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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 50025 (ALL)

KASIF v. STATE OF U.P.

BAIL/13954/2025 · 2025-09-09

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 13954 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 17/2025, अंतगर्त धारा 318(4), 316(2), 319(2) बी.एन.एस., थाना पीपीगंज, िजला गोरखपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक पर आक्षेप है िक आवेदक को प्लॉट संख्या 181 के संबंध में 6 िडसिमल क्षेत्रफल खरीदने के िलए बयाना रािश के रूप में 1,65,000/- रुपये (गलत तरीके से 16,50,000/- रुपये में िलखा गया) नकद िदए गए थे, िजसके संबंध में िवक्रय-िवलेख िनष्पािदत नहीं िकया जा रहा है और आवेदक धन वापस नहीं कर रहा है। उक्त के संबंध में आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक ने किथत रूप से मौजा मंझिरया में िस्थत प्लॉट संख्या 181 क्षेत्रफल 0.020 हेक्टेयर (5 डेसीमल ) की िबक्री के िलए सूचनाकतार् के साथ एक समझौता िकया था और पक्षों के बीच यह सहमित हुई थी िक िबक्री 2,25,000/- रुपये प्रित डेसीमल की दर से की जाएगी, िजसमें से आवेदक को बयाना रािश के रूप में 1,65,000/- रुपये प्राप्त हुए हैं और शेष िबक्री मूल्य िबक्री िवलेख के िनष्पादन के समय देय होगा। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक आवेदक ने िववािदत संपित्त को बेचने के िलए कभी भी सूचनाकतार् से 1,65,000/- रुपये की किथत धनरािश नहीं ली है और न ही उसके साथ िकसी भी समय किथत िबक्री समझौता िकया है और इसके अितिरक्त, आवेदक को नकद में दी गई रािश के संबंध में गंभीर असंगतता है तथा सूचनाकतार् द्वारा क्रय िकए जाने वाले भूखंड के क्षेत्रफल के संबंध में भी गंभीर िवसंगित है, क्योंिक एफआईआर के अनुसार क्षेत्रफल 6 दशमलव दशार्या गया है और किथत िवक्रय समझौते के अनुसार क्रय िकए जाने वाले भूखंड का क्षेत्रफल 5 दशमलव दशार्या गया है और इस भौितक िवरोधाभास के कारण, सूचनाकतार् द्वारा आरोिपत अपराध पूरी तरह से मनगढ़़़़ंत और िनराधार है। आवेदक को किथत अपराध के संबंध में पुिलस द्वारा िदनांक 12.01.2025 को िगरफ्तार िकया गया था, िजसके बाद उसकी तलाशी ली गई, लेिकन उसके कब्जे से कोई भी आपित्तजनक सामग्री नहीं िमली। यह िववाद पूणर्तः िसिवल प्रकृ ित का है और जानबूझकर उत्पीड़न करने के इरादे से सूचनाकतार् द्वारा आवेदक को वतर्मान वाद में िमथ्या रूप से अिभयुक्त बना िदया गया है। Versus Counsel for Applicant(s) : Vineet Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kasif .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) (ख) प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक सूचनाकतार् इस तथ्य से अवगत था िक पक्षों के बीच िकया गया किथत िवक्रय समझौता एक अपंजीकृ त दस्तावेज है, िजसे संपित्त अंतरण अिधिनयम, 1882 की धारा 54 में िकए गए संशोधन के अनुसार प्रभावी नहीं िकया जा सकता है। अिधिनयम संख्या 57, 1976 तथा पंजीकरण अिधिनयम, 1908 की धारा 17, जो िदनांक 01.01.1977 से उत्तर प्रदेश राज्य पर लागू है, के अनुसार, यह कानून की आवश्यकता है िक िवक्रय के िलए िकए गए अनुबंध को पंजीकृ त िकया जाए तािक उसे न्यायालय द्वारा लागू िकया जा सके और इस प्रकार िदनांक 11.01.2025 की प्रथम सूचना िरपोटर् कानून में पूरी तरह से अनुिचत है। अन्यथा भी, िववािदत संपित्त, िजसकी िबक्री की जानी थी, के बदले आवेदक को नकद में दी गई 1,65,000/- रुपये की रािश की वसूली के िलए, सूचनाकतार् के िलए उिचत तरीका यह था िक वह आपरािधक कानून के उपायों का सहारा लेने के बजाय सक्षम िसिवल न्यायालय के समक्ष उस संबंध में एक िसिवल मुकदमा दायर करे, तथािप, सूचनाकतार् द्वारा आवेदक के िखलाफ आज तक 1,65,000/- रुपये की रािश की वसूली के िलए ऐसा कोई वाद दािखल नहीं िकया गया है। (ग) अिग्रम उनके द्वारा कथन िकया गया िक प्रथम सूचना िरपोटर् और बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दजर् िकए गए सूचनाकतार् के बयान के अवलोकन से ही यह स्पष्ट हो जाता है िक किथत अपराध के संबंध में समय, स्थान और ितिथ का कोई िववरण नहीं िदया गया है और इस प्रकार, अिभयोजन कथानक िमथ्या पिरलिक्षत हो रहा है। सूचनाकतार् द्वारा क्रय की जाने वाली िववािदत संपित्त के संबंध में आवेदक को 1,65,000/- रुपये नकद िदए जाने के तथ्य को प्रमािणत करने वाला कोई प्रत्यक्षदशीर् साक्षी नहीं है। चूँिक सूचनाकतार् द्वारा कोई ितिथ िनिदष्ट नहीं की गई है िक आवेदक को 1,65,000/- रुपये की रािश नकद कब दी गई थी, इसिलए यह अनुमान लगाया जा सकता है िक िदनांक 11.01.2025 की प्रथम सूचना िरपोटर् आवेदक को झूठा फं साने के अप्रत्यक्ष उद्देश्य से अत्यिधक िवलम्ब से दजर् की गई है और सूचनाकतार् द्वारा प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् करने में हुई अत्यिधक देरी के संबंध में कोई उिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है।सूचनाकतार् द्वारा आवेदक से अनुिचत धनरािश की माँग की गयी और जब आवेदक ने सूचनाकतार् की बात मानने में अपनी असमथर्ता िदखाई, तो सूचनाकतार् द्वारा अनुिचत रूप से मांगी गई रािश का भुगतान न करने के कारण उस पर िदनांक 11.01.2025 को प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् की गई। आवेदक ने न तो िवश्वासघात िकया है, न ही धोखाधड़ी की है और न ही छद्मवेश द्वारा धोखाधड़ी की है। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 31 एवं 32 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 12.01.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। BAIL No. 13954 of 2025 2 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 10, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 13954 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad