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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 591 (CHH)
YOGENDRA SINGH GAUR v. MAHESH KUMAR PATEL
MAC/51/2025 · 2026-07-16
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 591 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 6 {MA(C) No. 51 of 2025}
CGHC010456382024
2026:CGHC:30438 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-51
/2025
या(गन्द्र सिंस!ह ग,र, तिपु–श्री तिवेवेक क मांर सिंस!ह ग,र, आया लगभग 37 वेर्ष4, ति5वेस –मांक5 क्रमां!क 139, रध क! ज, खज9र कल र(ड, अवेधपुर , भ(पुल, मां०प्र०, वे4मां5 पु–फ्ल=ट क्रमां!क 502-स /01, वेड आइल@ड कAल(5 , अमांलश्वेर, सिंजल– दुग4, छत्ती सगढ़ -----अपु लर्थीE/दुवेक4 तिवेरूद्घ
1. मांहश क मांर पुटल, तिपु–ज वे5 लल पुटल, आया लगभग 36 वेर्ष4, ति5वेस –इ!तिदुर 5गर, दुल्ली रजहर, सिंजल– ल(दु (छत्ती सगढ़) (दु(र्ष वेह5 टKक क्रमां!क-स .ज .-04-ज.स .-6522 क वेह5 चलक)
2. लतिवे!दु उर्फ4 लतिवेन्दुर सिंस!ह भतिटया, तिपु–श्री लवे! सिंस!ह भतिटया, आया लगभग 35 वेर्ष4, ति5वेस –द्वार स!ध9 गड्स क= रिरयार टK!सपु(ट4, टK!सपु(ट4 5गर, टट !ध, आमां5क, सिंजल– रयापुर, छत्ती सगढ़ वे4मां5 पु–मां5 र(ड, तिचकलकस, अटल च,क, वेड4 क्रमां!क-2, दुल्ली रजहर, सिंजल–ल(दु (छत्ती सगढ़) (दु(र्ष वेह5 टKक क्रमां!क-स .ज .-04-ज.स .-6522 क पु!ज कR स्वेमां )
3. प्र!धक, 5श5ल इ!श्या(रTस क! पु5 सिंलतिमांटड, कया4लया क(ड–295201, शख–दुग4, क54टक @क सिंलतिमांटड क ऊपुर, स्टश5 र(ड, दुग4, सिंजल– दुग4 (छत्ती सगढ़) (दु(र्ष वेह5 टKक क्रमां!क-स .ज .-04-ज.स .-6522 क मां क! पु5 ) -----प्रत्यार्थीEगण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.20 10:43:13 +0530
2 / 6 {MA(C) No. 51 of 2025} अपु लर्थीE/दुवेक4 द्वार : श्री स!घर्ष4 पुण्डया, असिंधवेक्ता सतिह श्री सRज5 पुण्डया, असिंधवेक्ता । प्रत्यार्थीE क्रमां!क-1 द्वार : क(ई उपुस्थिस्र्थी 5ह_ । प्रत्यार्थीE क्रमां!क-2 द्वार : क(ई उपुस्थिस्र्थी 5ह_ । प्रत्यार्थीE क्रमां!क-3 द्वार : श्री प्रवे ण क मांर लस्या5, असिंधवेक्ता । न्यायामां9ति4 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! ति5ण4या पु ठ पुर पुरिर !! 17/07/2026
1. मां(टर या5 असिंधति5यामां, 1988 कc धर 173 क अ!ग4 प्रस् इस अपु ल मांT R या अपुर मां(टर दुघ4ट5 दुवे असिंधकरण, रयापुर, सिंजल-रयापुर (छत्ती सगढ़) द्वार दुवे प्रकरण क्रमां!क-545/2021, “या(गन्द्र सिंस!ह ग,र तिवेरुद्ध मांहश क मांर पुटल वेग=रह” मांT पुरिर असिंधति5ण4या तिदु5!क 29/08/2024 क( च5, दु गई ह= । सिंजस आग स!क्षेपु मांT
“प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या” स स!(सिंध तिकया ज रह ह= ।
2.
प्रकरण क थ्या, स!क्षेपु मांT, इस प्रकर ह@ तिक तिदु5!क 20/10/2019 क( दु(पुहर लगभग 02:20 ज श्री मां रूतिच ज=5 ग,र उर्फ4 रूतिच ज=5 अपु5 हjड तिडया( वेह5 स मांहदुवे घट र(ड, लख 5गर कc ओर ज रह र्थी_ । उस समांया तिप्र!स मां(इल क समां5, रयापुर, रयापुर मांT टKक क्रमां!क-स .ज .-04-ज.स .-6522 (सिंजस आग स!क्षेपु मांT "दु(र्ष वेह5" स स!(सिंध तिकया ज रह ह=) क चलक द्वार "दु(र्ष वेह5" क( व्र एवे! लपुरवेह पु9वे4क चलया सिंजसकc ठ(कर लग5 क र्फलस्वेरूपु रूतिच ज=5 ग,र क( ग!भ र च(टT आई! और घट5स्र्थील पुर ह उसकc मांRत्या ह( गई । उक्ता दुघ4ट5 क स!!ध मांT पुसिंलस र्थी5–ड .ड . 5गर, रयापुर, सिंजल–रयापुर (छत्ती सगढ़) मांT अपुरध क्रमां!क-368/2019 पु!ज द्ध कर भर या दुण्ड स!तिह कc धर 304(क) क अ!ग4 अपुरध दुज4 तिकया गया ।
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3. मांRक क पुति एवे! अपु लर्थीE/दुवेक4 द्वार मां(टर या5 असिंधति5यामां, 1988 कc धर 166 क अ!ग4 प्रतिकर ह दुवे प्रस् तिकया गया । उभयापुक्षे क( स55 क उपुर! असिंधकरण द्वार "प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या" पुरिर तिकया गया, सिंजसमांT याह ति5ष्कर्ष4 अतिभसिंलसिंख तिकया गया तिक दुघ4ट5 कc तिसिंर्थी पुर "दु(र्ष वेह5" तिमां 5ह_ र्थी । पुरिरणमांस्वेरूपु असिंधकरण 5
"दु(र्ष वेह5" क चलक एवे! पु!ज कR स्वेमां क( प्रतिकर रतिश क भग5 ह उत्तीरदुया
ठहरया । उक्ता असिंधति5ण4या क( इस अपु ल मांT च5, दु गई ह= ।
4. अपु लर्थीE/दुवेक4 कc ओर स उपुस्थिस्र्थी तिवेद्वा5 असिंधवेक्ता 5 क4 प्रस् तिकया तिक असिंधकरण द्वार मांRक कc आया क उतिच ति5ध4रण 5ह_ तिकया गया ह=, सिंजसक करण प्रतिकर रतिश कमां ति5ध4रिर हqई ह= । याह भ क4 तिदुया गया तिक अतिभलख पुर उपुलब्ध सक्ष्या क समांतिच मां9ल्या!क5 5ह_ तिकया गया ।
5.
आदुश 41 ति5यामां 27 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग4 प्रस् अ!रिरमां आवेदु5 क्रमां!क- 01/2024, ज( शपुर्थीपुत्र द्वार समांसिंर्थी4 ह=, क मांध्यामां स दुघ4ट5 कc तिसिंर्थी पुर "दु(र्ष
वेह5" क तिमां ह(5 स!!ध मां पुAसिंलस कc प्रति अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर ल5 क ति5वेदु5 तिकया गया ह= । तिवेद्वा5 असिंधवेक्ता 5 क4 तिकया तिक उक्ता दुस्वेज न्याया(तिच एवे! प्रभवे ति5ण4या क सिंलए अत्या! आवेश्याक ह= । अx उस अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर स्वे कर कर हqए "प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या" क( अपुस् कर प्रकरण क( पु5तिवे4चरण ह स!!सिंध असिंधकरण क( प्रतिप्रतिर्ष तिकया जए ।
6. प्रत्यार्थीE क्रमां!क-3/ मां क! पु5 कc ओर स उपुस्थिस्र्थी तिवेद्वा5 असिंधवेक्ता 5 मांया शपुर्थीपुत्र क जवे प्रस् कर याह स्वे कर तिकया तिक अपु लर्थीE/दुवेक4 द्वार अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT प्रस् मां पुAसिंलस उ5कc क! पु5 द्वार ह जर कc गई र्थी र्थी दुघ4ट5 कc तिसिंर्थी पुर वेह "दु(र्ष वेह5" क स!!ध मांT प्रभवेश ल र्थी ।
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7. उभयापुक्षे क क4 श्रीवेण तिकए गए र्थी अतिभलख क पुरिरश ल5 तिकया गया ।
8. आदुश 41 ति5यामां 27 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह, क प्रवेध5 ति5म्5वे ह=x-
“27. अपु ल न्यायालया मांT अतिरिरक्ता सक्ष्या क पुश तिकया ज5-(1) अपु ल क पुक्षेकर अपु ल न्यायालया मांT अतिरिरक्ता सक्ष्या चह वेह मां,सिंखक ह( या दुस्वेज , पुश कर5 क हकदुर 5ह_ हjग, तिक!
यातिदु- (क) उच्च न्यायालया 5 सिंजसकc तिडक्रc कc अपु ल कc गई ह=, ऐस सक्ष्या ग्रहण कर5 स इन्कर कर तिदुया ह ज( ग्रहण तिकया ज5 चतिहए र्थी, अर्थीवे [(कक) वेह पुक्षेकर ज( अतिरिरक्ता सक्ष्या पुश कर5 चह ह= याह सिंसद्घ कर दु ह तिक वेह सम्याक} त्पुर क प्रया(ग कर क वेज9दु ऐस सक्ष्या कc ज5कर 5ह_ रख र्थी या उस उस समांया पुश 5ह_ कर सक र्थी ज वेह तिडक्रc पुरिर कc गई र्थी सिंजसक तिवेरूद्घ अपु ल कc गई ह=, अर्थीवे] (ख) अपु ल न्यायालया तिकस दुस्वेज क पुश तिकए ज5 कc या तिकस सक्षे कc पुर क्षे कc ज5 कc अपुक्षे या ( स्वेया! ति5ण4या स55 क समांर्थी4 ह(5 क सिंलए या तिकस अन्या सरवे5} हक क सिंलए कर, ( अपु ल न्यायालया ऐस सक्ष्या क सिंलया ज5 या दुस्वेज क पुश तिकया ज5 या सक्षे कc पुर क्षे क तिकया ज5 अ5ज्ञा कर सक ग । (2) जह€ कह_ अतिरिरक्ता सक्ष्या पुश कर5 क सिंलए अपु ल न्यायालया अ5ज्ञा दु दु ह= वेह€ न्यायालया ऐस सक्ष्या क ग्रहण तिकए ज5 क करणj क( लखद्घ करग ।”
9. उपुया4क्ता तिवेसिंधक प्रवेध5 क पुरिरश ल5 स याह स्पुष्ट ह( ह= तिक यातिदु अपु ल या न्यायालया इस ति5ष्कर्ष4 पुर पुहq€च ह= तिक तिकस दुस्वेज क( अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर सिंलया ज5 न्याया(तिच एवे! प्रभवे ति5ण4या क सिंलए आवेश्याक ह= अर्थीवे तिकस अन्या सरवे5 करण स उसक अतिभलख पुर सिंलया ज5 अपुतिक्षे ह=, ( वेह ऐस दुस्वेज क( अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT स्वे कर कर5 कc अ5मांति प्रदु5 कर सक ह= । तिवेचरध 5 प्रकरण मांT
5 / 6 {MA(C) No. 51 of 2025} असिंधकरण 5 "प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या" पुरिर कर समांया याह ति5ष्कर्ष4 अतिभसिंलसिंख तिकया ह= तिक दुघ4ट5 कc तिसिंर्थी पुर "दु(र्ष वेह5" तिमां 5ह_ र्थी , जतिक आदुश 41 ति5यामां 27 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग4 प्रस् अ!रिरमां आवेदु5 क्रमां!क-01/2024 क सर्थी स!लग्न मां पुAसिंलस क स!!ध मांT स्वेया! मां क! पु5 5 अपु5 जवे एवे!
शपुर्थीपुत्र मांT याह स्वे कर तिकया ह= तिक उक्ता मां पुAसिंलस उ5क द्वार जर कc गई र्थी र्थी दुघ4ट5 कc तिसिंर्थी पुर प्रभवेश ल र्थी । ऐस स्थिस्र्थीति मांT उक्ता दुस्वेज क( अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर सिंलया ज5 न्याया(तिच एवे! प्रभवे ति5ण4या क सिंलए आवेश्याक प्र ह( ह= ।
10. उक्ता मां पुAसिंलस क( अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर स्वे कर तिकए ज5 पुर मां क! पु5 क( भ मां अ5!ध कc शƒ! क उल्ली!घ5 अर्थीवे अन्या उपुलब्ध वे=धति5क प्रतिरक्षेओ! क स!!ध मांT सक्ष्या प्रस् कर5 एवे! अपु5 पुक्षे रख5 क अवेसर प्रदु5 तिकया ज5 आवेश्याक ह(ग । इस प्रकर, अपु लर्थीE/दुवेक4 द्वार मांRक कc आया क स!!ध मांT प्रस् सक्ष्या क पुर क्षेण एवे! खण्ड5 कर5 क अवेसर भ मां क! पु5 क( उपुलब्ध करया ज5 न्याया(तिच ह(ग । ऐस पुरिरस्थिस्र्थीतियाj मांT र्थी अतिभलख पुर उपुलब्ध समांस् थ्या एवे! सक्ष्या कc प्रकR ति क( दृतिष्टग रख हqए, याह न्यायालया पु ह= तिक न्यायातिह मांT "प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या" क( अपुस् कर प्रकरण क( स!!सिंध असिंधकरण क( पु5तिवे4चरण ह प्रतिप्रतिर्ष तिकया ज5 उतिच ह(ग।
11. र्फलस्वेरूपु, आदुश 41 ति5यामां 27 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग4 प्रस् अ!रिरमां आवेदु5 क्रमां!क-01/2024 स्वे कर तिकया ज ह= । अपु लर्थीE/दुवेक4 द्वार प्रस् मां पुAसिंलस कc प्रति अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांT अतिभलख पुर ल ज ह= र्थी
"प्रश्5ध 5 असिंधति5ण4या" अपुस् तिकया ज ह=।
6 / 6 {MA(C) No. 51 of 2025}
12. प्रकरण अतिरिरक्ता सक्ष्या सतिह पु5तिवे4चरण एवे! तिवेसिंधवे} ति5रकरण ह स!!सिंध असिंधकरण क( इस ति5दु…श क सर्थी प्रतिप्रतिर्ष तिकया ज ह= तिक प्रस् मां पुAसिंलस क( अतिभलख पुर ल5 क उपुर! उभयापुक्षे क( आवेश्याक5सर अतिरिरक्ता सक्ष्या प्रस् कर5 र्थी स5वेई क समांतिच अवेसर प्रदु5 तिकया जए । त्पुश्च} अतिभलख पुर उपुलब्ध समांस् मां,सिंखक एवे! दुस्वेज सक्ष्या क सम्याक} मां9ल्या!क5 कर हqए प्रकरण क तिवेसिंध अ5सर यार्थीस!भवे 04 मांह कc अवेसिंध मांT ति5रकरण तिकया जए ।
13. उभयापुक्षे क( ति5दु…तिश तिकया ज ह= तिक असिंधकरण क समांक्षे तिदु5!क-03/08/2026 क( 11.00 ज अपु5 असिंधवेक्ता क मांध्यामां स उपुस्थिस्र्थी रहT ।
14. उपुर(क्ता5सर, अपु ल क ति5रकरण तिकया ज ह= ।
15. ति5ण4या कc प्रति क सर्थी असिंधकरण क अतिभलख श घ्रपु9वे4क आवेश्याक कया4वेह ह स9च5र्थी4 वे पुल5र्थी4 वेपुस प्रतिर्ष ह( । सह /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध श पो
मन