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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 17855 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक िहमांशू वमार् की ओर से मु०अ०स० 07/2023, अन्तगर्त धारा 409 भा.दं.सं. थाना-देहलीगेट, िजला मेरठ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने पूरकशपथ पत्र दािखल िकया उसे पत्रावली पर रखा जाए।
4.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में झूठा फसाया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है, िदनांक 03.01.2023 को शाखा प्रबंधक पुनीत जग्गी व पूवर् कै श अिधकारी िशवानी जैन व पी०ओ० िविपन राणा व कै श अिधकारी चक्रवीर िसह ने आवेदक से दबाव देकर एक लेख िलखवाया िजसमें चैिकग के दौरान 40 लाख रुपये का िडफरेन्स होना बताया। जबिक प्रथम सूचना िरपोटर् में शाखा प्रबंधक ने 40,90,152/- रुपये का िडफरेन्स होना बताया िजससे स्पष्ट होता है िक लगाये गये आरोप सरासर झूठे व बनावटी है जो महज आवेदक को फं साने के िलए लगाये गये है। जबिक सही तथ्य यह है िक बैंक में जो भी गबन हुआ है वह शाखा प्रबंधक पुनीत जग्गी, िशवानी जैन िविपन राणा व चक्रवीर िसह की िमली भगत से हुआ है और गाज आवेदक पर िगरा दी गई है। बैंक में चारो ओर कै मरे लगे है और 40,92,152/- रुपये की धनरािश बहुत होती है िजसको िकसी ने ले जाते नहीं देखा। िजस लॉकर में कै श रखा जाता है उसकी दो चािबया होती है एक चाबी कै िशयर के पास होती है और एक चाबी शाखा प्रबंधक के पास होती है। सही तथ्य यह है िक आवेदक एक शरीफ, इज्जतदार एवं ईमानदार व्यिक्त है और आवेदक से ब्रांच मैनेजर पुनीत जग्गी व पी०ओ० इंिडयन बैंक िविपन राणा व चक्रवीर िसह कै िशयर अिधकारी व िशवानी जैन Versus Counsel for Applicant(s) : Manoj Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : Ashish Kumar Srivastava, G.A. Himanshu Verma .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) पूवर् कै श अिधकारी इंिडयन बैंक आवेदक से गलत काम करने के िलए दबाव दे रहे थे और आवेदक के मना करने पर उन्होंने आवेदक को बैंक से ट्रांसफर कराने व पद से हटाने की धमकी दी। इस सम्बंध में आवेदक ने एक प्राथर्ना-पत्र सम्बंिधत थाना देहली गेट, मेरठ को िदनांक 02.01.2023 को िदया और उसके पश्चात् आवेदक ने एक प्राथर्ना पत्र विरष्ठ पुिलस अधीक्षक महोदय मेरठ को िदनांक 05.01.2023 को डाक द्वारा प्रेिषत िकया और एक प्राथर्ना-पत्र िदनांक 06.01.2022 को िजला अिधकारी मेरठ को प्रेिषत िकया िजसमें आवेदक ने कहा िक उक्त लोगों से मेरी नौकरी, मेरे मान-सम्मान व जान को पूरा-पूरा खतरा बना हुआ है। शाखा प्रबंधक पुनीत जग्गी व िविपन राणा व चक्रवीर िसह आिद ने िदनांक 03.01.2023 ने आवेदक के साथ बैंक के अन्दर ही गाली गलौच व मारपीट की थी और आवेदक को यह भी कहा िक
आप छु ट्टी लेकर चले जाओ और क्योंिक उक्त लोग आवेदक से ऊँ ची पोस्ट पर है इसिलए आवेदक की िरपोटर् पर कोई कानूनी कायर्वाही उक्त लोगों ने नहीं होने दी और बैंक के शाखा प्रबंधक पुनीत जग्गी व बैंक के अिधकारी िविपन राणा, चक्रवीर िसह व िशवानी जैन की बात न मानने के कारण उसे इस मामले में फं सा िदया। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 01.04.2024 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5.
पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िकः- के स डायरी के अवलोकन से यह प्रकट होता है िक इस मामले में आवेदक िदनाक 13.08.2019 से 03.01.2023 तक इिण्डयन बैंक कबाडी बाजार मेरठ शाखा में कै िशयर के पद पर कायर्रत था और िदनांक 03.01.2023 को आवेदक की अिभरक्षा में रखे गये शाखा के कै श का औचक िनरीक्षण िकया गया ती शाखा के िरकाडर् के अनुसार कै श धनरािश रूपये 73.91.712/- होनी चािहए थी, िकन्तु भौितक रूप से कै श िगनवाने पर रूपये 33.01.560/- नकद िमले और रूपये 40,90,152 / रूपये कम िमले। पूछे जाने पर आवेदक ने यह कहा िक यिद उसका गृह ऋण स्वीकार कर िदया जाता है तो उसमें से वह बाकी का धन वापस कर देगा। िनरीक्षण के दौरान आवेदक को एक कारण बताओ नोिटस िदया गया, िजसमें अपनी गलती को उसके द्वारा स्वीकार िकया गया। तदोपरान्त बैंक के अंचल कायार्लय की जांच सिमित ने भी मामले की प्रारिम्भक जांच की और उनके द्वारा भी शाखा के कै श में रूपये 40,90,152 / रूपये कम होने की पुिष्ट की गयी। िदनांक 03.01.2023 को कायर्वाही देर रात तक चलने के कारण प्राथिमकी उस िदन पंजीकृ त नहीं करायी गयी और िदनांक 04.01.2023 को थाने प्रथम सूचना िरपोटर् दी गयी और थाने ने िदनांक 09.01.2023 को पंजीकृ त की इस प्रकार प्रथम सूचना िरपोटर् में जो िवलम्ब का कारण है, यह वादी बैंक के स्तर से न होकर थाने के स्तर से है। जहां तक आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने यह तकर् िदया है िक िकसी व्यिक्त ने आवेदक को कै श ले जाते हुए नहीं देखा तो वह तकर् संगत नहीं है िक लम्बे अविध लगभग साढ़़़े चार वषर् की किथत अविध में थोड़ा कै श जेब में रखकर धीरे धीरे भी धनरािश का गबन िकया जा सकता है। BAIL No. 17855 of 2024 2 बैंको को भी अपने कमर्चािरयों िवशेषकर कै िशयर के आते व जाते समय तलाशी का प्रावधान करना चािहए। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा यह तकर् िदया गया है िक जो पत्र आवेदक पर दवाब डालकर िलखवाया गया है, उसमें मात्र 40 लाख रूपये अंिकत है, जबिक आरोपपत्र में 40,90,152/-रूपये का उल्लेख है। यह िवचारण का िवषय है िक िकन पिरिस्थितयों में आवेदक ने अपनी स्वीकारोिक्त में चालीस लाख अंिकत िकये। सहायक प्रबंधक िविपन राणा ने समस्त पूछताछ व बातचीत को अपने मोबाइल फोन में
िरकाडर् कर िलया था। उसको पैनडाइव में सुरिक्षत करके िववेचक को िदया गया है, उस वीिडयो में जो बातचीत है, उसको टाइप कराकर भी बैंक शाखा के द्वारा िववेचक को िदये गये हैं। चूंिक इस मामले में नकद धनरािश को डबल लॉक से खोलकर व बंद करने के अितिरक्त समस्त धन को सुरिक्षत रखने का दाियत्व आवेदक पर था, इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता िक कै श की धनरािश में गबन करने का उसका कोई दोष नहीं है। आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 6. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में इस प्रकार मामले के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को देखते हुए आवेदक को जमानत पर छोड़ने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है।
7. तदनुसार वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकये हुए आवेदक का जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। September 16, 2025 S.Mishra BAIL No. 17855 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad