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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 56411 (CHH)

SMT. PARVATI DEVI @ PARBATIYA BECK v. STATE OF CHHATTISGARH

ACQA/369/2025 · 2025-12-15

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} 2025:CGHC:61290 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल ्ቅमु!क -369 /2025  ቦኍ मु पुवे, उ्ቛ, पुरतिया क पुति-च!दोन क, उ्቞-लगभग 45 वेष,, तिनवेस -ቇኋमु लजोर, पुलिलस थान-ख़቟ डोरन, हस ल-स पुर, लिजोल-सरगजो, छቈኍ सगढ़ -----अपु लथा:/्ቚलिथा,या तिवेरू्ሾ 1. छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर थान ्ቚभर , पुलिलस थान-अनस?तिच जोति कल्याण, अ!तिकपुर, लिजोल-सरगजो, छቈኍ सगढ़ (रज्या), 2. न लमुण मुह! तिपु-ए.डो . मुह!, उ्቞-लगभग 49 वेष,, तिनवेस -ቇኋमु स!दोरनगर, आमुटोल , पुलिलस थान-स पुर, लिजोल-सरगजो, छቈኍ सगढ़ (अतिभया), 3. ቦኍ मु ज्याति मुह! पुति-न लमुण मुह!, उ्቞-लगभग 39 वेष,, तिनवेस -ቇኋमु स!दोरनगर, आमुटोल , पुलिलस थान-स पुर, लिजोल-सरगजो, छቈኍ सगढ़ (अतिभया), -----उቈኍरवेदो गण अपु लथा:/्ቚलिथा,या ቛኋर : ቦኍ क ० रहन, अलिJवे । रज्या/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-1 : ቦኍ तिवेवेक तिमुቦኍ, पुMनल अलिJवे । अतिभया/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-2 वे 3 ቛኋर : स?चन ्ቚतिष नहN । मुनन या न्यायामु?ति, ቦኍ स!जोया क मुर जोयासवेल , न्यायाJ श POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.12.17 10:23:02 +0530 2 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} !! तिनण,या पु ठ पुर पुरिर !! 16/12/2025 1. अपु ल कS ቇኋ्ቨ पुर सन गया । 2. Jर-14(क)( ) i अनस?तिच जोति एवे! अनस?तिच जोनजोति (अत्याचर तिनवेरण) अलिJतिनयामु, 1989 सहपुतिठ Jर-413 भर या नगरिरक सरቌኋ स!तिह, 2023 क ह दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मुZ तिवेचरण न्यायालया-तिवेशष न्यायाJ श (अनस?तिच जोति एवे! अनस?तिच जोनजोति (अत्याचर तिनवेरण) अलिJतिनयामु, 1989 क ह गतिठ न्यायालया, लिजोस आग स!ቌኋपु मुZ “तिवेशष अलिJतिनयामु” कह गया हM), सरगजो, लिजोल-अ!तिकपुर, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेशष स्ቔ (एटो^लिसटो ज़) ्ቚकरण ्ቅमु!क-02/2021 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ न लमुण मुह! वे एक अन्या” मुZ पुरिर तिनण,या तिदोन!क- 08/07/2025 कS वेMJ क चनa दो गई हM । लिजोसक ह अतिभयाजोन क मुमुल ्ቚमुतिण न पु हcए अतिभया न लमुण मुह! क Jर-420, 294 (दो र), 506 भग-दो (दो र), 323 भर या दोण्डो स!तिह, 1860 एवे! तिवेशष अलिJतिनयामु कS Jर- 3(1)(दो), 3(1)(J), 3(2)( )( v क) था अतिभया ज्याति मुह! क Jर-294 (दो र), 323 भर या दोण्डो स!तिह, 1860 एवे! तिवेशष अलिJतिनयामु कS Jर-3(1)(J), 3(2)( )( v क) क अपुरJ स दोषमु तिकया गया । 3. अतिभयाजोन क मुमुल स!ቌኋपु मुZ इस ्ቚकर हM तिक ्ቚलिथा,या ቦኍ मु पुवे, उ्ቛ, पुरतिया क (अ.स.-5) जो उर!वे जोति कS हकर अनस?तिच जोनजोति वेग, कS हM उस आ!गऩ቟ कया,क, लजोर क पुदो पुर तिनया करवेन क आश्वेसन दोकर अतिभयागण न उसस 81,300/-रूपुया तिभ्ቐ-तिभ्ቐ तिकस्g मुZ छलपु?वे,क ्ቚ्቎ तिकया और रकमु वेपुस मु!गन पुर 3 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} उसक सथा मुरपु टो, गल -गलaजो कर जोतिग गलिलया! दोकर और जोन स मुरन कS JमुकS दोकर आपुरलिJक अतिभ्ቔस करिर तिकया । ्ቚथामु स?चन पु्ቔ ्ቚदोश, पु -2 दोजो, तिकया गया । घटोनस्थाल क नक्श Mयार तिकया गया । जोति ्ቚमुणपु्ቔ जोब् तिकया गया । सतिቌኋयाg क यान लिलए गए । स!पु?ण, तिवेवेचन उपुर! अतिभयागपु्ቔ ्ቚस् तिकया गया । 4. तिवेचरण क दोaरन आरपु ्ቚमुणन ह अतिभयाजोन कS ओर स अपुन पुቌኋ क समुथा,न मुZ 10 सतिቌኋयाg क पुर ቌኋण करया गया था 11 दोस्वेजो ्ቚदोश, तिचन्ह!तिक करए गए । Jर 313 दोण्डो ्ቚति्ቅया स!तिह क ह अतिभयागण न अपुन तिवेपुर आए सतिቌኋयाg क कथानg क इ!कर कर हcए स्वेया! क तिनदोnष हन था र!लिजोशवेश झू?ठ ्ቛp सया जोन या । अतिभयागण न चवे मुZ तिकस क पुर ቌኋण नहN करया । 5. उभयापुቌኋ क सन जोकर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर याह तिनष्कतिष, तिकया गया तिक घटोन वेष,- 2006 कS रह लिजोसकS रिरपुटो, कर 13 वेष, पुश्च तिदोन!क-31/07/2019 क दोजो, करई गई था जो रिरपुटो, स्वेया! ्ቚलिथा,या ቦኍ मु पुवे, उ्ቛ, पुरतिया क (अ.स.-5) न ्ቚकश अቇኋवेल क कहन पुर दोजो, करवेन या । ቦኍ मु पुवे, उ्ቛ, पुरतिया क क पुति च!दोन (अ.स.-3) क पुቌኋቖኘह घतिष हन क आJर पुर अतिभयाजोन मुमुल तिवेश्वेसन या न पु हcए तिवेचरण न्यायालया न “्ቚश्नJ न तिनण,या” पुरिर कर हcए अतिभयागण क दोषमु तिकया, लिजोस दोषमुति क इस अपु ल मुZ चनa दो गई हM । 6. न्यायादृኋ᭘! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुZ मुनन या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क तिनरकरण ह क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए हu जो कቄኌण्डोक-42 मुZ तिनम्ननसर हMx- 4 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} “42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.” 7. स!पु?ण, अतिभलख क पुरिरश लन स याह स्पुኋ᭘ ह हM तिक ्ቚलिथा,या ቦኍ मु पुवे, उ्ቛ, पुरतिया क (अ.स.-5) न स्वेया! अपुन सቌኚया मुZ याह स्वे कर तिकया हM तिक घटोन वेष, 5 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} 2006 कS हन क पुश्च लगभग 13 वेषn! क उसन कहN भ कई तिशकया नहN कS । वेष, 2019 मुZ जो लिललिख तिशकया ्ቚस् कS गई, वेह ्ቚकश अቇኋवेल क कहन पुर था उसक ቛኋर लिलखकर लकर दोन पुर, उस तिन पुढ़ हस्ቌኋर कर ्ቚस् कS गई था । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक वेह जो र्ቛ? ल Jन कS ्ቛसल नहN लग था, जोतिक अतिभयाजोन ्ቚकरण मुZ याह कह गया हM तिक एक तिकस् जो र्ቛ? ल Jन चकर दो गई था । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक अतिभयागण ቛኋर उसक सथा कभ कई मुरपु टो नहN कS गई । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक तिभ्ቐ-तिभ्ቐ तिकस्g मुZ लिजोन रतिशयाg क भगन क उसन उቤኔख तिकया हM, उनक स!!J मुZ न उसक पुस कई लिललिख अतिभलख हM और न ह उसकS तिलिथा ሺኋ हM । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक अतिभयागण स उसक कभ कई तिवेवेदो नहN हcआ था । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक वेष, 2019 मुZ जो ्ቚकश अቇኋवेल न उसस एवे! उसक पुति स कह तिक अतिभयागण क तिवेरु्ቍ तिशकया करन हM, वेह ्ቚकश अቇኋवेल क सथा थान गई था था उसक ቛኋर लिलखकर लए गए आवेदोन पुर हस्ቌኋर कर उस थान मुZ ्ቚस् कर तिदोया था । उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक ्ቚकश अቇኋवेल, भ?तिमु ्ቅया-तिवे्ቅया क व्यावेसया कर हM । सथा ह , उसन याह भ स्वे कर तिकया हM तिक ्ቚकश अቇኋवेल क तिवेरु्ቍ अतिभया न लमुण मुह!, जो पुश स अलिJवे हM, ቛኋर ग!वे क अनक व्यातियाg क ्ቚकरण ल़቟कर उन्हZ ्ቚकश अቇኋवेल स, उनकS भ?तिमु वेपुस तिदोलवेई गई था । इस करण स अतिभया पुቌኋ स ्ቚकश अቇኋवेल क तिवेवेदो था और उस क कहन पुर उसन याह रिरपुटो, दोजो, करई था । 8. उपुर न्यायादृኋ᭘! क ्ቚकश मुZ सቌኚया तिवेवेचन क ्ቛलस्वेरूपु याह न्यायालया पु हM तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर जो दोषमुति क तिनष्कष, अ!तिक तिकया गया हM वेह अतिभलख मुZ 6 / 6 {Acq. A. No.-369 of 2025} उपुलब्J थ्या और सቌኚया क तिवेपुर या तिवेरJभस नहN हM था ्ቚश्नJ न दोषमुति क तिनण,या मुZ कई अवेMJ या अश्ሾ पुरिरलतिቌኋ नहN ह । इसलिलए उसमुZ हस्ቌኋपु कS आवेश्याक नहN पुया जो । 9. अx दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याह अपु ल ቇኋ्ቨ याग्या न हन स ्ቚर!तिभक स्र पुर खरिरजो कS जो हM । 10. तिनण,या कS ्ቚतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख श ्ቈपु?वे,क वेपुस ्ቚतिष ह । सह /- (स!जोया क मुर जोयासवेल) न्यायाJ श पुमुन