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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 52111 (ALL)

RAJKUMAR v. STATE OF U.P.

BAIL/14808/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130399 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14808 of 2025 Applicant :- Rajkumar Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Maha Prasad Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक रद्वाजकसु मद्वार ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 322/2023, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा नररैनली, धजलद्वा बद्वाबाँदद्वा मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हरै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हरै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हरै। आववेदक पर आकवेप हरै वक उसकवे दद्वारद्वा वद्वादली ककी जमलीन कको अपनद्वा बतद्वाकर , कझू टरवचित दस्तद्वाववेज तरैयद्वार करकवे बबक सवे ऋर लवे धलयद्वा रयद्वा। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हरै , जरैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हरै। प्रथम सझूचिनद्वा ररपकोटर अवत -ववलम्ब सवे दजर करद्वायली रयली हरै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचित स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हरै। आववेदक कद्वा नद्वाम व वपतद्वा कद्वा नद्वाम तथद्वा वद्वादली मसुकदमद्वा कद्वा नद्वाम व वपतद्वा कद्वा नद्वाम एक हली हरै, इसली वजह सवे आववेदक कको वमथ्यद्वा रूप सवे वतरमद्वान वद्वाद मम आरकोवपत वकयद्वा रयद्वा हरै। आववेदक नवे अपनली खसुद ककी भझूवम रद्वाटद्वा सवं० 64 रकबद्वा 0.1250 हवे0, रद्वाटद्वा सवं० 224 रकबद्वा 0. 7370 हवे० तथद्वा रद्वाटद्वा सवं० 225 रकबद्वा 0.1980 हवे० एववं रद्वाटद्वा सवं0 243 घ रकबद्वा 0.6960 हवे0, कसु ल रकबद्वा 1.7560 हवे0 कवे 1/3 भद्वार रकबवे पर ऋर अवंकन 1,39,000/- रूपयवे वदनद्वावंक 26.05.2014 कको धलयद्वा थद्वा। आववेदक दद्वारद्वा वकसली प्रकद्वार ककी धिकोखद्वाधिडली एववं कझू टरचिनद्वा कद्वाररत करकवे उक बबक सवे ऋर नहहीं धलयद्वा रयद्वा हरै। आववेदक नवे अपनवे ऋर ककी पझूरर अदद्वायरली वदनद्वावंक 19.8.22023 कको कर दली थली, धजसकवे सवंबवंधि मम बबक ककी तरफ सवे वनररत उन्मकोचिन प्रमद्वारपत वदनद्वावंवकत 21.08.2023, वतरमद्वान जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत मय शपथपत कवे अनसुलग्नक सवं० 5 कवे रूप मम सवंलग्न वकयद्वा रयद्वा हरै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हरै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हरै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तरैयद्वार हरै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तरैयद्वार हरै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हरै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 08.04.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हरै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हरै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हरै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हरै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad