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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 51974 (ALL)

KASIF v. STATE OF U.P.

BAIL/14626/2025 · 2025-09-15

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14626 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 20/2025 अन्तगर्त धारा 318(4), 338, 336(3), 319(2), 316(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना पीपीगंज, िजला गोरखपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। प्रश्नगत प्रकरण में आवेदक ने किथत तौर पर मौजा मंझिरया में िस्थत भूखंड संख्या 181 क्षेत्रफल 0.20 हेक्टेयर (5 दशमलव) की िबक्री के िलए सूचनाकतार् के साथ एक समझौता िकया था और पक्षों के बीच यह सहमित हुई थी िक िबक्री 2,40,000/- रुपये प्रित दशमलव की दर से की जाएगी, िजसमें से आवेदक को 2,25,000/- रुपये की बयाना रािश प्राप्त हुई है और शेष िबक्री प्रितफल िबक्री िवलेख के िनष्पादन के समय देय होगा। प्रथम सूचना िरपोटर् की आड़ में, सूचनाकतार्, आवेदक पर अपनी अवैध माँगों को पूरा करने के िलए दबाव बनाने का अथक प्रयास कर रहा है, जबिक आवेदक ने किथत अपराध नहीं िकया है। वतर्मान िववाद पूणर्तः िसिवल प्रकृ ित का है और इसके मद्देनजर, यह स्पष्ट है िक आवेदक ने जानबूझकर उत्पीड़न के हिथयार के रूप में िदनांक 11.01.2025 की प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई है। िदनांक 11.01.2025 के सीडी-1 में उिल्लिखत किथत िवक्रय-समझौता इस तथ्य का स्पष्ट संके त है िक यह एक अपंजीकृ त दस्तावेज़ है, िजसका कानून की दृिष्ट में कोई साक्ष्यात्मक मूल्य नहीं है। किथत िवक्रय-समझौते को लागू करने के िलए, सूचक को िविशष्ट अनुतोष अिधिनयम, 1963 की धारा 10 के अंतगर्त प्रदत्त िविधक उपाय का लाभ उठाना चािहए था, िजसमें यह प्रावधान है िक िकसी अनुबंध का िविशष्ट पालन न्यायालय द्वारा धारा 11 की उपधारा (2), धारा 14 और धारा 16 में िनिहत प्रावधानों के Versus Counsel for Applicant(s) : Vineet Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kasif .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) अधीन लागू िकया जाएगा/िकन्तु सूचनाकतार् द्वारा उक्त अभ्यास स्वयं ही ज्ञात कारणों से नहीं िकया गया है और इस प्रकार, अिभयोजन पक्ष की कहानी जानबूझकर गढ़़़़ी गई है तािक समाज में आवेदक की छिव, आत्म-सम्मान और गिरमा को धूिमल िकया जा सके । आगे यह भी कहा गया िक यह िक अन्यथा भी, िववािदत संपित्त, िजसकी िबक्री की जानी थी, के बदले आवेदक को नकद में दी गई 2,25,000/- रुपए की रािश की वसूली के िलए, सूचनाकतार् के िलए उिचत तरीका यह था िक वह आपरािधक कानून के उपायों का सहारा लेने के बजाय सक्षम िसिवल न्यायालय के समक्ष उस संबंध में िसिवल मुकदमा दायर करें, तथािप सूचनाकतार् द्वारा आवेदक के िखलाफ आज तक 2,25,000/- रुपए की रािश की वसूली के िलए ऐसा कोई मुकदमा दायर नहीं िकया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 12.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा 4. BAIL No. 14626 of 2025 2 और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 16, 2025 CP.sahani BAIL No. 14626 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad