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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 52332 (ALL)

VIJAY SHANKAR PANDEY v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

BAIL/14659/2025 · 2025-07-23

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:122064 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14659 of 2025 Applicant :- Vijay Shankar Pandey Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Anurag Prakash Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A.,Jai Prakash Rao,Rajesh Kumar Srivastava Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. ससूचची पपुनरचीकक्षित। 2. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज प्रत्यपुत्तर शपथपत्र प्रस्तपुत ककयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलची पर रखद्वा जद्वाय। 3. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा, पररवद्वादची कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सपुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलची कद्वा पररशचीलन ककयद्वा। 4. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक कवजय शवंकर पद्वाणण्डिवेय ककी ओर सवे मपु०अ०सवं० 74/2025, अवंतगरत धिद्वारद्वा 419, 420, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा ककोतवद्वालची, धजलद्वा बधलयद्वा मम जमद्वानत पर मपुक करनवे हवेतपु प्रस्तपुत ककयद्वा गयद्वा हहै। 5. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक कको इस प्रकरर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झसूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं ककयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भची कक त्य कद्वाररत नहहीं ककयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वाकक प्रद्वाथकमककी मम दकशरत ककयद्वा गयद्वा हहै। प्रथम ससूचनद्वा ररपकोरर अकत - कवलणमबत हहै तथद्वा उक कवलमब कद्वा ककोई समपुकचत स्पषचीकरर नहहीं कदयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक पपुश्तहैनची रूप सवे खद्वानगची बवंरवद्वारवे कवे आधिद्वार पर अपनवे कहस्सवे पर कद्वाकबज रहद्वा हहै। वद्वादची मपुकदमद्वा कको न तको ककोई क्षिकत हहई हहै , न हची उसकद्वा आववेदक कवे कहस्सवे सवे ककोई वद्वास्तद्वा -सरकोकद्वार हहै। वद्वादची मपुकदमद्वा अपनवे कहस्सवे पर पसूवरवतत कद्वाकबज हहै। वतरमद्वान वद्वाद पसूररततः दचीवद्वानची प्रकक कत कद्वा हहै, ककन्तपु जद्वान-बसूझकर उसवे आपरद्वाधधिक प्रकद्वार कदयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक कद्वा नद्वाम आरद्वाजची सवं० 147/1 स ककी खततौनची मम कवधधिवतत दजर थद्वा , धजससवे उपरकोक जमचीन कको अपनची बहन कको उपहद्वार कवलवेख स्वरूप कनष्पद्वाकदत करनवे कद्वा अधधिकद्वारची थद्वा। वद्वादची दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भची सद्वाक्ष्य प्रस्तपुत नहहीं ककयद्वा जद्वा सकद्वा , धजससवे यह प्रतचीत हको सकवे कक उक कववद्वाकदत भसूकम मम उसकद्वा नद्वाम दजर हहै। अततः यह पसूरर रूप सवे पररलकक्षित हकोतद्वा हहै कक आववेदक कको धसफर रवंधजशन वतरमद्वान वद्वाद मम कमथ्यद्वारकोकपत ककयद्वा गयद्वा हहै। पपुनतः उनकद्वा यह भची कथन हहै कक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन कदयद्वा गयद्वा हहै कक वह कद्वानसून ककी प्रकक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भची आवश्यकतद्वा हकोगची वह ईमद्वानदद्वारची सवे अदद्वालत कवे समक्षि खपुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभची शतरवं कको स्वचीकद्वार करनवे कवे धलए भची तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोकपत करवेगची। आववेदक कनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम कद० 25.02.2025 सवे कद्वारद्वागद्वार मम कनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय। 6. पररवद्वादची कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा एववं कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल कवरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभचीर प्रकक कत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय। 7. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पत्रद्वावलची पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थकतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबसूतयों ककी प्रकक कत और ककसची भची ठकोस कवरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रची ककी अनपुपणस्थकत एववं उपलब्धि सद्वामग्रची सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरची रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मपुक करनवे कद्वा उपयपुक आधिद्वार हहै। 8. अततः वद्वाद कवे गपुर-दकोष पर कबनद्वा ककोई करप्परची ककए हहए आववेदक कको उपरकोक वकररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतपुकष पर व्यककगत बवंधि -पत्र एववं अधधिक धिनरद्वाकश कवे ककोई भची दको प्रकतभसू प्रस्तपुत करनवे पर कनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक कवववेचनद्वा यद्वा परचीक्षिर कवे दतौरद्वान अकभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अकभयकोजन सद्वाकक्षिययों व पचीकड़तद्वा / कशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परचीक्षिर कवे दतौरद्वान कबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए कनयत कतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परचीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारची सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंत्रतद्वा कद्वा दपुरूपयकोग नहची करवेगद्वा और ककसची भची अपरद्वाधधिक गकतकवधधि मम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररकचत ककसची भची व्यकक यद्वा पपुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हची उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे कवरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 9. उपरकोक शतरवं मम सवे ककसची कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परचीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत कनयमद्वानपुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत्र हहै। Order Date :- 24.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad