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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 5194 (ALL)

RAHUL TOMAR v. STATE OF U.P.

BAIL/6624/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130863 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 6624 of 2025 Applicant :- Rahul Tomar Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Kuldeep Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A.,Manoj Kumar Dubey Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री कक लदश्रीप कक मद्वार , पररवद्वादश्री कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री मननोज कक मद्वार दकबवे एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कनो सकनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररशश्रीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक रद्वाहहल तनोमर ककी ओर सवे मक०अ०सवं० 351/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 318(4), 316(2), 351(3), 338, 339, 341, 61(2) बश्री.एन.एस., थद्वानद्वा वकठठौर, धजलद्वा मवेरठ मम जमद्वानत पर मकक करनवे हवेतक प्रस्तकत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तकत वकयद्वा वक आववेदक कनो इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा कनोई भश्री अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक प्रद्वाथवमककी मम नद्वावमत नहहीं हहै, दठौरद्वान ववववेचनद्वा सह-अवभयकक कवे बयद्वान कवे आधिद्वार पर आववेदक कनो वतरमद्वान वद्वाद मम आरनोवपत वकयद्वा रयद्वा हहै। यहद्वावं प्रद्वासवंवरक तथ्य हहै वक वतरमद्वान वद्वाद मम अन्य सह-अवभयककरर जसवश्रीर, आकद्वाश एववं मननोज कक मद्वार ककी जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 11273/2025, 6447/2025 एववं 7655/2025 मम वववभन्न न्यद्वायपश्रीठठों दद्वारद्वा वभन्न -वभन्न वतधथ कनो स्वश्रीकक त ककी जद्वा चकककी हहै। अतत जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयकक सवे समद्वान भझूवमकद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक भश्री जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारश्री हहै। पकनत उनकद्वा यह भश्री कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयनोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भश्री आवश्यकतद्वा हनोरश्री वह ईमद्वानदद्वारश्री सवे अदद्वालत कवे समक्ष खकद कनो उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभश्री शतरवं कनो स्वश्रीकद्वार करनवे कवे धलए भश्री तहैयद्वार हहै जनो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरनोवपत करवेरश्री। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 26.10.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कनो जमद्वानत पर छनोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरनोधि करतवे हहए तकर प्रस्तकत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभश्रीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कनो जमद्वानत पर न छनोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलश्री पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यठों एववं पररणस्थवतयठों कद्वा समग्र रूप सवे अवलनोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतठों ककी प्रकक वत और वकसश्री भश्री ठनोस ववरनोधिद्वात्मक सद्वामग्रश्री ककी अनकपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हनोनवे कवे तथ्य कनो दवेखतवे हहए मवेरश्री रद्वाय मम आववेदक कनो जमद्वानत पर मकक करनवे कद्वा उपयकक आधिद्वार हहै। 6. अतत वद्वाद कवे रकर-दनोष पर वबनद्वा कनोई वटिप्परश्री वकए हहए आववेदक कनो उपरनोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतकवष्टि पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे कनोई भश्री दनो प्रवतभझू प्रस्तकत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छनोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परश्रीक्षर कवे दठौरद्वान अवभयनोजन सद्वाक्ष्यठों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयनोजन सद्वावक्षयठों व पश्रीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कनो ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशठों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परश्रीक्षर कवे दठौरद्वान वबनद्वा कनोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हनोरद्वा तथद्वा परश्रीक्षर मम ईमद्वानदद्वारश्री सवे सहयनोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हनोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दकरूपयनोर नहश्री करवेरद्वा और वकसश्री भश्री अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हनोरद्वा न कनोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यठों सवे पररवचत वकसश्री भश्री व्यवक यद्वा पकधलस अधधिकद्वाररयठों कनो कनोई प्रलनोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हश्री उनसवे कनोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यठों कनो उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरनोक शतरवं मम सवे वकसश्री कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परश्रीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानकसद्वार रद्द करनवे कनो स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad