Research › Search › Judgment

High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 528 (CHH)

VIJAY KUMAR PATEL v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/1148/2025 · 2026-02-18

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) 2026:CGHC:8932 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाቄኌक अपु ल ्ቅाሰ"क -1148 /2025  तिवेजया क ाሰर पुटेल तिपु  रथराሰ पुटेल, उ्቞-लगभग 31 वे्ቧ2, ति3वेस -ቇኋाሰ 5ल्दा, पुलिलस थ3 एवे" हस ल-खरलिसया, लिजल-रयागढ़, छቈኍ सगढ़ -----अपु लथ;/अतिभया्ሹ तिवेरू्ሾ 1. छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर थ3 ्ቚभर , पुलिलस थ3-भAपुदावेपुर, रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छቈኍ सगढ़ (रज्या) 2. ( XYZ तिDकयाक2) -----्ቚत्याथ;गण अपु लथ;/अतिभया्ሹ ቛኋर : ቦኍ स"जया अቇኋवेल, अलिIवे्ሹ सतिह ቦኍ कJ ष्ण टे3, अलिIवे्ሹ । रज्या/्ቚत्याथ; ्ቅाሰ"क-1 ቛኋर : ቦኍ अाሰ3 ्቞कर, पुM3ल अलिIवे्ሹ । तिDकयाक2/्ቚत्याथ; ्ቅाሰ"क-1 ቛኋर : क5ई उपुቄኌOथ 3हP । ाሰ33 या न्यायााሰAति2 ቦኍ स"जया क ाሰर जयासवेल , न्यायाI D !! आदाD पु ठ पुर पुरिर !! 19/02/2026 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.02.20 10:25:37 +0530 2 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) 1. Iर 14(क)( ) i अ3सAतिच जति एवे" अ3सAतिच ज3जति (अत्याचर ति3वेरण) अलिIति3यााሰ, 1989 (लिजस आग स"ቌኔपु ाሰX "तिवेD्ቧ अलिIति3यााሰ" कह गया हM) क अ"ग2 ्ቚO इस अपु ल ाሰX, तिवेचरण न्यायालया-तिवेD्ቧ न्यायाI D (तिवेD्ቧ अलिIति3यााሰ), रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेD्ቧ आपुरलिIक ्ቚकरण (तिवेD्ቧ अलिIति3यााሰ) ्ቅाሰ"क 08/2025, “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरु्ቍ तिवेजया क ाሰर पुटेल” ाሰX पुरिर आदाD तिदा3"क 12/05/2025 क5 च3_ दा गई हM । उ्ሹ आदाD क5 स"ቌኔपु ाሰX “्ቚश्3I 3 आदाD” स स"5लिI तिकया ज रह हM । 2. “्ቚश्3I 3 आदाD” क अ"ग2 तिवेचरण न्यायालया ቛኋर अपु लथ;/अतिभया्ሹ तिवेजया क ाሰर पुटेल क तिवेरु्ቍ Iर 294, 506(भग-दा5), 376(2)(ढ़) भर या दा स"तिह एवे" तिवेD्ቧ अलिIति3यााሰ कb Iर 3(1)(दा), 3(1)(I), 3(2)( ) v क अ"ग2 आर5पु तिवेरतिच तिकया गया हM । 3. अतिभया5ज3 क ाሰाሰल स"ቌኔपु ाሰX इस आDया क हM तिक अतिभया5क्ቔኍ क पुति क ति3I3 वे्ቧ2 2010 ाሰX ह5 गया थ । अपु लथ;/अतिभया्ሹ तिवेजया क ाሰर पुटेल पुलिलस तिवेभग ाሰX आरቌኔक क पुदा पुर कया2र हM । अपु लथ; 3 अतिभया5क्ቔኍ क5 तिवेवेह कर3 क आश्वेस3 तिदाया थ उसक च्च क पुल3-पु5्ቧण एवे" दाखरख क तिवेश्वेस तिदालकर उसक सथ Dर रिरक स""I Oथतिपु तिकए । अतिभया5क्ቔኍ ቛኋर गभ2वे ह53 कb ज3कर दा3 पुर अपु लथ; 3 उसक सथ जर3 Dर रिरक स""I 3ए । गभ2पु कर3 स अतिभया5क्ቔኍ ቛኋर इ"कर तिकए ज3 क वेजAदा उस दावे लिखलई गई, उसक सथ ाሰरपु टे कb गई, गल -गल_ज कb गई थ ज3 स ाሰर3 कb Iाሰकb दा गई । ज अतिभया5क्ቔኍ 3 अपु लथ; स तिवेवेह क स""I ाሰX ्ቚश्3 तिकया, 5 अपु लथ; 3 तिवेवेह स इ3कर कर तिदाया । अपु लथ; एवे" उसकb पुत्3 ቛኋर 3 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) दाAरभ्ቧ पुर अश्ल ल एवे" जतिग गलिलया" दा गई" थ उस जहर सवे3 कर ाሰर ज3 क लिलए उकसया और सथ रख3 स इ"कर कर तिदाया । अपु लथ; 3 कह तिक वेह पुलिलस ाሰX हM और उसक क5ई क छ 3हP तिगड़ सक, अतिभया5क्ቔኍ क5 ाሰ3लिसक रूपु स ्ቚतिड़ तिकया । ाሰ3लिसक 3वे क करण अतिभया5क्ቔኍ ቛኋर जहर क सवे3 तिकया गया । उसक पुरिरज3g ቛኋर तिदा3"क 02.08.2024 क5 उस अOपुल ाሰX भ; करया गया, जह" वेह तिदा3"क 04.08.2024 क उपुचर करया । त्पुश्च, तिदा3"क 27.09.2024 क5 अतिभया5क्ቔኍ ቛኋर लिललिख तिDकया ्ቚO तिकए ज3 पुर पुलिलस थ3 भAपुदावेपुर ाሰX अपुरI ्ቅाሰ"क 95/2024 पु"ज ्ቍ तिकया गया थ तिवेवेच3 उपुर" अतिभया5गपुቔኍ ्ቚO तिकया गया । 4. अपु लथ;/अतिभया्ሹ क तिवेቛኋ3 अलिIवे्ሹ क क2 हM तिक अपु लथ; पुलिलस तिवेभग ाሰX आरቌኔक क पुदा पुर पुदाOथ हM । अतिभया5क्ቔኍ आदा3 अवेMI रूपु स ाሰतिदार तिवे्ቅया कर हM, लिजसक तिवेरु्ቍ आकर अलिIति3यााሰ क अ"ग2 अ3क ्ቚकरण पु"ज ्ቍ हi, थ उ3 ्ቚकरणg ाሰX अपु लथ; छपुाሰर ह ज रह हM । इस र"लिजDवेD अतिभया5क्ቔኍ ቛኋर उसक तिवेरु्ቍ झूAठ रिरपु5टे2 दाज2 करई गई हM । याह भ क2 ्ቚO तिकया गया हM तिक लिललिख तिDकया एवे" दा ्ቚति्ቅया स"तिह कb Iर 164 क अ"ग2 दाज2 अतिभया5क्ቔኍ क या3 ाሰX Oपु्ቖ तिवेर5Iभस हM । कलिथ घटे3 ाሰX तिवेD्ቧ अलिIति3यााሰ क अ"ग2 तिकस अपुरI क उቤኔख 3हP हM । ऐस दाD ाሰX उसक तिवेरू्ሾ ्ቚथाሰ दृ्ቖया ाሰाሰल 3हP 3 हM । तिवेचरण न्यायालया ቛኋर ज5 आर5पु कb रच3 कb गई हM वेह तिवेलिI क ्ቚकD ाሰX उतिच 3हP हM थ “्ቚश्3I 3 आदाD” ቄኌOथर रख ज3 या5ग्या 3हP हM । अq अपु ल Oवे कर कर हrए “्ቚश्3I 3 आदाD” अपुO तिकया जया । 4 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) 5. रज्या/्ቚत्याथ; ्ቅाሰ"क–1 क तिवेቛኋ3 अलिIवे्ሹ क क2 हM तिक लिललिख तिDकया ाሰX ह जतिग गल -गल_ज क Oपु्ቖ उቤኔख तिकया गया हM । आर5पु ति3I2रण क Oर पुर चवे क थ्याg क पुर ቌኔण तिकया ज3 उतिच 3हP हM । अतिभया5गपुቔኍ क पुरिरD ल3 स ्ቚथाሰदृ्ቖया अपुरI पुरिरलतिቌኔ ह53 क करण तिवेचरण न्यायालया ቛኋर पुरिर “्ቚश्3I 3 आदाD” पुAण2q उतिच एवे" वेMI हM । ऐस दाD ाሰX अपु लथ; पुቌኔ क क2 Oवे कर या5ग्या 3हP हM । अq अपु ल खरिरज कb जए । 6. उपुቄኌOथ पुቌኔ क क2 ቦኍवेण तिकया गया थ अतिभलख क पुरिरD ल3 तिकया गया । 7. तिवेलिI क याह सOथतिपु लिस्ቍ" हM तिक आर5पु ति3I2रण क चरण पुर अतिभया्ሹ अपु3 ्ቚतिरቌኔण ्ቚO 3हP कर सक । इस Oर पुर न्यायालया सቌኚया क तिवेOJ पुर ቌኔण या लघ-तिवेचरण 3हP कर, ቄኌल्क क वेल याह दाख हM तिक अतिभलख पुर उपुलब्I साሰቇኋ स अतिभया्ሹ क तिवेरु्ቍ अपुरI क ्ቚथाሰदृ्ቖया गठ3 ह5 हM या 3हP । यातिदा ्ቚथाሰदृ्ቖया पुया2्቎ आIर उपुलब्I ह5, 5 तिवेचरण ह आर5पु ति3I2रिर तिकया ज3 उतिच ह5 हM । 8. ाሰ33 या सवेxच्च न्यायालया ቛኋर State of Rajasthan v. Fatehkaran Mehdu, AIR 2017 SC 796 ाሰX याह तिवेलिI Oथतिपु कb गई हM तिक आर5पु ति3I2रण क चरण पुर न्यायालया आर5पुg क सत्यापु3 अथवे अ"तिाሰ ्ቚाሰतिणक क पुर ቌኔण 3हP कर, अतिपु अतिभलख पुर उपुलब्I साሰቇኋ क आIर पुर याह तिवेचर कर हM तिक क्या अतिभया्ሹ ቛኋर अपुरI तिकए ज3 क ्ቚल स"दाह उत्पु्ቐ ह5 हM । यातिदा उपुलब्I साሰቇኋ स ऐस सD्ሹ स"दाह पुरिरलतिቌኔ ह5 हM, ज5 तिवेचरण5पुर" दा5्ቧलिसति्ቍ कb तिदाD ाሰX अቇኋसर ह5 सक हM, 5 आर5पु ति3I2रण तिवेलिIसम्ाሰ ह5ग । आर5पु ति3I2रण कb अवेOथ दा5्ቧलिसति्ቍ क अ"तिाሰ पुर ቌኔण कb अवेOथ 3हP हM । 5 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) 9. इस ्ቚकर, State of M.P. v. Deepak, (2019) 13 SCC 62 ाሰX ाሰ33 या सवेxच्च न्यायालया 3 Iर 397 दा ्ቚति्ቅया स"तिह क अ"ग2 हOቌኔपु कb पुरिरलिI Oपु्ቖ कर हrए ्ቚतिपुतिदा तिकया हM तिक आर5पु ति3I2रण क Oर पुर न्यायालया क5 क वेल याह पुर ቌኔण कर3 ह5 हM तिक क्या अतिभया्ሹ क तिवेरु्ቍ अपुरI तिकए ज3 क अ3ाሰ3 कर3 ह पुया2्቎ आIर तिवे्ቕाሰ3 हM । इस चरण पुर न्यायालया सቌኚयाg क गण-दा5्ቧ क आIर पुर ाሰAल्या"क3 3हP कर और 3 ह याह ति3ष्क्ቧ2 ति3कल हM तिक अतिभललिख सቌኚया दा5्ቧलिसति्ቍ क लिलए पुया2्቎ हgग या 3हP । लिजसकb कቄኌक-16 ति3म्33सर हMq- “16. It was also noted that at the stage of framing of charges, the Court has to consider the material only with a view to find out if there is a ground for “presuming” that the accused had committed the offence : ( Chitresh Kumar Chopra case [ Chitresh Kumar Chopra v. State (NCT of Delhi), (2009) 16 SCC 605 : (2010) 3 SCC (Cri) 367] , SCC p. 613, para 25) “ 25. It is trite that at the stage of framing of charge, the court is required to evaluate the material and documents on record with a view to finding out if the facts emerging therefrom, taken at their face value, disclose the existence of all the ingredients constituting the alleged offence or offences. For this limited purpose, the court may sift the evidence as it cannot be expected even at the initial stage to accept as gospel truth all that the prosecution states. At this stage, the court has to consider the material only with a view to find out if there is ground for “presuming” that the accused has committed an offence and not for the purpose of arriving at the conclusion that it is not likely to lead to a conviction.” 10. ाሰ33 या सवेxच्च न्यायालया ቛኋर State (NCT of Delhi) v. Shiv Charan Bansal and Others, (2020) 2 SCC 290 ाሰX याह पु3q Oपु्ቖ तिकया गया हM तिक आर5पु ति3I2रण 6 / 6 (Cr. A. No.-1148 of 2025) क चरण पुर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर सቌኚयाg क सAቌኚाሰ एवे" तिवेOJ तिवेश्ल्ቧण या व्यापुक पुर ቌኔण तिकया ज3 अपुतिቌኔ 3हP हM । थतिपु, न्यायालया क5 याह अलिIकर हM तिक वेह उपुलब्I साሰቇኋ क स तिाሰ पुर ቌኔण कर याह सति3ቄኌश्च कर तिक अतिभया्ሹ क तिवेरु्ቍ तिवेचरण ्ቚर"भ कर3 ह ्ቚथाሰदृ्ቖया ाሰाሰल Oथतिपु ह5 हM या 3हP । 11. उपुर5्ሹ तिवेलिIक ्ቚवेI3 थ न्यायादृ्ቖ" क ्ቚकD ाሰX याह न्यायालया पु हM तिक अपु लथ; पुቌኔ ቛኋर ्ቚO क2 ाሰAलq चवे स स""लिI हi, लिज3क पुर ቌኔण आर5पु ति3I2रण क Oर पुर तिकया ज3 उतिच 3हP हM । अतिभया5गपुቔኍ स ज5 ्ቚथाሰदृ्ቖया थ्या पुरिरलतिቌኔ ह5 रह हi उ3क आIर पुर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर पुरिर "्ቚश्3I 3 आदाD" ाሰX क5ई अवेMI अथवे अD्ሾ पुरिरलतिቌኔ 3हP ह5 हM । अq उसाሰX हOቌኔपु तिकए ज3 कb आवेश्याक 3हP पुई ज । अq अपु ल खरिरज कb ज हM । 12. रलिजOटे| क5 ति3दा}तिD तिकया ज हM तिक इस आदाD कb ्ቚति याथD ्ቈ तिवेचरण न्यायालया क5 सAच3थ2 ्ቚति्ቧ तिकया जए । सह /- (स"जया क ाሰर जयासवेल) न्यायाI D पो मन