याही स्थातिपु करना आवेश्याक हीH तिक मुbक पुKनामु क आत्मुहीत्या क लिलए दोष््ቚरिर करना वेल व्याति अतिभाया ही था । 10. दोष््ቚरण क स!!I मुX ्ቚस् सቌኚया पुर तिवेचर करना स याही पुरिरलतिቌኔ ही हीH तिक मुbक कU तिमु्ቔ र1ना च7Iर (अ.स.-9) ना अपुना कथाना मुX इना अवेश्या कही हीH तिक मुbक पुKनामु ना एक र उस अतिभाया क आIर कोሣ9 वेट्सऐपु क मुध्यामु स भा1 था था उसना 6 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} र1ना!दोग!वे रलवे स्टशना मुX अतिभाया क एक र दोखा भा था, लि1स पुKनामु ना अपुना तिमु्ቔ या था । तिक! याही सቌኔ न्यायालया मुX पुቌኔ्ቖही ही गई था उसना इस थ्या कU कई पुति्ቖ नाहीv कU, तिक पुKनामु ቛኋर कU गई आत्मुहीत्या मुX अतिभाया क तिकस ्ቚकर क दोष््ቚरण अथावे कई उकसना वेल कb त्या था । 11. दोष््ቚरण क ति!दो पुर मुbक क मुमु दोवेन््ቖ अम्दो (अ.स.-2), भाई रही\ल टम्भारकर (अ.स.-3), हीना ति!दो सहीर (अ.स.-6) था मुj पुस्कल टम्भारकर (अ.स.-7) क कथाना मुX ऐस कई थ्या नाहीv आया हीH तिक उन्हीX अतिभाया था पुKनामु क च कलिथा ्ቚमु स!!I कU 1नाकर स्वेया! पुKनामु ना दो ही । या सभा सቌኔ 1 मुbक क तिनाकट स!!I ही|, याही कही ही| तिक उन्हीX उ स!!I कU 1नाकर पुKनामु कU तिमु्ቔ र1ना च7Iर (अ.स.-9) ना दो था । अw या सቌኔ इस मुमुल मुX सना -सनाई क गवेही मु्ቔ ही| । उनाक कथाना क आIर पुर ऐस कई थ्या समुना नाहीv आया, लि1सस याही ्ቚमुतिण ही तिक पुKनामु क अतिभाया अ1या क सथा कई ्ቚमु स!!I था अथावे अतिभाया ना तिकस ्ቚकर स पुKनामु क दोष््ቚरिर तिकया था । 12. 1हीj क आतिट9कल-ए क उस पु्ቔ क स!!I हीH, लि1स मुbक पुKनामु क अ!रवेኚᮌ स 1ब् तिकया 1ना या गया हीH, उसमुX या्ቕतिपु “्ቚमु मुX Iखा” 1Hस अतिभाव्याति क उቤኔखा तिमुल हीH, तिक! स!पुKण9 पु्ቔ मुX कहीv भा अतिभाया क नामु या उस स्पु्ቖ रूपु स स!क करना वेल कई थ्या नाहीv तिमुल । इस ्ቚकर, आतिट9कल-ए क याही पु्ቔ अतिभाया क तिवेरु्ቍ अतिभाया1ना क मुमुल क समुथा9ना ्ቚदोना नाहीv कर । 13. इस ्ቚकर, मुbक क मुईल फाना 1ब् तिकया 1ना अतिभालखा स ्ቚमुतिण ही हीH, और उसक भाई रही\ल टम्भारकर (अ.स.-3) ना याही अवेश्या कही हीH तिक उसना मुईल मुX 7 / 7 {Acq. A. No.-828 of 2024} क छ वेDइस रिरकDतिोሣƒग सना था , तिक! याही मुहीत्वेपुKण9 हीH तिक उस कलिथा वेDइस रिरकDतिोሣƒग क कई लिलप्या!रण Hयार नाहीv तिकया गया हीH और ना ही उ इलक्टgDतिनाक सቌኚया क सቌኚया अलिIतिनायामु क ्ቚवेIना0 क अनासर तिवेलिIवे रूपु स ्ቚमुतिण तिकया गया हीH । ऐस ቝኌस्थाति मुX, उ मुईल या उसमुX मु71Kदो कलिथा वेDइस रिरकDतिोሣƒग स याही तिनाष्कष9 नाहीv तिनाकल 1 सक तिक अतिभाया ना मुbक पुKनामु क आत्मुहीत्या क लिलए दोष््ቚरिर तिकया था । 14. इस ्ቚकर, न्यायादृ्ቖ! क ्ቚकश मुX उपुर सቌኚया तिवेवेचना क फालस्वेरूपु याही न्यायालया पु हीH तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर 1 दोषमुति क तिनाष्कष9 अ!तिक तिकया गया हीH वेही अतिभालखा मुX उपुलब्I थ्या और सቌኚया क तिवेपुर या तिवेरIभास नाहीv हीH था ्ቚश्नाI ना दोषमुति क तिनाण9या मुX कई अवेHI या अश्ሾ पुरिरलतिቌኔ नाहीv ही । इसलिलए उसमुX हीस्ቌኔपु कU आवेश्याक नाहीv पुया 1 । 15. अw दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याही अपु ल स्वे कर याग्या ना हीना स खारिर1 कU 1 हीH । 16. तिनाण9या कU ्ቚतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभालखा श ्ቈपुKवे9क वेपुस ्ቚतिष ही । सही /- (स!1या क मुर 1यासवेल) न्यायाI श पुमुना