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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 49697 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. A

ACQA/798/2024 · 2025-09-14

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} 2025:CGHC:47258 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल क्रमु!क -798 /2024  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-उरग, लि0ल-कर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा1/रज्या तिवेरूद्घ  A -----उत्तीरवेदो /अपुचर लक अपु लथा1/रज्या द्वार : श्री रूहु7ल अमु ना मुमुना, पु8नाल अलि9वे । अपुचर लक/उत्तीरवेदो द्वार : श्री शुभमु दोवे मुलिलक, अलि9वे । मुनाना या न्यायामु=ति> श्री स!0या क मुर 0यासवेल , न्याया9 शु !! तिनार्ण>या पु ठ पुर पुरिर !! 15/09/2025 1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहु, 1973 कH 9र-378 (3) क हु दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुM तिवेचरर्ण न्यायालया-तिवेशुष न्यायालया (फास्ट टPक कट>), कर, लि0ल- कर, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशुष प्रकरर्ण क्रमु!क-02/2022 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ तिवेलि9 क सथा स!घष>र तिकशुर A” मुM पुरिर तिनार्ण>या तिदोना!क-26/07/2023 कH वे89 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN 2 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} क चनाU दो गई हु8 । लि0सक हु अतिभया0ना क मुमुल प्रमुतिर्ण ना पु हु7ए अपुचर लक A क 9र-304 (ख) सहुपुतिठ 9र-34 भर या दोण्ड स!तिहु, 1860 क आरपु स स!दोहु क लभ दो हु7ए दोषमु तिकया गया हु8 । लि0स आग “प्रश्ना9 ना तिनार्ण>या” स स!लि9 तिकया 0 रहु हु8 । 2. याहु थ्या अतिवेवेतिदो हु8 तिक अपुचर लक, मु\क अनार9 तिदोवेकर क दोवेर रहु हु8 । अनार9 तिदोवेकर क तिवेवेहु मुख्या-अतिभया अ0 तिदोवेकर क सथा तिदोना!क 24/04/2018 क स!पुन्न हु7आ था । याहु थ्या भ तिनातिवे>वेदो हु8 तिक अनार9 तिदोवेकर कH मु\त्या तिदोना!क 22/11/2020 क हु7ई था । 3. अतिभया0ना क मुमुल स!क्षेपु मुM इस प्रकर हु8 तिक तिदोना!क 24/04/2018 क समुलि0क र ति-रिरवेज़ स तिवेवेहु हुना क लगभग 04 मुहु पुश्च स मु\क अनार9 तिदोवेकर क उसक पुति अ0 तिदोवेकर, ससर स!गरमु था दोवेर अपुचर लक दोहु0 मुM हु र हुbड मुटरसइतिकल ना लना कH कहुकर शुर रिरक एवे! मुनालिसक रूपु स प्रतिc करना लग । उ प्रcना स व्यालिथा हुकर अनार9 तिदोवेकर ना तिदोना!क 22/11/2020 क 0हुर क सवेना कर आत्मुहुत्या कर ल । इस घटना कH स=चना पुर मुग> कयामु कर शुवे पुर क्षेर्ण करया गया था तिवेसर क रसयातिनाक पुर क्षेर्ण हु भ0 गया । मुग> 0eच उपुर! तिदोना!क 05/06/2021 क थाना उरग, लि0ल कर मुM अपुर9 क्रमु!क 162/2021 क प्रथामु स=चना पुत्र दो0> कर तिवेवेचना कH गई । तिवेवेचना उपुर! अतिभयाग पुत्र पुति एवे! ससर क तिवेरुद्ध प्रस् तिकया गया था दोवेर अपुचर लक क तिवेरुद्ध अतिभयाग पुत्र तिकशुर न्याया ड> क समुक्षे प्रस् तिकया गया, 0हुe स मुमुल तिवेशुष न्यायालया क सनावेई हु प्रप्त हु7आ । 3 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} 4. तिवेचरर्ण न्यायालया क समुक्षे अतिभया0ना कH ओर स अपुना पुक्षे समुथा>ना मुM 09 सतिक्षेयाb क पुर क्षेर्ण था 18 दोस्वे0 प्रदोशु> तिचन्हु!तिक करए गए । 9र-313 दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहु क हु याना मुM अतिभया/अपुचर लक ना अपुना तिवेपुर सतिक्षेयाb क कथानाb क इनाकर कर हु7ए स्वेया! क तिनादोkष हुना या हु8 लि0सकH ओर स चवे मुM स!गरमु तिदोवेकर क पुर क्षेर्ण करया गया । उभयापुक्षे क सना 0कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार प्रश्ना9 ना दोषमुति क तिनार्ण>या पुरिर तिकया गया हु8 लि0स इस अपु ल मुM चनाU दो गई हु8 । 5. अपु लथा1/रज्या पुक्षे क तिवेद्वाना अलि9वे क क> हु8 तिक अतिभया0ना सक्षे क रूपु मुM मु\क क तिपु भग रथा सनावेना (अ.स.-3), मुe ग ई (अ.स.-4) था 0 0 तिदोलरमु आतिदोल (अ.स.-2) ना अतिभया0ना क मुमुल क समुथा>ना तिकया हु8 । उनाक सक्ष्या स याहु स्पुष्ट हु हु8 तिक अपुचर लक ना अन्या वेयास्क सहु-अतिभयागर्ण क सथा समुन्या आशुया क अग्रसरर्ण मुM दोहु0 स्वेरूपु मुटरसइतिकल कH मु!ग कH था मु\क क शुर रिरक एवे! मुनालिसक रूपु स प्रतिc तिकया, लि0सक फालस्वेरूपु अनार9 तिदोवेकर ना आत्मुहुत्या कर ल । इस प्रकर, अपुचर लक क तिवेरुद्ध अतिभया0ना क मुमुल प्रमुतिर्ण रहु हु8 । तिफार भ , तिवेचरर्ण न्यायालया ना उपुलब्9 सक्ष्या क समुतिच मु=ल्या!कना नाहुr तिकया और प्रश्ना9 ना तिनार्ण>या पुरिर कर अपुचर लक क दोषमु कर तिदोया । च=eतिक प्रश्ना9 ना दोषमुति क तिनार्ण>या त्रतिटपु=र्ण> हु8, इसलिलए स्थिस्थार रख 0ना याग्या नाहुr हु8 । अv अपु ल स्वे कर कर दोषमुति क तिनार्ण>या अपुस् तिकया 0ए था अपुचर लक क दोषलिसद्ध कर तिवेलि9 अनासर दोस्थिण्ड तिकया 0ए । 6. उत्तीरवेदो /अपुचर लक पुक्षे क तिवेद्वाना अलि9वे क क> हु8 तिक अतिभया0ना सक्ष्या स याहु स्पुष्ट हु8 तिक कलिथा घटना क समुया अपुचर लक, 0 मु\क क रिरश् मुM दोवेर हु8, वेहु 4 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} मु\क एवे! उसक पुति क सथा तिनावेसर नाहुr था, स्थिल्क पु\थाक तिनावेस कर था । इस प्रकर चवे सक्ष्या स याहु भ स्पुष्ट हु8 तिक मु\क क पुति अ0 तिदोवेकर क पुस पु=वे> स हु मुटरसइतिकल था था उनाक तिपु क पुस भ मुटरसइतिकल था , अv मुटरसइतिकल कH दोहु0 मुM मु!ग क प्रश्ना हु उत्पुन्न नाहुr हु । इस करर्ण अपुचर लक पुर लगए गए आरपु तिनार9र एवे! झू=ठ हुx । इसक अतिरिर, घटना स पु=वे> दोहु0 मु!ग या प्रcना क स!!9 मुM अतिभयागर्ण क तिवेरुद्ध पुलिलस मुM तिकस प्रकर कH कई लिललिख अथावे मुUलिखक तिशुकया दो0> नाहुr करया गई था । अपुर9 कH कयामु भ प्रथा1 पुक्षे कH तिकस तिशुकया पुर नाहुr, स्थिल्क मुग> 0!च उपुर! कH गई हु8 । इस स!!9 मुM कई प्रत्याक्षे या अप्रत्याक्षे सक्ष्या उपुलब्9 नाहुr हु8 लि0सस याहु प्रमुतिर्ण हु सक तिक अपुचर लक ना मु\क क दोहु0 कH मु!ग हु कभ प्रतिc तिकया हु । इसलिलए प्रश्ना9 ना दोषमुति क तिनार्ण>या उतिच हु8 । अपु लथा1/रज्या पुक्षे क क> स्वे कर याग्या नाहुr हु8 । अv अपु ल खरिर0 कH 0ए । 7. उभयापुक्षे क क> श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलख क स=क्ष्मुपु=वे>क पुरिरशु लना तिकया गया । 8. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of “State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:- “8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.” 5 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} 9. स!पु=र्ण> अतिभलख एवे! प्रस् सक्ष्या क पुरिरशु लना स याहु स्पुष्ट हु हु8 तिक मु\क अनार9 तिदोवेकर क तिवेवेहु अ0 तिदोवेकर क सथा तिदोना!क 24/04/2018 क सम्पुन्न हु7आ था था 0हुर सवेना क फालस्वेरूपु उसकH मु\त्या तिवेवेहु क स वेष> क अ!दोर हु तिदोना!क 22/11/2020 क समुन्या स तिभन्न पुरिरस्थिस्थातियाb मुM हु7ई । 10. इस स्थिस्थाति मुM तिवेचरर्ण या प्रश्ना याहु हु8 तिक क्या मु\त्या स ठ क पु=वे> अपुचर लक/अतिभया ना समुन्या आशुया क अग्रसरर्ण मुM मु\क स दोहु0 कH मु!ग कर हु7ए उस प्रतिc तिकया अथावे उसक सथा क्र= रपु=र्ण> व्यावेहुर तिकया था? 11. अतिभया/अपुचर लक पुर मुख्याv याहु आरपु लगया गया हु8 तिक तिवेवेहु उपुर! स वेहु मु\क अनार9 तिदोवेकर स मुटरसइतिकल दोहु0 मुM लना कH मु!ग कर था । तिकन् चवे सक्षे क रूपु मुM मु\क क ससर स!गरमु क कथाना अनासर उसक पुस वेष> 2009 स हु र हुbड स्प्लMडर मुटरसइतिकल क्रमु!क स .0 .-12-एमु.-4198 हु8, लि0सक पु!0 याना प्रमुर्णपुत्र (प्रदोशु> ड -2) एवे! मु पु}लिलस (प्रदोशु> ड -4) हु8 । इस प्रकर, मु\क क पुति अ0 तिदोवेकर क पुस हुbड सइना मुटरसइतिकल क्रमु!क स .0 .-12-ए.एक्स.- 6315 रहु हु8, लि0सक पु!0 याना प्रमुर्णपुत्र (प्रदोशु> ड -5) एवे! मु पु}लिलस (प्रदोशु> ड -7) हु8 । इस थ्या क अतिभया0ना पुक्षे द्वार खण्डना नाहुr तिकया 0 सक हु8 तिक घटना स पु=वे> हु वेयास्क अतिभयागर्ण–पुति अ0 तिदोवेकर एवे! ससर स!गरमु–क नामु पुर मुटरसइतिकलM पु!0 क\ रहु हुx । मुटरसइतिकल कH दोहु0 मु!ग क स!!9 मुM अतिभया0ना कH ओर स लि0ना प्रमुख सतिक्षेयाb क पुर क्षेर्ण तिकया गया हु8, उनामुM मु\क क तिपु भग रथा सनावेना (अ.स.-3), मुe ग ई (अ.स.-4) एवे! 0 0 तिदोलरमु आतिदोल (अ.स.-2) सस्थिम्मुलिल हुx । तिपु भग रथा सनावेना एवे! मुe ग ई क सक्ष्या इस तिवेषया मुM स्पुष्ट नाहुr 6 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} हुx । ग ई याहु ना मुM असमुथा> रहु तिक पुति अ0 एवे! ससर स!गरमु क पुस पु=वे> स मुटरसइतिकल था या नाहुr । सथा हु , उनाक सक्ष्या स याहु थ्या भ स्पुष्ट हु8 तिक 0 भ पुति अ0 तिदोवेकर उनाक घर आ था, वेहु मुटरसइतिकल स हु आ था । ऐस स्थिस्थाति मुM, 0 पुति एवे! ससर क पुस पुहुल स हु मुटरसइतिकलM उनाक नामु पुर तिवेद्यमुना थाr, उनाक द्वार मुटरसइतिकल कH दोहु0 मु!ग तिकए 0ना स!!9 कथाना तिवेश्वेसना या प्र नाहुr हु । 12. अतिभया0ना कH ओर स पुरिरतिक्षे तिपु भग रथा सनावेना (अ.स.-3), मुe ग ई (अ.स.-4) था 0 0 तिदोलरमु आतिदोल (अ.स.-2) क कथाना स याहु थ्या दृतिष्टग नाहुr हु हु8 तिक मु\क अनार9 तिदोवेकर कH मु\त्या तिदोना!क 22/11/2020 क ठ क पु=वे> याहु तिवेचरर्ण या अपुचर लक, 0 मु\क क दोवेर हु8, मु\क एवे! उसक पुति क सथा तिनावेसर था । याहु भ उल्लेखना या हु8 तिक स!पु=र्ण> अतिभया0ना सक्ष्या स याहु पुरिरलतिक्षे हु हु8 तिक मु\क क मु-तिपु ना दोहु0 प्रcना क स!!9 मुM थाना मुM पु=वे> मुM भ तिशुकया करना कH कहु हु8, तिक! इस स!!9 मुM कई दोस्वेज़ सक्ष्या प्रस् नाहुr तिकया गया हु8 लि0सस याहु प्रमुतिर्ण हु सक तिक उनाक द्वार पु=वे> मुM दोहु0 प्रcना कH कई तिशुकया दो0> करई गई था । इना हु नाहुr, वे>मुना मुमुल मुM भ मु\क कH मु\त्या क पुश्च अपुर9 कH कयामु प्रथा1 पुक्षे कH तिकस लिललिख तिशुकया पुर नाहुr हु7ई, स्थिल्क मुग> 0!च उपुर! लगभग स मुहु पुश्च अपुर9 पु!0 द्ध तिकया गया । स!पु=र्ण> अतिभया0ना सक्ष्या मुM ऐस कई प्रत्याक्षे प्रमुर्ण उपुलब्9 नाहुr हु8 लि0सस याहु प्रमुतिर्ण हु सक तिक अपुचर लक/अतिभया, 0 मु\क क दोवेर हु8, ना स्वेया! दोहु0 मुM मुटरसइतिकल कH मु!ग कH हु अथावे इस प्रकर कH मु!ग क स!!9 मुM अन्या अतिभयागर्ण क सथा उसक समुन्या आशुया तिनातिमु> हु7आ रहु हु । 7 / 7 {Acq. A. No.-798 of 2024} 13. इस प्रकर, प्रस् न्यायादृष्ट! क प्रकशु मुM सक्ष्या तिवेवेचना क फालस्वेरूपु याहु न्यायालया पु हु8 तिक अतिभलख मुM उपुलब्9 थ्या और सक्ष्या क दृतिष्टग रख हु7ए तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार 0 दोषमुति क तिनार्ण>या पुरिर तिकया हु8 उसमुM कई अवे89 या अशुद्घ नाहुr हु8 । इसलिलए उसमुM तिकस हुस्क्षेपु कH आवेश्याक नाहुr पुया 0 । 14. अv दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याहु अपु ल स्वे कर याग्या ना हुना स प्रर!तिभक स्र पुर खरिर0 कH 0 हु8 । 15. तिनार्ण>या कH प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलख शु घ्रपु=वे>क वेपुस प्रतिष हु । सहु /- (स!0या क मुर 0यासवेल) न्याया9 शु पुमुना