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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 51690 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. GOPAL PATWA

ACQA/460/2024 · 2025-10-07

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} 2025:CGHC:50166 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल क्रमु!क -460 /2024  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-ति.वेर नारयाण, लि0ल-0!0ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा2/रज्या तिवेरूद्घ 1. गपुल पुटवे तिपु-.त्रुहना पुटवे, उम्र-लगभग 27 वेष;, तिनावेस -ग्रामु रह=दो, पुलिलस थाना-ति.वेर नारयाण, लि0ल-0!0ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा2/रज्या द्वार : श्री अना घोष, उपु .सकAया अलिBवे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : श्री तिवेकस क मुर पुण्डेया, अलिBवे । मुनाना या न्यायामुFति; श्री स!0या क मुर 0यासवेल , न्यायाB . !! तिनाण;या पु ठ पुर पुरिर !! 08/10/2025 1. दोण्डे प्रतिक्रया स!तिह, 1973 कA Bर-378 (1) क ह दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुS तिवेचरण न्यायालया-तिवे.ष न्यायाB . (लTतिगक अपुरBU स लकU क स!रक्षण अलिBतिनायामु, 2012 क ह गतिठ न्यायालया, लि0स आग स!क्षपु मुS “तिवे.ष अलिBतिनायामु” POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.10.09 10:28:37 +0530 2 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} कह गया हZ), 0!0ग र, लि0ल-0!0ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ द्वार तिवे.ष दोण्डिण्डेक प्रकरण क्रमु!क-19/2017 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ गपुल पुटवे” मुS पुरिर तिनाण;या तिदोना!क- 07/05/2018 कA वेZB क चना= दो गई हZ । लि0सक ह अतिभया0ना क मुमुल प्रमुतिण ना पु ह]ए अतिभया गपुल पुटवे क Bर-456, 354 (घो) भर या दोण्डे स!तिह, 1860 एवे! तिवे.ष अलिBतिनायामु कA Bर-12 क अपुरB स दोषमु तिकया गया । 2. अतिभया0ना क मुमुल, स!क्षपु मुS, इस आ.या क रह हZ तिक पु ति_ (अ.स.-1) तिदोना!क 02/02/2017 क टयाफॉbइडे स ग्रास् हना क करण उपुचर करना अपुना तिपु क सथा रह=दो सरकर अस्पुल गई था , 0ह! अतिभया गपुल पुटवे पुच2 कटना क कमु कर रह था । उसना पु ति_ क गल नाज़र स घोFर । इसक पुश्च 0 पु ति_ अस्पुल स घोर गई, अतिभया उसक पु छ-पु छ उसक घोर क आया । मुह फॉरवेर , 2017 मुS पु ति_ क मु-तिपु ति.वेर नारयाण मुल मुS गन्ने क रस क ठल लगना था त्पुश्च तिगर=Bपुर मुल मुS गन्ने क रस कA दोकना चलना चल गए था । पु ति_ 0 पुर क्ष था अन्या कया; स घोर स हर 0 था , अतिभया र-र उसक पु छ कर था, उस दोखकर मुस्क र था और इ.र कर था, लि0सस वेह डेर 0 था । तिदोना!क 25/02/2017 क र कर 01:00 0 अतिभया ना उसक घोर क दोरवेज़ क खटखटया । पु ति_ ना लिख_कA स झां!ककर दोख तिक हर अतिभया ख_ हZ । वेह डेरकर लिख_कA क पुल्ला !दो कर दो और सह अपुना मुk क फ़ोना द्वार सFतिच तिकया । मुk ना घोर क आह और दोरवेज़ !दो रखना कA तिहदोया दो । पुनाm तिदोना!क 04/03/2017 कA र कर 01:00 0 अतिभया गपुल पुटवे आह स कF दोकर अ!दोर आ गया और दोरवेज़ क खटखटना लग । उस समुया घोर मुS पु ति_ अपुना छट हना (अ.स.-3) क सथा था । उन्हUना लिख_कA स अतिभया क दोख और लिख_कA !दो कर ल । अतिभया वेहk 3–4 0 3 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} क रह था कमुर क दोरवेज़ कA च=खट क पु ट-पु टकर _ तिदोया । तिदोना!क 06/03/2017 क 0 उसक मु-तिपु तिगर=Bपुर मुल स वेपुस आए उसना पुFर घोटना ई और थाना मुS 0कर रिरपुट; दो0; करई, लि0स पुर थाना ति.वेर नारयाण द्वार अपुरB क्रमु!क 51/2017 क प्रथामु सFचना पुत्रु (प्रदो.; पु -1) कयामु कर, मु=क नाक्. (प्रदो.; पु -2) Zयार तिकया गया, पुटवेर स नाज़र नाक्. (प्रदो.; पु -3) Zयार करया गया, सतिक्षयाU क याना लिलए गए और स!पुFण; तिवेवेचना उपुर! अतिभयाग-पुत्रु प्रस् तिकया गया । 3. आरपु प्रमुणना वेस् तिवेचरण न्यायालया क समुक्ष अतिभया0ना कA ओर स अपुना पुक्ष समुथा;ना मुS 7 सतिक्षयाU क पुर क्षण था 10 दोस्वे0 प्रदो.; तिचन्ह!तिक करए गए । Bर-313 दोण्डे प्रतिक्रया स!तिह क ह याना मुS अतिभया ना अपुना तिवेपुर सतिक्षयाU क कथानाU क इ!कर कर ह]ए स्वेया! क तिनादोqष हना या हZ लि0सना चवे मुS कई सक्ष्या प्रस् नाहs तिकया गया । उभयापुक्ष क सना 0कर तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रश्नाB ना तिनाण;या पुरिर तिकया गया हZ लि0स इस अपु ल मुS चना= दो गई हZ । 4. अपु लथा2/रज्या क तिवेद्वाना अलिBवे क क; हZ तिक तिवेचरण न्यायालया ना पु ति_ क अवेयास्क मुना हZ, लि0स अतिभया पुक्ष द्वार कई चना= नाहs दो गई हZ । न्यायालया ना सक्ष्या मुS पु ति_ ना अतिभया0ना मुमुल कA पुतिt कA हZ, लि0सकA पुतिt पु ति_ कA मुk (अ.स.-2) था छट हना (अ.स.-3) क याना स भ ह हZ । तिवेचरण न्यायालया द्वार सक्ष्या कA समुतिच समु क्ष नाहs कA गई हZ और दोषमुति क त्रुतिटपुFण; तिनाष्कष; तिनाकल गया हZ, 0 ण्डिस्थार रख 0ना याग्या नाहs हZ । अm अपु ल स्वे कर कर “प्रश्नाB ना तिनाण;या” क अपुस् कर ह]ए अतिभया क दोषलिसद्ध कर दोण्डिण्डे तिकया 0ए । 4 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} 5. उत्तीरवेदो /अतिभया क तिवेद्वाना अलिBवे द्वार तिवेचरण न्यायालया क “प्रश्नाB ना तिनाण;या” क समुथा;ना कर ह]ए क; तिदोया गया हZ तिक पु ति_ था उसकA मुk और छट हना क तिवेचरण न्यायालया द्वार तिवेश्वेसना या नाहs पुया गया हZ । घोटना तिदोना!क 02/02/2017 स प्रर!भ हना या गया हZ, तिक! कफॉA ल! समुया पुश्च तिदोना!क 07/03/2017 क रिरपुट; दो0; करई गई । स्वे!त्रु सक्ष्या क अभवे हZ । तिपु स तिवेवेदो क करण र!लि0.वे. रिरपुट; लिलखई गया । इस घोटना स पुFवे; पु ति_ ना एक अन्या व्याति ति.वे च!दोल क तिवेरुद्ध भ इस प्रकर कA रिरपुट; दो0; करई था । इना स थ्याU क दृतिtग रख ह]ए तिवेचरण न्यायालया द्वार 0 दोषमुति क तिनाष्कष; तिनाकल गया हZ, वेह पुFण;m उतिच हZ । अपु लथा2 रज्या पुक्ष द्वार अपु ल मुS उठए गए क; स्वे कया; नाहs हT । अm अपु ल खरिर0 कA 0 हZ । 6. उभयापुक्ष क क; श्रीवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख क सFक्ष्मुपुFवे;क पुरिर. लना तिकया गया । 7. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of “State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:- “8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.” 5 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} 8. स!पुFण; सक्ष्या क पुरिर. लना स याह ण्डिस्थाति स्पुt ह हZ तिक पु ति_ और उसकA छट हना ना अपुना सक्ष्या मुS स्वे कर तिकया हZ तिक उनाक तिपु .र सवेना क आदो हT और तिदोना!क 02/02/2017 क पु ति_ अपुना तिपु क सथा अस्पुल गई था । उस तिदोना भ उनाक तिपु ना .र क सवेना तिकया ह]आ था । अतिभया0ना द्वार उ तिपु क सक्ष्या सFच मुS सण्डिम्मुलिल करना क वे0Fदो, उसक न्यायालया मुS पुर क्षण नाहs करया गया । 9. घोटना तिदोना!क 02/02/2017 स प्रर!भ हना कA कह गई हZ । तिदोना!क 25/02/2017 और तिदोना!क 04/03/2017 क अतिभया क पु ति_ क घोर मुS घोसना कA घोटनाएk ई गई हT, तिक! रिरपुट; तिदोना!क 07/03/2017 क कफॉA तिवेल! स दो0; करई गई । इस दो=रना, पु ति_ क मु-तिपु इस लगभग 10 तिदोना क अ!रल मुS लगर घोर स हर रह । इस स!!B मुS स्पुt सक्ष्या क अभवे हZ । ऐस दो. मुS पुलिलस रिरपुट; मुS तिवेल! क 0 करण या गया हZ, वेह सद्भातिवेक वे समुBनाप्रदो नाहs हZ । 10. पु ति_ कA हना (अ.स.-3) ना अपुना प्रतिपुर क्षण मुS याह स्वे कर तिकया हZ तिक लि0स र अतिभया उनाक घोर क आह क अ!दोर आया था, उस तिदोना उनाक घोर मुS नाना भ उपुण्डिस्था था । तिक! उस नाना क ना सक्ष्या सFच मुS सण्डिम्मुलिल तिकया गया और ना ह उसक पुर क्षण करया गया । इस प्रकर, पु ति_ (अ.स.-1) ना अपुना प्रतिपुर क्षण मुS याह स्वे कर तिकया तिक घोटना कA सFचना उसना अपुना पु_स नानाकA ई क दो था , तिक! उस नानाकA ई क भ ना अतिभया0ना द्वार सक्ष्या सFच मुS सण्डिम्मुलिल तिकया गया और ना ह उसक पुर क्षण करया गया । ऐस ण्डिस्थाति मुS, 0 पु ति_ क घोर क आस-पुस अनाक लग तिनावेस कर हT, याह स्वेभतिवेक प्र नाहs ह तिक अतिभया दो रU मुS पु ति_ क आह मुS घोसकर दोरवेज़ क _, तिफॉर भ पु ति_ और उसकA हना ना आस-पुस क 6 / 6 {Acq. A. No.-460 of 2024} लगU क तिचल्लाकर सहया क लिलए सFतिच ना तिकया ह । इस प्रकर, आस-पुस क लगU क घोटना कA 0नाकर ना दोना भ स्वेभतिवेक प्र नाहs ह । मुमुल मुS स्वे!त्रु सक्ष्या क अभवे हZ । कलिथा _ गए दोरवेज़ क कई पु!चनामु ना नाना और 0ब् ना तिकया 0ना भ अतिभया0ना क मुमुल मुS स!दोह उत्पुन्ने कर हZ । इसक अतिरिर, पु ति_ और उसकA हना ना याह थ्या स्वे कर तिकया तिक पुFवे; मुS भ पु ति_ ना एक अन्या व्याति ति.वे च!दोल क तिवेरुद्ध इस प्रकर कA रिरपुट; दो0; करई था । 11. उपुर न्यायादृt! क आBर पुर सक्ष्या तिवेवेचना क फॉलस्वेरूपु याह न्यायालया पु हZ तिक अतिभलख मुS उपुलब्B, थ्या और सक्ष्या क दृतिtग रख ह]ए तिवेचरण न्यायालया द्वार 0 दोषमुति क तिनाण;या पुरिर तिकया हZ उसमुS कई अवेZB या अ.द्घ नाहs हZ । इसलिलए उसमुS हस्क्षपु कA आवेश्याक नाहs पुया 0 । 12. अm दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याह अपु ल स्वे कर याग्या ना हना स खरिर0 कA 0 हZ । 13. तिनाण;या कA प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख . घ्रपुFवे;क वेपुस प्रतिष ह । सह /- (स!0या क मुर 0यासवेल) न्यायाB . पुमुना