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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 4429 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 652/2013 अन्तगर्त धारा 406, 420, 506, 386, 120बी भारतीय दण्ड संिहता, थाना कोतवाली, िजला मथुरा में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदक को जमानत पर िरहा िकया जा सके ।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, सूचनाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता श्री अरिवन्द अग्रवाल द्वारा पूरकशपथ-पत्र दािखक िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।
4. सूचनाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता श्री िनितन चन्दर् िमश्रा द्वारा पूरकशपथ-पत्र दािखक िकया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक प्रश्नगत प्रकरण में उपरोक्त विणत धारा मिजस्ट्रेट द्वारा परीक्षणीय है तथा आवेदक इस मामलें के सत्र परीक्षण में िवचारण न्यायालय द्वारा िनयत ितिथयों पर िनयिमत रूप से उपिस्थत हो रहा है। इसिलए आवेदक को सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक अिग्रम जमानत पर मुक्त कर िदया जाय। पुनः उनका कथन है िक आवेदक िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देता है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर उपिस्थत रहेगा एवं आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
6.
पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्त के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्त की भूिमका Versus Counsel for Applicant(s) : Arvind Agrawal Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Nitin Chandra Mishra Ajay Kumar Jain .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना में उसकी भूिमका संभाव्य है। इसिलए अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय।
7. यहां प्रासंिगक तथ्य है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए।
8. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है।
9. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है।
10. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदक की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत िवचारण न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगा। iii) आवेदक िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ पर उपिस्थत होगा। iv) आवेदक उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगा, िजसका आरोप आवेदक पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा, िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी को तथ्य बताने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करें।
11.
उपयुर्क्त िकसी भी शतर् के उल्लंघन की िस्थित में, िवचारण न्यायालय कानून के अनुसार आवेदक की जमानत रद्द करने के िलए स्वतंत्र होगा। September 10, 2025 CP.sahani ABAIL No. 4429 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad