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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 50411 (ALL)
RAMJEET YADAV v. STATE OF U.P.
BAIL/14328/2025 · 2025-08-04
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 50411 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:131244 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14328 of 2025 Applicant :- Ramjeet Yadav Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Surendra Mohan Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक रद्वामजलीत यद्वादव ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 09/2025, अवंतररत धिद्वारद्वा 309(4), 61(2), 317(2) बली.एन.एस., थद्वानद्वा वचिणलल्हियद्वा, धजलद्वा धसदद्वाथर नरर मम जमद्वानत पर मसुक करनवे ल्हिवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा ल्हिहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा ल्हिहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नल्हिहीं वकयद्वा ल्हिहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नल्हिहीं वकयद्वा रयद्वा ल्हिहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा ल्हिहै। प्रथम सझूचिनद्वा ररपकोरर ववलणमबत ल्हिहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समसुवचित स्पषलीकरर नल्हिहीं वदयद्वा रयद्वा ल्हिहै। आववेदक प्रथम सझूचिनद्वा ररपकोरर मम नद्वावमत नल्हिहीं ल्हिहै , ददौरद्वान ववववेचिनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा ल्हिहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घरनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली भली सवंवदग्धि वस्तसु ककी बरद्वामदरली दवशरत नल्हिहीं ककी रयली, जको भली बरद्वामदरली दवशरत ककी रयली ल्हिहै, वल्हि पझूररततः फजर्जी ल्हिहै तथद्वा उक बरद्वामदरली कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नल्हिहीं ल्हिहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पझूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतल्हिद्वासस , धजसवे शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 28 मम स्पष वकयद्वा रयद्वा ल्हिहै। पसुनतः उनकद्वा यल्हि भली कथन ल्हिहै वक आववेदक ककी
तरफ सवे यल्हि आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा ल्हिहै वक वल्हि कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सल्हियकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार ल्हिहै और जब भली आवश्यकतद्वा ल्हिकोरली वल्हि ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार ल्हिहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष ल्हिहै तथद्वा वल्हि इस प्रकरर मम वद० 13.02.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद ल्हिहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे ल्हिहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा ल्हिहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यस एववं पररणस्थवतयस कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतस ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न ल्हिकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे ल्हिहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार ल्हिहै।
6. अततः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए ल्हिहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यस कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नल्हिहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयस व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नल्हिहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशस कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वल्हि परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत
ल्हिकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सल्हियकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररल्हिद्वा ल्हिकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नल्हिली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नल्हिहीं ल्हिकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यस सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयस कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नल्हिहीं दवेरद्वा न ल्हिली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्ल्हिम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यस कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रल्हिनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत ल्हिहै। Order Date :- 5.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad