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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 51930 (CHH)
State Of Chhattisgarh v. Ratan Ram @ Shivratan
ACQA/112/2017 · 2025-10-06
Shri Sanjay Agrawal, Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 51930 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 8 {Acq. A. No.-112 of 2017}
2025:CGHC:49726-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्णया सरति ति क-25/09/2025 तिर्णया उद्घो)ति* ति क-07/10/2025 )*मुति. अपु ल क्रमु क
-112
/2017
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार जि3लण्डाजि6कर , जि3ल-सरग3, छत्ती सगढ़ -----अपु लर्थी8/रज्या तिवेरूद्घो
1. र रमु उर्फ ति;वेर तिपु मुहावे र रमु, उम्र-लगभग 25 वे*,
2. ढ़ उर्फ ति;वेरयार्ण तिपु मुहावे र रमु, उम्र-लगभग 22 वे*,
3. सलठू@ उर्फ वेरयार्ण तिपु मुहावे र रमु, उम्र-लगभग 20 वे*,
4. मुहावे र रमु तिपु गल जिस हा, उम्र-लगभग 55 वे*,
5. र्फ लमुतिया ई पुति ढ़ उर्फ ति;वेरयार्ण ग)ड़, उम्र-लगभग 20 वे*,
6. ति;मुल ई पुति र उर्फ ति;वेर ग)ड़, उम्र-लगभग 22 वे*, सभ तिवेस -ग्रामु वेपुरकल, समुल हार घाघा , पुजिलस र्थी-रिरमु, जि3ल- सरग3, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे गर्ण/अतिभया.गर्ण अपु लर्थी8/रज्या द्वार : श्री रूहाHल अमु मुमु, पुIल अजि6वे. । उत्तीरवे क्रमु क-1 स 5 द्वार : श्री तिवे;ल सहाK, अजि6वे. । उत्तीरवे क्रमु क-6 द्वार : श्री ऋति* रहाHल स) अजि6वे. कN ओर स श्री तिवेक्र तिपुल्लैI, अजि6वे.। POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.10.07 16:14:56 +0530
2 / 8 {Acq. A. No.-112 of 2017} यागल पु ठूQ मु या न्यायामु@ति श्री स 3या अग्रावेल
, न्याया6 ;
मु या न्यायामु@ति श्री स 3या क मुर 3यासवेल
, न्याया6 ;
!! स .ए.वे . तिर्णया !! द्वार
स 3या क मुर 3यासवेल
, न्याया6 ;
1. ण्डा प्रतिक्रया स तिहा, 1973 कN 6र-378 (1) क हा प्रस् इस अपु ल मु[ तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्याया6 ; (एर्फ०टी ०स ०), जि3ल-सरग3, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमु क-87/2006 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो र रमु उर्फ ति;वेर वेगIरहा” मु[ पुरिर तिर्णया ति क-07/10/2016 कN वेI6 क) चa
गई हाI । जि3सक हा तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अतिभया)3 क मुमुल प्रमुतिर्ण पु हाHए अतिभया.-र रमु उर्फ ति;वेर क) 6र-354, 342, 450, 376(1), 147, 148, 323/149, 323/149, 324/149 भ० ०स ०; अतिभया.-ढ़ उर्फ ति;वेरयार्ण क) 6र-323, 458, 147, 148, 323/149, 323/149, 324/149 भ० ०स ०; अतिभया.- सलठू@ उर्फ वेरयार्ण क) 6र-354, 342, 147, 148, 458, 323/149, 323/149, 324/149 भ० ०स ० र्थी अतिभया.गर्ण-ति;मुल ई, र्फ लमुतियाई, मुहावे र रमु क) 6र-147, 148, 458, 323/149, 323/149, 324/149 भ० ०स ० क आर)पु स )*मु. तिकया गया ।
2. याहा थ्या तितिवेवे हाI तिक अतिभया.गर्ण पुरस्पुर एक हा पुरिरवेर क सस्या हाf । सहाअतिभया.
कतिवेलस) ई एवे प्या3) ई कN मुhत्या हा) 3 स उक तिवेरुद्ध कयावेहा समुप्त कर
गई र्थी । याहा थ्या भ स्पुष्ट हाI तिक घाटी क पु@वे उभयापु 3) पुड़)स हाf उक मुध्या तिकस
प्रकर क तिवेवे हा)कर आपुस सaहापु@र्ण स 6 एवे पुरस्पुर आ-3 र्थी ।
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3. अतिभया)3 क मुमुल, स पु मु[, इस प्रकर हाI तिक ति क 02.07.2005 क) 45 वे*8या तिवेवेतिहा अतिभया)क्त्र (अ.स.-07) अपु छ)टी पुत्र (अ.स.-13) क सर्थी ग्रामु वेपुर कल, समुर हार घा स्थिस्र्थी अपु आवेस पुर र्थी , 3तिक उसक पुति एवे @सर पुत्र (अ.स.-03) वे 6 गए हाHए र्थी । लगभग 04:00 3 अतिभया. ढ़ रमु वेहा पुहाHqच और अतिभया)क्त्र क सर्थी डाण्डा स मुरपु टी कN, जि3सस उसक जिसर, हाsठू एवे याt आ ख पुर च)टी[ आई । इस aर च-चवे कर आए उसक पुत्र क) भ मुर क प्रयास तिकया गया, जि3सस वेहा भयावे; वेहा स भग गया । त्पुश्च अतिभया. र रमु एवे सलठू@ वेहाq पुहाH च और अतिभया)क्त्र क) पुकड़कर घार क पु छ 3 गल कN ओर ल गए, 3हाq अतिभया. र रमु द्वार अतिभया)क्त्र क) अपु सर्थी चल एवे उस पुत् रूपु मु[ रख स 6 [ कहा
गई । इसक उपुर अतिभया. सलठू@ वेहा स चल गया । रतित्र लगभग 10:30 3 अतिभया. र रमु अतिभया)क्त्र क घार घासकर उसक सर्थी 3र ष्कमु कर लग । उस समुया अतिभया)क्त्र क पुति एवे )s पुत्र वेहाq आ पुहाH च । अतिभया)क्त्र द्वार रवेज़ा ख)ल 3 पुर अतिभया. र रमु तिछपु गया, तिक अतिभया)क्त्र तिवेस्त्र अवेस्र्थी मु[ पुई गई । पुति एवे पुत्रs अतिभया. र रमु क) पुकड़कर ल@ ग स 6 तिया । ररमु क तिचल्लै पुर उसक तिपु मुहावे र रमु (डाण्डा सतिहा), अतिभया. ढ़ रमु ( र-6* एवे टी ग
सतिहा), अतिभया. सलठू@ (टी ग सतिहा), अतिभया. ति;मुल ई एवे र्फ लमुतिया (डाण्डा सतिहा) र्थी मुहावे र कN पुत्र मुन्नी (डाण्डा सतिहा) वेहाq आ पुहाHqच । इ सभ रवेज़ा )ड़कर घार मु[ प्रवे; तिकया र्थी अतिभया)क्त्र क पुति पुर डाण्डा एवे र-6* स प्रहार तिकया, पुत्र पुर टी ग स वेर तिकया, जि3सस उसक ए हार्थी कN गल कटी गई । मुतिहाल अतिभया.
द्वार अतिभया)क्त्र क) भ हार्थी-मुक्कs स मुरपु टी कN गई । अतिभया)क्त्र भयावे; वेहाq स भगकर ग्रामु करमुहा स्थिस्र्थी सर घाजिसया क घार ;रर्ण ल । त्पुश्च पुजिलस क
4 / 8 {Acq. A. No.-112 of 2017} पुहाHqच पुर वेहा घार लaटी और उन्हा[ समुस् घाटीक्रमु कN 3कर
। त्पुश्च, ति क 03.07.2005 क) पुति (अ.स.-6) कN रिरपु)टी पुर र्थी-रिरमु, जि3ल- सरग3, छत्ती सगढ़ मु[ अपुर6 क्रमु क-62/2005 पु 3 द्ध तिकया गया । मुaक क्; Iयार तिकया गया । सतियाs क या जिलए गए । 3ब् Iयार तिकया गया । रसयातिक पुर र्ण हा प्रया)ग;ल भ3 गया । स पु@र्ण तिवेवेच उपुर अतिभया)ग पुत्र प्रस् तिकया गया । तिवेचरर्ण पुश्च अतिभया.गर्ण क) )*मु. कर तिया गया, जि3स इस अपु ल मु[ चa
गई हाI ।
4. अपु लर्थी8/रज्या पु क तिवेद्वा अजि6वे. क क हाI तिक अतिभया)क्त्र (अ०स०-7) अतिभया)3 मुमुल क समुर्थी तिकया हाI जि3सकN पुतिष्ट उसक पुति (अ०स०-6), पुत्रगर्ण (अ०स०-3) एवे (अ०स०-13) कN हाI र्थी तिचतिकत्स या सक्ष्या स भ अतिभया)क्त्र क या कN पुतिष्ट हा) हाI तिर्फर भ तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उक सक्ष्या पुर तिवेश्वेस कर हाHए त्रतिटीपु@र्ण तिष्क* तिकल गया हाI 3) तिवेजि6 कN दृतिष्ट मु[ स्थिस्र्थीर रख 3 या)ग्या हाt हाI । अतिभया.गर्ण क तिवेरूद्घो अतिभया)3 क मुमुल प्रमुतिर्ण रहा हाI । अQ प्रश्6 )*मुति. क आ; अपुस् कर हाHए अपु ल स्वे कर कN 3कर अतिभया.गर्ण क) )*जिसद्ध कर स्थिण्डा तिकया 3ए ।
5. अतिभया.गर्ण/उत्तीरवे गर्ण क तिवेद्वा अजि6वे. क स या. क हाI तिक अतिभलख मु[ उपुलब्6 सक्ष्या क असर तिवेचरर्ण न्यायालया क )*मुति. स 6 तिष्क* पु@र्णQ उतिच हाI जि3समु[ तिकस हास्पु कN आवेश्याक हाt हाI । अपु लर्थी8 पु क क स्वे कर या)ग्या हाt हाI । अQ अपु ल खरिर3 कN 3ए ।
6. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया र्थी अतिभलख क स@क्ष्मुपु@वेक पुरिर; ल तिकया गया ।
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7.
Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of
“State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:-
“8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.”
8. अतिभया)क्त्र (अ.स.-7) एक 45 वे*8या तिवेवेतिहा मुतिहाल हाI, 3) अपु पुति एवे वेयास्क पुत्रs क सर्थी तिवेस कर हाI । अतिभया)3 मुमुल एवे प्रस् सक्ष्या क असर, उभयापु क मुध्या पु@वे मु[ तिकस प्रकर क तिवेवे या र जि3; हाt रहा । घाटी ति क पुर अतिभया. ररमु द्वार अतिभया)क्त्र स ;र रिरक स 6 स्र्थीतिपु हा) या गया । अतिभया)3 क असर याहा लत्कर र्थी, तिक स्वेया अतिभया)क्त्र (अ.स.-7) स्वे कर तिकया तिक रतित्र क समुया, 3 उसक पुति एवे पुत्रगर्ण घार लaटी, उस समुया अतिभया. ररमु उसक घार मु[ ग्न अवेस्र्थी मु[ मुa3@ र्थी । पुति एवे पुत्रs द्वार रवे3 ख)ल क जिलए कहा 3 पुर अतिभया)क्त्र स्वेया अतिभया. ररमु क सर्थी स)ई हाHई पुई गई । रवे3 खल पुर उसक पुति और पुत्रs अतिभया. क) ग्न अवेस्र्थी मु[ ख र्थी अतिभया)क्त्र क भ कपुड़ अस्-व्यास् पुए । इस पुर उन्हाs उस डा टी-र्फटीकर और ररमु स कहा तिक “क्या कर रहा हा)” उस समुया घार मु[ ति3ल हाt र्थी । पुति एवे पुत्रs अतिभया.
ररमु क) रस्स और ल@ ग स 6 तिया र्थी उस 2–3 र्थीप्पुड़ भ मुर । अतिभया)क्त्र क पुति एवे पुत्रs क याs स याहा भ स्पुष्ट हाHआ तिक 3 अतिभया)क्त्र रवेज़ा ख)ल उसक कपुड़
6 / 8 {Acq. A. No.-112 of 2017} भ अस्-व्यास् र्थी और वेहा स तिग्6 अवेस्र्थी मु[ र्थी । तिचतिकत्स या पुर र्ण क aर अतिभया)क्त्र क स्लइडा पुर ) वे या क 6ब् और हा मुवे ;क्रर्ण पुए गए । तिवेचरर्ण न्यायालया समुस् सक्ष्या क आ6र पुर याहा तिष्क* तिकल तिक याहा प्रमुतिर्ण हाt हा) तिक अतिभया. ररमु अतिभया)क्त्र कN इच्छ और सहामुति क तिवेरुद्ध उसक सर्थी ;र रिरक स 6 या हा) । अQ स पु@र्ण सक्ष्या क) दृतिष्टग रख हाHए तिवेचरर्ण न्यायालया अतिभया. ररमु क) रतित्र प्रच्छन्नी, गhहा अतिचर एवे लत्कर क अपुर6 स )*मु. कर तिया ।
9. 3हाq क स्वेच्छ उपुहाति, स)* पुरिरर)6 र्थी तिवेजि6-तिवेरुद्ध 3मुवे द्वार गhहा अतिचर स 6 अपुर6 क प्रश् हाI? इस स 6 मु[ प्रस् सक्ष्या पुर तिवेचर कर स ज्ञा हा) हाI तिक तिचतिकत्सक .एल. कa;ल (अ.स.-4) क असर पुति (अ.स.-6) क) क ल
च)टी[ पुई गई —पुहाल जिसर क मुध्या भग पुर, @सर जिसर क तिहा भग पुर र्थी सर
तिहा पुIर क हार तिहास्स पुर र्फटी और रगड़ हाHई च)टी । इ च)टीs कN प्रकh ति स6रर्ण ई गई हाI र्थी याहा स. और भ)र्थीर वेस् स करिर हा) सक हाf । अतिभया)क्त्र क वेयास्क पुत्र (अ.स.-3) क) एq हार्थी क अ ग@ठू और अतिमुक अ गल क च 6रर वेस् स स6रर्ण प्रकh ति कN च)टी आई र्थी जि3सस र.स्रावे हा) रहा र्थी । स्वेया अतिभया)क्त्र
क) जिसर क पु छ कटी हाHआ घावे, ई आqख क पुस क ट्यू@3 र्थी ऊपुर हाsठू पुर क ट्यू@3 पुया गया, 3) स6रर्ण प्रकh ति कN हा)कर 6रर वेस् स स भवे हाI । तिचतिकत्सक
.एल. कa;ल (अ.स.-4) प्रतिपुर र्ण मु[ याहा भ अतिभमु तिया हाI तिक स.
और भ)र्थीर वेस् स ई गई च)टी[ 6रल पुर तिगर स भ हा) सक हाf र्थी 6रर वेस् स हाHई च)टी[ ब्लडा, कf च अर्थीवे ब्ल 3Iस उपुकरर्णs स करिर हा) सक हाf ।
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10. उ. च)टी[ क, तिकस और कI स करिर कˆ, इस तिवे*या मु[ प्रस् सक्ष्या पुर तिवेचर कर स याहा पुरिरलति हा) हाI तिक क वेल अतिभया)क्त्र , स्थि‰क उसक पुति एवे पुत्रगर्ण क या स भ याहा स्पुष्ट हाI तिक घाटी क समुया घार मु[ अ 6र र्थी । अतिभया. ररमु क) अतिभया)क्त्र
क सर्थी उसक घार मु[ पुया गया र्थी, र्थी प्रर्थी8 पु स्वेया ररमु क) पुकड़कर क वेल q6, स्थि‰क उसक सर्थी मुरपु टी भ कN र्थी । 3 अतिभया. ररमु तिचल्लै प्रर भ तिकया, भ उसक पुरिरवेर क अन्या अतिभया.गर्ण मुaक पुर पुहाHqच । प्रर्थी8गर्ण अपु सक्ष्या मु[ याहा स्वे कर तिकया हाI तिक याति ररमु मुरपु टी स तिचल्लै हाt, ) अन्या अतिभया.गर्ण वेहाq हाt आ । इस प्रकर, ररमु क ;)र मुच पुर हा अन्या अतिभया.गर्ण क चवे हा आ या गया हाI । अतिभया)क्त्र क @सर पुत्र (अ.स.-13) स्वे कर तिकया तिक उस स्वेया अपु आqखs स याहा हाt ख तिक तिकस तिकसस मुरपु टी कN । स्वे त्र सतियाs—सर रमु (अ.स.-5), करमुर्थी (अ.स.-8), रमु; कर (अ.स.-9) एवे वेर (अ.स.-10)— अतिभया)3 क समुर्थी हाt तिकया हाI, स्थि‰क वे अपु पुजिलस या स भ मुकर गए । तिचतिकत्सक .एल. कa;ल (अ.स.-4) द्वार ई गई च)टी[ स6रर्ण प्रकh ति कN हाf । अतिभया. मुहावे ररमु स डा डा, अतिभया. ढ़ रमु स र-6* एवे टी ग र्थी अतिभया. सलठू@ स टी ग 3ब् कर या गया हाI, तिक इमु[ स तिकस भ
हाजिर्थीयार क रसयातिक पुर र्ण प्रतिवे प्रस् हाt तिकया गया हाI । याति इ अतिभया.गर्ण द्वार उपुर). हाजिर्थीयारs स एक सर्थी प्रर्थी8 पु पुर आक्रमुर्ण तिकया 3, ) क वेल स6रर्ण प्रकh ति कN च)टी[ हा)कर अजि6क ग भ र च)टी[ पुई 3t । सर्थी हा , 3Iस तिक अतिभया)क्त्र क पुत्र (अ.स.-13) कहा तिक उस स्वेया मुरपु टी हा) हाt ख र्थी, र्थी सभ प्रर्थी8 सतियाs याहा कहा तिक उन्हाs अतिभया. ररमु क) घार मु[ ग्न अवेस्र्थी मु[ पुया, उस पुकड़कर q6 और मुरपु टी भ कN र्थी ।
8 / 8 {Acq. A. No.-112 of 2017}
11.
ऐस ; मु[, ररमु क तिचल्लै पुर अन्या अतिभया.गर्ण क वेहाq आ तिवेजि6-तिवेरुद्ध 3मुवे क गठू कN मु ; क) प्रति; हाt कर, स्थि‰क उक वेहा अतिभया. ररमु क चवे हा आ पुरिरलति हा) हाI । जि3स प्रकर हाजिर्थीयारs कN 3ब् ;ई गई हाI र्थी क वेल स6रर्ण प्रकh ति कN च)टी[ आई हाf और स्वे त्र सक्ष्याs द्वार भ मुमुल कN पुतिष्ट हाt हाHई हाI, उस दृतिष्टग रख हाHए प्रर्थी8 पु क याs मु[ ग भ र तिवेर)6भस पुरिरलति हा) हाI । इ सभ थ्याs क) ख हाHए याहा स्पुष्ट हा) हाI तिक तिवेजि6-तिवेरुद्ध 3मुवे क गठू र्थी उक द्वार रतित्र प्रच्छन्नी गhहा-अतिचर क सर्थी स्वेच्छ उपुहाति करिर तिकए 3 क अपुर6 स हा स पुर प्रमुतिर्ण हाt हाI । अQ उपुर). न्यायादृष्ट एवे समुस् सक्ष्याs क पुरिरप्रक्ष्या मु[ हामु पु हाf तिक अतिभलख मु[ उपुलब्6 थ्या एवे सक्ष्या क आ6र पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार 3) )*मुति. क तिर्णया पुरिर तिकया गया हाI, उसमु[ तिकस प्रकर कN अवेI6 या अ;द्ध हाt हाI । इसजिलए उसमु[ तिकस हास्पु कN आवेश्याक हाt पुई 3 ।
12. अQ )*मुति. क तिवेरूद्घो प्रस् याहा अपु ल स्वे कर या)ग्या हा) स खरिर3 कN 3 हाI ।
13. तिर्णया कN प्रतिजिलतिपु क सर्थी तिवेचरर्ण न्यायालया क) अतिभलख ; घ्रपु@वेक वेपुस प्रति* हा) । सहा /- (स 3या अग्रावेल) न्याया6 ; सहा /- (स 3या क मुर 3यासवेल) न्याया6 ; पु)मु