Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 49000 (ALL)

LALCHAND YADAV v. STATE OF U.P.

BAIL/14502/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130507 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 14502 of 2025 Applicant :- Lalchand Yadav Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Pawan Kumar Yadav,Neha Rani,Satyvendra Singh Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Lalchand Yadav ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 159/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 339, 340 बली.एन.एस., थद्वानद्वा जद्वानपसुर, धजलद्वा भदकोहली मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा तथद्वाकधथत वकसली भली अवभलवेख यद्वा दस्तद्वाववेज मम कझू ट रचनद्वा नहहीं ककी रयली हहै और न हली वकसली प्रकद्वार ककी धिकोखद्वाधिडली ककी रयली हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररपकोटर व पसुधलस प्रपत मम ऐसवे वकसली भली अवभलवेख यद्वा दस्तद्वाववेज कद्वा धजक्र नहली हहै जको आववेदक दद्वारद्वा कझू टरवचत हको। प्रश्नरत वद्वाद मम क्रवे तद्वा नवे स्वयवं आववेदक ककी पत्नली कवे पक्ष मम वसलीयतनद्वामद्वा वनष्पद्वावदत वकयद्वा थद्वा , वकन्तसु सवंबवंधधित लवेखपद्वाल एववं गद्वाम -प्रधिद्वान दद्वारद्वा वमलकर प्रश्नरत सवंपधत्ति कको हडपनवे ककी नलीयत सवे अवहैधिद्वावनक आख्यद्वा दली हहै। वतरमद्वान वद्वाद दलीवद्वानली प्रकक वत कद्वा हहै, वकन्तसु जद्वान-बझूझकर इसवे आपरद्वाधधिक रूप वदयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वववद्वावदत रद्वाटद्वा सवं० 479M, 498M, 778M, 798M कवे सवंबवंधि मम मझूल वद्वाद सवं० 36/2025 एववं रद्वाटद्वा सवं० 479M कवे सवंबवंधि मम मझूल वद्वाद सवं० 25/2025, ववदद्वान धसववल न्यद्वायद्वाधिलीश (जवे.ण्डिली.), भदकोहली कवे न्यद्वायद्वालय मम ववचद्वारद्वाधिलीन हहै। आववेदक एववं उसककी पत्नली उक वववद्वावदत आरद्वाजली सवं० कवे मद्वाधलक हह, धजसकद्वा उलवेख प्रथम सझूचनद्वा ररपकोटर मम भली वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रयद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 24.03.2025 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामगली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामगली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्टि पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीक्षर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीक्षर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीक्षर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad