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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 51053 (ALL)
SONU SINGH v. STATE OF U.P.
BAIL/14460/2025 · 2025-08-04
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 51053 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:131580 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14460 of 2025 Applicant :- Sonu Singh Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Upendra Upadhyay Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक सकोननू धसवंह ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 266/2015, अवंतररत धिद्वारद्वा 392, 120 बली. भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा मछलली शहर, धजलद्वा जजौनपसुर मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झनूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक प्रद्वाथवमककी मम नद्वावमत नहहीं हहै, दजौरद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घटनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली वस्तसु ककी बरद्वामदरली दवशरत नहहीं ककी रयली हहै, उक बरद्वामदरली कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहहीं हहै। उक वद्वाद मम अन्य सह - अवभयसुकरर ककी जमद्वानत पनूवर मम हली स्वलीकक त हको चसुककी हहै। अवग्रिम उनकवे दद्वारद्वा यह भली कथन वकयद्वा रयद्वा हहै वक उपरकोक आरकोवपत धिद्वारद्वाओवं मम अधधिकतम दस वरर ककी सजद्वा हहै, धजसमम सवे आववेदक दद्वारद्वा आठ वरर सवे अधधिक समय कद्वारद्वारद्वार मम व्यतलीत कर चसुकद्वा हहै तथद्वा सत परलीकर अभली भली प्ररवत कवे आधिद्वार पर पनूरर नहहीं हको पद्वायद्वा हहै एववं अभली तक आरकोप भली अवभयसुकक्तों कवे ववरुद्ध ववचररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पनूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत कवे
प्रस्तर सवं० 22 मम स्पष्ट वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वाननून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 30.03.2017 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यक्तों एववं पररणस्थवतयक्तों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबनूतक्तों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रिली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोर पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभनू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे दजौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यक्तों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयक्तों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशक्तों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे दजौरद्वान
वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यक्तों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयक्तों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यक्तों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 5.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad