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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 52221 (ALL)

PRAMOD GOND v. STATE OF U.P.

BAIL/14797/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130441 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14797 of 2025 Applicant :- Pramod Gond Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Amaresh Yadava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज वदततीय पपूरक शपथपत दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पतद्वावलती पर रखिद्वा जद्वाय। 2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलती कद्वा पररशतीलन वकयद्वा। 3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Pramod Gond ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 320/2016, अवंतगरत धिद्वारद्वा 420, 467, 468, 471, 413, 414 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा ककोतवद्वालती, धजलद्वा आजमगढ़ मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा गयद्वा हहै। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झपूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भती कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। सह -अवभयसुक कवे बयद्वान कवे आधिद्वार पर आववेदक कको वतरमद्वान वद्वाद मम अवभयसुक बनद्वायद्वा गयद्वा हहै तथद्वा उक घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकती नहहीं हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान वद्वाद सवे सवंबवंधधित वकसती भती सवंवदग्धि वस्तसु ककी बरद्वामदगती दवशरत नहहीं ककी गयती हहै , न हती आववेदक ममौकवे सवे वगरफ्तद्वार वकयद्वा गयद्वा हहै। वरर 2024 मम आववेदक कवे ववरुद्ध गहैर जमद्वानततीय अधधिपत वनगरत हकोनवे कवे पश्चद्वात आववेदक कको कधथत वद्वाद ककी जद्वानकद्वारती हहई। आववेदक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद सवे सवंबवंधधित वकसती भती प्रकद्वार ककी कपू टरचनद्वा नहहीं ककी गयती हहै, न हती ककोई धिकोखिद्वाधिडती कद्वाररत ककी गयती हहै। उक वद्वाद मम धजस सह-अवभयसुक ववमक उफर वद्वावमकद्वा कवे बयद्वान कवे आधिद्वार पर अवभयसुक बनद्वायद्वा गयद्वा हहै , उक सह-अवभयसुक ककी जमद्वानत सवंबवंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा स्वतीकक त हको चसुककी हहै। आववेदक दद्वारद्वा आज दद्वाधखिल वदततीय पपूरक शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 2 कवे मद्वाध्यम सवे स्पष्ट वकयद्वा गयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भती कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भती आवश्यकतद्वा हकोगती वह ईमद्वानदद्वारती सवे अदद्वालत कवे समक खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभती शतरवं कको स्वतीकद्वार करनवे कवे धलए भती तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगती। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 10.03.2025 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभतीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलती पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबपूतयों ककी प्रकक वत और वकसती भती ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रती ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रती सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरती रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 7. अतनः वद्वाद कवे गसुर-दकोर पर वबनद्वा ककोई वटप्परती वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकगत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भती दको प्रवतभपू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परतीकर कवे दमौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पतीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परतीकर कवे दमौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परतीकर मम ईमद्वानदद्वारती सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहती करवेगद्वा और वकसती भती अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसती भती व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हती उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 8. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसती कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परतीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad