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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 53384 (CHH)
STATE OF CHHATTISGARH v. SUNIL GUPTA
ACQA/1107/2024 · 2025-10-15
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 53384 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024}
2025:CGHC:51605 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-1107
/2024
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-लरमुपुर, लि/ल-लरमुपुर-रमुना/ग!/, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा0/रज्या तिवेरूद्घ
1. सना ल गप्ता तिपु-रमुक मुर गप्ता, उम्र-लगभग 40 वेष6, तिनावेस -अमुरवे पुर अडरईपुर, पुलिलस थाना-चलगल , लि/ल-लरमुपुर-रमुना/ग!/, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा0/रज्या द्वार : श्री आर.एना. पुस्टी , शासकAया अलिBवे सतिC श्री अना घोष, उपु शासकAया अलिBवे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : श्री ए.एना. पुण्डया, अलिBवे कA ओर स श्री शाभमु तिवेर , अलिBवे । मुनाना या न्यायामुHति6 श्री स!/या क मुर /यासवेल
, न्यायाB शा
!! तिनार्ण6या पु ठ पुर पुरिर !! 16/10/2025
1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिC, 1973 कA Bर-378 क C दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुS तिवेचरर्ण न्यायालया-तिवेशाष न्यायाB शा (अनासHतिच /ति एवे! अनासHतिच /ना/ति POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.10.17 14:27:11 +0530
2 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024} (अत्याचर तिनावेरर्ण) अलिBतिनायामु, 1989 क C गतिठ न्यायालया, लि/स आग स!क्षेपु मुS
“तिवेशाष अलिBतिनायामु” कC गया CZ), लरमुपुर स्थाना रमुना/ग!/, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशाष सत्र प्रकरर्ण क्रमु!क-08/2019 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ सना ल गप्ता” मुS पुरिर तिनार्ण6या तिदोना!क-15/11/2016 कA वेZB क चना\ दो गई CZ । लि/सक C अतिभया/ना क मुमुल प्रमुतिर्ण ना पु C]ए अतिभया सना ल गप्ता क Bर-454, 354, 354(क) भर या दोण्ड स!तिC, 1860 एवे! तिवेशाष अलिBतिनायामु कA Bर-3(1)()( ), 3(2)( i vक) क अपुरB स दोषमु तिकया गया ।
2. अतिभया/ना क मुमुल, स!क्षेपु मुS, इस प्रकर CZ तिक ग्रामु अमुरवे पुर तिनावेस अतिभयाक्त्र
(अ.स.-1), / तिवेवेतिC मुतिCल CZ, अपुना पुति और च्च क सथा तिनावेस कर CZ । अतिभयाक्त्र क घोर क समुना C अतिभया सना ल गप्ता क मुकना एवे! तिकरना दोकना स्थिस्था CZ । घोटीना तिदोना!क 30/10/2018 कA CZ, / अतिभयाक्त्र क पुति Cर गया C]आ था और उसकA पुत्र (अ.स.-2) तिवेद्यलया गई C]ई था । उस समुया अतिभयाक्त्र घोर मुS अक ल
था । लगभग प्रb 09:00 / अतिभया उसक घोर क अ!दोर आया और याC कC C]ए तिक
“अतिभयाक्त्र ना उसक तिवेरुद्ध क स तिकया CZ, वेC उसकA इज्/ करक रCग,” अतिभयाक्त्र क या! Cथा पुकड़कर खींgच था उसकA नाइटी खींgचकर उसक स्ना पुकड़ना क प्रयास तिकया । इस पुर अतिभयाक्त्र ना उसक Cथा झटीककर स्वेया!
क छ ड़या और Cर तिनाकल गई । घोटीना कA /नाकर उसना पुड़स (अ.स.-4) क दो , त्पुश्च तिवेद्यलया /कर अपुना पुत्र (अ.स.-2) क भ ई । इसक उपुर! अतिभयाक्त्र द्वार थाना चलगल , लि/ल लरमुपुर मुS तिशाकया कA गई, लि/स पुर शाHन्या पुर अपुरB पु!/ द्ध कर प्रदोशा6 पु -1 क रूपु मुS दो/6 तिकया गया । त्पुश्च मुमुल थाना अनासHतिच /ति
3 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024} कल्यार्ण, लरमुपुर क स्थाना!रिर तिकया गया, /C! मुHल अपुरB क्रमु!क 1/2018 क C अपुरB पु!/ द्ध तिकया गया । तिवेवेचना क दो\रना मु\क नाक्शा Zयार तिकया गया, सतिक्षेयाk क कथाना लिलए गए, अतिभयाक्त्र क /ति प्रमुर्णपुत्र /ब् तिकया गया, अतिभया कA तिगरफ्र कA गई था स!पुHर्ण6 तिवेवेचना उपुर! अतिभयाग-पुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. आरपु प्रमुर्णना वेस् तिवेचरर्ण न्यायालया क समुक्षे अतिभया/ना कA ओर स अपुना पुक्षे समुथा6ना मुS 7 सतिक्षेयाk क पुर क्षेर्ण था 8 दोस्वे/ प्रदोशा6 तिचन्C!तिक करए गए । Bर-313 दोण्ड प्रतिक्रया स!तिC क C याना मुS अतिभया ना अपुना तिवेपुर सतिक्षेयाk क कथानाk क इ!कर कर C]ए स्वेया! क तिनादोnष Cना या CZ लि/सना चवे मुS कई सक्ष्या प्रस् नाCg तिकया गया । उभयापुक्षे क सना /कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार प्रश्नाB ना तिनार्ण6या पुरिर तिकया गया CZ लि/स इस अपु ल मुS चना\ दो गई CZ ।
4. अपु लथा0/रज्या क तिवेद्वाना अलिBवे क क6 CZ तिक अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) ना न्यायालया मुS अपुना कथानाk क मुध्यामु स अतिभया/ना मुमुल क पुHर्ण6 समुथा6ना तिकया CZ, लि/सक कथानाk कA पुतिq उसकA पुत्र (अ.स.-2) था पुड़स (अ.स.-4) क कथानाk स C CZ । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उसपुर स!दोC स पुर तिवेश्वेस ना करक , सक्ष्या कA समुतिच समु क्षे नाCg कA गई CZ और दोषमुति क त्रतिटीपुHर्ण6 तिनाष्कष6 तिनाकल गया CZ, / स्थिस्थार रखीं /ना याग्या नाCg CZ । अb अपु ल स्वे कर कर “प्रश्नाB ना तिनार्ण6या” क अपुस् कर C]ए अतिभया क दोषलिसद्ध कर दोस्थिण्ड तिकया /ए ।
5. उत्तीरवेदो /अतिभया क तिवेद्वाना अलिBवे द्वार तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रश्नाB ना तिनार्ण6या” क समुथा6ना कर C]ए क6 तिदोया गया CZ तिक अतिभयाक्त्र द्वार तिकरना समुना उBर लकर रकमु अदो नाCg तिकया / रC था । लि/स उसना अतिभयाक्त्र क तिवेरूद्घ पुलिलस मुS
4 / 8 {Acq.
A. No.-1107 of 2024} तिशाकया कA था । लि/सस चना वेस् अतिभयाक्त्र ना उसक तिवेरूद्घ झHठ तिशाकया कA । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार / दोषमुति क तिनाष्कष6 तिनाकल गया CZ, वेC पुHर्ण6b उतिच CZ । अपु लथा0 रज्या पुक्षे द्वार अपु ल मुS उठए गए क6 स्वे कर याग्या नाCg Ct । अb अपु ल खींरिर/ कA /या ।
6. उभयापुक्षे क क6 श्रीवेर्ण तिकया गया और तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलखीं क सHक्ष्मुपुHवे6क पुरिरशा लना तिकया गया ।
7. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of
“State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:-
“8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.”
8. स!पुHर्ण6 सक्ष्या क पुरिरशा लना स याC स्थिस्थाति स्पुq C CZ तिक उभयापुक्षे क घोर एक-दोHसर क आमुना-समुना CZ और (अ.स.-4) भ उन्Cg क पुड़स मुS तिनावेस कर CZ । सक्ष्या स याC भ स्पुq CZ तिक अतिभया सना ल गप्ता अपुना मुकना मुS C तिकरना दोकना स!चलिल कर CZ । अतिभयाक्त्र ना अपुना कथाना मुS स्वे कर तिकया CZ तिक वेC अतिभया क दोकना स उBर पुर समुना लिलया कर था । याC थ्या तिनातिवे6वेदो CZ तिक अतिभयाक्त्र एक तिवेवेतिC मुतिCल CZ । उसना याC या CZ तिक उसक पुति घोर स Cर गया C]आ था, /तिक उसकA पुत्र
5 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024} (अ.स.-2) ना कC CZ तिक उसक तिपु उस समुया मु/दोHर करना गए था । पुत्र (अ.स.- 2) द्वार याC भ कC गया CZ तिक वेC घोटीना क समुया घोर पुर नाCg था , तिक!
इस स!!B मुS प्रस् सक्ष्या स!दोC उत्पुन्न कर Ct । स!दोC क करर्ण याC CZ तिक घोटीना क समुया प्रb 09:00 / या गया CZ । अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) एवे! उसकA पुत्र (अ.स.-2) दोनाk ना याC स्वे कर तिकया CZ तिक घोटीना ठ!ड क मु\समु मुS C]ई था । समुन्याb ठ!ड क समुया तिवेद्यलया क समुया सC क /या तिदोना मुS C CZ । ऐस स्थिस्थाति मुS याC स!भवेना कमु प्र C CZ तिक घोटीना क समुया अथा6 प्रb 09:00 / पुत्र (अ.स.-2) घोर पुर ना रC C । ऐस दोशा मुS, याC भ स!दोC/नाक C / CZ तिक कलिथा घोटीना Cना क पुश्च अतिभयाक्त्र ना पुत्र क तिवेद्यलया मुS /कर उस घोटीना क स!!B मुS /नाकर दो C ।
9. /C! क पुड़स (अ.स.-4) क प्रश्ना CZ? उसना अपुना कथाना मुS याC अवेश्या कC CZ तिक अतिभयाक्त्र ना आकर उस घोटीना कA /नाकर दो था , तिक! वेC प्रत्याक्षेदोशा0 सक्षे नाCg CZ स्थिल्क सना -सनाई क सक्षे CZ । इस सक्षे ना अपुना प्रतिपुर क्षेर्ण मुS स्वे कर तिकया CZ तिक न्यायालया ना याना स पुHवे6 अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) उसस तिमुल था और ल था तिक उसक पुक्षे मुS गवेC दोना CZ । इस सक्षे ना याC अवेश्या कC CZ तिक उसना अतिभया क घोटीना क समुया उस स्थाना पुर खींड़ दोखीं था, पुर! वेC स्थाना एक सवे6/तिनाक स्थाल CZ । अb उस स्थाना पुर अतिभया कA मुत्र उपुस्थिस्थाति स अतिभया/ना क पुक्षे मुS कई तिनाष्कष6 नाCg तिनाकल / सक, तिवेशाषb / याC भ तिनातिवे6वेदो CZ तिक अतिभया और अतिभयाक्त्र
दोनाk पुड़स Ct ।
10. उपुर स्थिस्थाति मुS अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) और उसकA पुत्र (अ.स.-2) क याना C
मुCत्वेपुHर्ण6 रC / CZ ।
6 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024}
11. स्वेया! अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) ना अपुना न्यायालया ना याना मुS अतिभया/ना क मुमुल क समुथा6ना तिकया CZ, तिक!
प्रतिपुर क्षेर्ण क दो\रना उसना याC स्वे कर तिकया CZ तिक वेC अतिभया क तिकरना दोकना स उBर पुर समुना खींर दो कर था । दोHसर ओर, उसकA पुत्र
(अ.स.-2) ना अपुना कथाना मुS याC कC CZ तिक उसकA मुy अतिभया क दोकना स नाCg, स्थिल्क तिकस अन्या तिकरना दोकना स समुना खींर दो था । इस प्रकर, अतिभयाक्त्र और उसकA पुत्र क यानाk मुS स्पुq तिवेरBभस पुरिरलतिक्षे C CZ । ऐस पुरिरस्थिस्थाति मुS याC प्र C CZ तिक पुत्र (अ.स.-2) क कथाना वेस्स्थिस्थाति क अनारूपु नाCg CZ और उसना इस स!!B मुS सC कथाना नाCg तिकया CZ ।
12. अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) ना याC भ स्वे कर तिकया CZ तिक उसक आसपुस कई अन्या लगk क मुकना Ct, लि/सक समुथा6ना स्वे!त्र सक्षे (अ.स.-4) ना भ तिकया CZ । तिक! उसना याC भ स्वे कर तिकया तिक घोटीना क समुया उसना तिकस प्रकर क शार-शार नाCg तिकया । याC व्यावेCर स्वेभतिवेक प्र नाCg C । यातिदो अतिभया, / उसक पुड़स CZ, उसक घोर मुS घोसकर अतिभयाक्त्र कA लज्/ भ!ग करना क प्रयास कर रC था, समुन्याb अतिभयाक्त्र
क शार मुचना और आस-पुस क लगk स मुदोदो मु!गना स्वेभतिवेक C । तिक! , इस मुमुल मुS ऐस कई कया6 नाCg तिकया गया, / तिकस समुन्या मुतिCल क स्वेभतिवेक आचरर्ण क अनारूपु नाCg लग । इस प्रकर, अतिभयाक्त्र क कथाना मुS स!दोC उत्पुन्न C CZ ।
13. अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) ना अपुना प्रतिपुर क्षेर्ण मुS याC स्वे कर तिकया CZ तिक उसक पुरिरवेर आलिथा6क रूपु स अलिBक सम्पुन्न नाCg CZ और वे अतिभया कA तिकरना दोकना स आवेश्याक अनासर उBर मुS समुना ल था, लि/स अतिभया तिना तिकस आपुलित्ती क दो दो था । Cल!तिक अतिभयाक्त्र ना याC भ कC CZ तिक वे अतिभया क याCy कमु करक उBर क
7 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024} भगना कर दो था, पुर! उसना याC स्पुq नाCg तिकया CZ तिक कया6 वेC स्वेया!
कर था या उसक पुति कर था । अतिभयाक्त्र (अ.स.-1) ना प्रतिपुर क्षेर्ण मुS याC भ स्वे कर तिकया तिक उसना अतिभया क तिवेरुद्ध पुCल भ एक तिशाकया कA था , / एक अलग घोटीना स स!!लिB था और वेC घोटीना लगभग एक सप्ताC पुCल C]ई था । सथा C उसना याC भ
स्वे कर तिकया तिक उBर क पुZस ना दोना क स!!B मुS अतिभया ना भ उसक तिवेरुद्ध थाना चलगल मुS तिशाकया कA था , और उसक पुश्च C इस तिवेचरर्ण या तिशाकया क दो/6 करया गया । अतिभयाक्त्र ना याC भ स्वे कर तिकया तिक उसना अतिभया स लगभग पुyच- छb C/र रुपुया मुHल्या क तिकरना समुना उBर लिलया था ।
14. इना थ्याk क आBर पुर याC स्पुq CZ तिक उभयापुक्षे क मुध्या तिकरना समुना उBर लना और रकमु क लना-दोना क स!!B मुS पुCल स तिवेवेदो कA स्थिस्थाति तिवेद्यमुना था । घोटीना स लगभग एक सप्ताC पुHवे6 C अतिभयाक्त्र ना अतिभया क तिवेरुद्ध तिशाकया कA था , और अतिभया द्वार तिशाकया तिकए /ना क पुश्च उसना याC तिवेचरर्ण या तिशाकया दो/6 करई । इसक अतिरिर, अतिभयाक्त्र ना घोटीना क समुया आस-पुस क लगk क मुदोदो क लिलए नाCg लया, / समुन्या स्वेभतिवेक आचरर्ण क अनारूपु नाCg CZ । सथा C , अतिभयाक्त्र और उसकA पुत्र क याना स याC भ स्पुq नाCg C]आ तिक ठ!ड क मु\समु मुS सC 09:00 / कA घोटीना क समुया पुत्र तिवेद्यलया कZ स चल गई, /तिक ठ!ड क समुया तिवेद्यलया क समुया समुन्याb तिदोना मुS C CZ, ना तिक प्रb । याC थ्या कथाना कA तिवेश्वेसना या पुर स!दोC उत्पुन्न कर CZ ।
15. उपुर न्यायादृq! क आBर पुर सक्ष्या तिवेवेचना क फलस्वेरूपु याC न्यायालया पु CZ तिक अतिभलखीं मुS उपुलब्B, थ्या और सक्ष्या क दृतिqग रखीं C]ए तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार /
8 / 8 {Acq. A. No.-1107 of 2024} दोषमुति क तिनार्ण6या पुरिर तिकया CZ उसमुS कई अवेZB या अशाद्घ नाCg CZ । इसलिलए उसमुS Cस्क्षेपु कA आवेश्याक नाCg पुया / ।
16. अb दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याC अपु ल स्वे कर याग्या ना Cना स खींरिर/ कA / CZ ।
17. तिनार्ण6या कA प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलखीं शा घ्रपुHवे6क वेपुस प्रतिष C । सC /- (स!/या क मुर /यासवेल) न्यायाB शा पुमुना